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BHU में 200 छात्राएं थाली लेकर धरने पर बैठीं, बोलीं- 'पीरियड्स में भी घटिया खाना दिया जाता है'

छात्राओं ने कहा- हॉस्टल की फीस 20 हजार, लेकिन खाने की क्वालिटी जीरो

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खाने की थाली लेकर प्रदर्शन करती छात्राएं (फोटो- आज तक)

वाराणसी (Varanasi) की बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में छात्राओं ने हॉस्टल के खाने (Bad food served at hostel in BHU) को लेकर सोमवार, 16 जनवरी को विरोध प्रदर्शन किया. हॉस्टल में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता को लेकर छात्राएं कई महीनों से शिकायत कर रही थीं. जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो करीब 200 छात्राओं ने सोमवार को प्रदर्शन शुरू कर दिया.

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इंडिया टुडे से जुड़े रोशन जायसवाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक छात्राओं का कहना है कि उन्हें मेस में अच्छा खाना नहीं मिलता है. उनके मुताबिक मेस में अच्छा खाना न मिलने की शिकायत यूनिवर्सिटी प्रशासन से कई बार की. लेकिन, प्रशासन की तरफ से कोई भी कार्रवाई नहीं की गई. इस वजह से नाराज छात्राओं ने सोमवार को हॉस्टल में साफ-सफाई और मेस के खाने की समस्या को लेकर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के आवास को घेर लिया. और जमकर नारेबाजी की, खाने की थाली हाथ में लेकर.

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रिपोर्ट के मुताबिक यूनिवर्सिटी के न्यू पीएचडी गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं द्वारा ये प्रदर्शन किया गया. खाने की प्लेट में परोसे हुए खाने की क्वालिटी के बारे में बताते हुए पीएचडी कर रही एक छात्रा ने बताया,

“मैं कई यूनिवर्सिटी में पढ़ चुकी हूं, लेकिन इतना घटिया खाना कहीं नहीं मिलता है. खाने में जो कस्टर्ड दिया गया है, उसमें एक भी फल नहीं है. हर महीने पांच-छह दिन लड़कियों को पीरियड्स होते हैं. ऐसा खाना खाने से कैसे लड़कियां अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखेंगी. पीरियड्स के समय में लड़कियों को अच्छे खाने की जरूरत होती है. यहां कई लड़कियां ऐसी आई हैं जिनके पीरियड्स चल रहे हैं.”

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान प्रदर्शनकारी छात्राओं ने बताया कि उन्होंने इसकी जानकारी यूनिवर्सिटी के वीसी और डीन को दी थी. इसके लिए उन्होंने मेल भी किया था. पर कोई भी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है.

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हॉस्टल में साफ-सफाई की भी व्यवस्था नहीं

यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ इंग्लिश से पीएचडी कर रही मैथली वर्मा ने बताया,

“हॉस्टल में साफ पानी और साफ-सफाई का भी ध्यान नहीं रखा जाता है. इसके अलावा हम ये चाहते हैं कि खाने के मील के हिसाब से पैसा लिया जाए. हम ज्यादातर समय अपनी रिसर्च की वजह से बाहर रहते हैं तो क्यों हम पूरा पैसा एक साथ दें? हम 10 दिन रहते हैं तो 20 दिन का पैसा क्यों दें? हम ये चाहते हैं कि हम जितना खाते हैं उतना ही पैसा हमसे लिया जाए. और सबके लिए एक समान नियम बनाए जाएं.”

प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने ये भी बताया कि हॉस्टल की फीस 20 हजार रुपये सालाना है. ये अन्य हॉस्टल से कई गुना ज्यादा है. इसके बावजूद उन्हें अभी तक वाईफाई की सुविधा नहीं मिली है. छात्राओं के मुताबिक मेस में जो दूध मिलता है वो सिंथेटिक दूध होता है. छात्राओं की मांग है कि मेस में पौष्टिक खाना मिलना चाहिए.

इसके अलावा प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने ये भी आरोप लगाया है कि वार्डन और मेस के कर्मचारी उन्हें धमकी देते हैं. जिसकी वजह से उन्हें पढ़ाई करने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है और मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ती है.

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