ईरान ने अमेरिका के सामने होर्मुज स्ट्रेट को 7 दिन में फिर से खोलने का प्रपोजल रखा है. तेहरान ने पूरे इलाके में जंग रोकने की बात भी कही है. होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के तकरीबन 20 फीसदी तेल और गैस की आवाजाही होती है. होर्मुज पर ईरान की पाबंदी और अमेरिकी नेवी की नाकाबंदी से एनर्जी सप्लाई बुरी तरह चरमरा गई है. इसका सीधा असर दुनिया भर में तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है. ईरान की तरफ से प्रस्ताव ऐसे समय पर आया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के बीच वेस्ट एशिया के हालात को लेकर बातचीत हुई.
'7 दिन में होर्मुज स्ट्रेट खोले देंगे, अगर...' ईरान ने अमेरिका को बड़ा ऑफर दे दिया
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान पर जबरन कोई दबाव नहीं डाला जा सकता. उन्होंने कहा कि ईरान होर्मुज खोलना चाहता है, लेकिन अमेरिका की सैन्य आक्रामकता, धमकियों, नाकाबंदी या आर्थिक दबाव के जरिए समुद्री सुरक्षा बहाल नहीं की जा सकती.

ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भारतीय समयानुसार शनिवार, 26 सितंबर की देर रात न्यूयॉर्क स्थित यूनाइटेड नेशंस हेडक्वार्टर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें उन्होंने कहा कि कतर के जरिए अमेरिका को 7 दिन का एक ठोस प्लान दिया गया है. फिलहाल, प्लान की पूरी डिटेल सामने नहीं आई है.
गेंद अमेरिका के पाले मेंसैयद अब्बास अराघची ने मीडिया से कहा,
7 दिन के प्लान में क्या होगा?"अगर जरूरी शर्तें पूरी होती हैं, तो होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जा सकता है और सात दिनों के अंदर सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल की जा सकती है. अब फैसला अमेरिका के हाथ में है."
ईरान के मुताबिक, अमेरिका के प्लान मानने के तुरंत बाद से ही 7 दिन का समय शुरू हो जाएगा. इस दौरान ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोल देगा और जहाजों की बेरोकटोक आवाजाही शुरू हो जाएगी. सैयद अब्बास अराघची ने बताया कि 7 दिन के प्लान के तहत अमेरिका को कुछ काम करने होंगे, जिनमें करीब 4-5 दिन का समय लग सकता है. छठे दिन होर्मुज खोल दिया जाएगा, और सातवें दिन ईरान और अमेरिका के बीच फाइनल एग्रीमेंट को लेकर बातचीत शुरू हो जाएगी.
ईरान ने अमेरिका को वॉर्निंग दीसैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान पर जबरन कोई दबाव नहीं डाला जा सकता. उन्होंने कहा कि ईरान, अमेरिकी की धमकियों के आगे नहीं झुकेगा. उनके मुताबिक, ईरान होर्मुज खोलना चाहता है, लेकिन सैन्य आक्रामकता, धमकियों, नाकाबंदी या आर्थिक दबाव के जरिए समुद्री सुरक्षा बहाल नहीं की जा सकती.
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका को वही काम करने होंगे, जिस पर अमेरिका पहले ही पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान-अमेरिका के बीच साइन हुए 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (Islamabad MoU) में रजामंदी दे चुका है.
ईरान चाहता है कि Islamabad MoU के तहत फाइनल एग्रीमेंट पूरा किया जाए. माने, अमेरिका, ईरान के पोर्ट्स पर लगी नाकाबंदी हटाए, ईरान का जब्त पैसा और संपत्ति वापस करे और ईरान के तेल पर लगी पाबंदी में छूट दे.
इसके अलावा, वेस्ट एशिया में सभी मोर्चों पर जंग पूरी तरह बंद करना भी प्रमुख मांग है. सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि संप्रभुता सशर्त नहीं होती. कूटनीति का मतलब सरेंडर नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि पूरी तरह खत्म कर देने की धमकियों के जरिए शांति कायम नहीं की जा सकती.
इससे पहले अमेरिका और चीन के बीच भी वेस्ट एशिया की मुद्दा उठा. चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी Xinhua के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से अमेरिका और ईरान से इस्लामाबाद समझौते पर वापस आने और फिर से बातचीत करने की अपील की.
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अमेरिका ने चीन को ईरान की मदद करने से भी मना किया है. चीन में अमेरिका के राजदूत डेविड पर्ड्यू ने कहा कि ट्रंप ने शी जिनपिंग को चेतावनी दी कि चीन से तरफ से ईरान की किसी भी तरह मदद ना की जाए. डेविड पर्ड्यू ने कहा कि चीन ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वो ईरान की मदद नहीं कर रहा है.
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