SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) और EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) को लेकर केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) पर सवाल उठ रहे हैं. विपक्ष लगातार ‘वोटचोरी’ और फर्जीवाड़े का आरोप लगा रहा है. लेकिन अब इस पूरे विवाद में एक नया ट्विस्ट आया है. NDA के अंदर से भी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर आवाजें उठने लगी हैं. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने SIR को लेकर चुनाव आयोग से सफाई मांगी है. बिहार के ये दोनों ही नेता केंद्र की मोदी सरकार में सहयोगी हैं.
SIR पर NDA सहयोगी भी मारने लगे 'कोहनी', चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा ने ECI से मांगी सफाई
SIR को लेकर विपक्ष के लगातार सवालों के बीच अब NDA के कुछ नेताओं ने भी चुनाव आयोग से पारदर्शिता और सफाई की मांग की है. चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और TDP नेता लावु श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए आयोग को उठ रहे सवालों का जवाब देना चाहिए.

राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों की ओर से लगाए गए आरोपों पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान ने कहा कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार को अपनी बात साफ और मजबूती से रखनी चाहिए, ताकि चुनावी प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बना रहे. वहीं NDA की एक और सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकमोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट शेयर कर कहा कि SIR से संबंधित विवाद पर जनता में काफी उलझन की स्थिति पैदा हो गई है. इसको एड्रेस करने की जरूरत है. कंफ्यूजन दूर करने में चुनाव आयोग की तरफ से हो रही देरी पर स्पष्टीकरण आना चाहिए.
सवालों की गूंज एनडीए के एक और साथी खेमे से आई है. TDP नेता लावु श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और जब भी उस पर सवाल उठें तो सही सफाई देनी जरूरी है. अगर पारदर्शिता बनाए रखी जाए तो संस्था के प्रति जनता का भरोसा और मजबूत होगा.
इसके अलावा जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक को भी विपक्ष के उठाए सवाल ‘जायज’ लग रहे हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पर जो सवाल उठाए गए हैं, उनका जवाब चुनाव आयोग को खुद देना चाहिए. क्योंकि उठाए गए सवाल जायज हैं.
क्या है मामला?दरअसल, बीते दिनों इंडियन एक्सप्रेस की एक ‘विस्फोटक’ रिपोर्ट ने दावा किया है कि ज्ञानेश कुमार के कई फैसलों पर चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने कई बार असहमति जताई थी. दोनों चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी. रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त को जमकर घेरा है. विपक्षी दलों का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार मनमाने तरीके से फैसले ले रहे हैं और वो बाकी आयुक्तों की बात नहीं सुन रहे हैं.
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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने 25 सितंबर को तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच आपसी तालमेल पर सवाल खड़े किए. ‘कटाक्ष’ करते हुए उन्होंने पूछा कि ‘क्या तीनों चुनाव आयुक्त आपस में बात भी करते हैं?’ उन्होंने एक्स पर ट्वीट कर लिखा,
2025 - 26 के दौरान करीब 50 अधिकारियों जिनमें CEO और Deputy Election Commissioners भी शामिल हैं उनका तबादला हुआ. लेकिन इन अधिकारियों की ACR यानी Annual Confidential Reports अभी तक अटकी हुई हैं. क्यों? क्योंकि नियम के मुताबिक इन ACR पर मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को एक पैनल के तौर पर मिलकर हस्ताक्षर करने होते हैं. लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है.
उन्होंने आगे कहा कि बताया जा रहा है कि कुछ प्रभावित अधिकारी अपनी रिपोर्ट क्लियर करवाने के लिए CEC और दोनों ECs से अलग-अलग कई बार व्यक्तिगत रूप से मिल चुके हैं, लेकिन तीनों साथ बैठकर एक यूनिट के तौर पर हस्ताक्षर नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए ACR अभी भी लंबित हैं. यहां तक कि उन अधिकारियों की भी जो काफी समय पहले नई पोस्टिंग पर जा चुके हैं.
खेड़ा ने कहा कि अगर तीनों चुनाव आयुक्त रोजमर्रा की जरूरी कागजी कार्रवाई पर भी एक साथ सहमति नहीं बना पा रहे हैं तो दुनिया के सबसे बड़े चुनाव को संचालित करने को लेकर भरोसा कैसे किया जाए?
हालांकि, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने SIR समेत आयोग के फैसलों पर तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति होने की बात कही है और आंतरिक मतभेद की रिपोर्टों को खारिज किया है.
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