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'पति को काला या मोटा कहना क्रूरता नहीं', हाईकोर्ट ने खारिज की तलाक की याचिका

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी का पति को काला, सांवला या मोटा कहना अपने आप में तलाक देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है. कोर्ट ने पति के क्रूरता और पत्नी के छोड़कर जाने के आरोपों को भी ठोस सबूत नहीं होने के कारण स्वीकार नहीं किया और स्त्रीधन लौटाने के फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा.

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तलाक की याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी. (Courtesy: India today)

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  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति के तलाक की याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पत्नी पर अपमानजनक शब्द कहने को तलाक का आधार नहीं माना गया।
  • पति अक्ष घोष ने पत्नी के कथित शत्रुतापूर्ण व्यवहार और बिना अनुमति राजस्थान जाने के मामले में परिवारिक कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी।
  • कोर्ट ने सबूतों की कमी के कारण फैसले को बरकरार रखा और पति को एक महीने में पत्नी को स्त्रीधन लौटाने का निर्देश दिया।

‘पत्नी अगर पति को ‘काला या मोटा’ कहकर चिढ़ाती है तो इस वजह से उसे तलाक नहीं दिया जा सकता.’ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ये टिप्पणी तलाक के एक मामले पर की है, जिसमें पति ने अपनी पत्नी पर ऐसे आरोप लगाए थे. कोर्ट ने तलाक की याचिका ये कहकर खारिज कर दी कि आरोपों को साबित करने के लिए पति कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया. हाईकोर्ट से पहले ये मामला फैमिली कोर्ट में गया था. वहां भी ये अर्जी खारिज कर दी गई थी. 

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट में याचिका डालने वाले अक्ष घोष की शादी पूजा के साथ 2019 में हुई थी. घोष का आरोप है कि शादी के बाद पत्नी उनके परिवार के साथ दो-तीन महीने तक ही रही. इस दौरान उसने उनके साथ ‘शत्रुतापूर्ण व्यवहार’ किया. उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी. अक्सर वो अपने मायके चली जाती थी. घोष ने ये आरोप भी लगाया कि उनकी पत्नी बिना इजाजत लिए एक रिश्तेदार की शादी में राजस्थान चली गई और 25 दिनों बाद वापस आई.

इन सब आरोपों को लेकर अक्ष घोष ने फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए केस दायर किया. अगस्त 2024 में कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उनकी तलाक की अर्जी खारिज कर दी. उन्हें एक महीने के भीतर अपनी पत्नी को परिवार से मिले उपहार (स्त्रीधन) लौटाने का निर्देश भी दिया. घोष ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी. यहां जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की बेंच ने फैमिली कोर्ट के 2024 के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया. 

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कोर्ट ने क्या कहा?

सबूतों की जांच के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अक्ष घोष ये साबित नहीं कर पाए कि पत्नी ने उनके साथ ‘क्रूरता’ की और उन्हें छोड़कर चली गई. कोर्ट ने पति के उन आरोपों पर खासतौर से टिप्पणी की, जिसमें कहा गया था कि पत्नी उन्हें ‘मोटा और सांवले रंग’ का बताकर ताना मारा. बेंच ने कहा कि ये कोई मजबूत आधार नहीं है, जिससे तलाक की अर्जी मंजूर की जाए. 

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पत्नी ने लगाए आरोप

कोर्ट में महिला ने पति के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि पति का किसी और लड़की के साथ अवैध संबंध है. इसी वजह से वह उनके साथ नहीं रहना चाहता. पत्नी ने पति पर और भी कई आरोप लगाए. कहा कि पति का उनके साथ व्यवहार अच्छा नहीं है. जब वो प्रेग्नेंट थीं, तब उसने उनकी ठीक से देखभाल नहीं की. इलाज के लिए उनकी मां उन्हें साथ लेकर गई थीं लेकिन बार-बार कहने के बाद भी पति ने उन्हें वापस नहीं बुलाया. इसे लेकर महिला की मां ने थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी.

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