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फेसबुक पर सबसे महत्वपूर्ण स्टेटस पोस्ट हुआ है, ज़रूर पढ़ें

पिछली बार भी जब इंटरनेट पर लिखा था तो दुनिया हिल गई थी.

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फोटो - thelallantop
कल एक फेसबुक पर स्टेटस पोस्ट हुआ. लगभग 150 शब्दों के इस फेसबुक पोस्ट पर 1 लाख 13 हज़ार लाइक और 6.5 हज़ार कमेंट हैं. मगर इस पोस्ट की कीमत इतनी है कि आने वाले कई सालों तक इसे दुनिया की तमाम किताबों और वेबसाइट्स में दर्ज रखा जाएगा. ये स्टेटस डॉक्टर स्टीफन हॉकिंग ने लिखा है. स्टीफन हॉकिंग आज की तारीख में दुनिया के सबसे मशहूर वैज्ञानिक हैं. वर्तमान समय के वैसे वैज्ञानिक जिन्हें हम सब जानते हैं. समय व्हील चेयर पर रहने वाला एक शख्स जिसकी देह में आंखों की पुतली के सिवा कोई हरकत नहीं होती मगर जिसका दिमाग अंतरिक्ष की सीमाओं के परे जा सकता है. ऐसी दूरियों तक, जहां पर पहुंचने की कल्पना करना बाकी दुनिया के लिए बड़ा मुश्किल है. स्टीफन हॉकिंग पर आगे बात करने से पहले उनका स्टेटस पढ़ते हैं- unnamed हॉकिंग 8 जनवरी को 75 साल के हो गए. तो इस मौके पर स्टीफन ने फेसबुक पर पोस्ट डाला. कहा कि मैं दुनिया के शानदार वक्त में हूं. मैं खुश हूं कि ब्लैक होल और यूनिवर्स की शुरूआत के बारे में मैंने भी कुछ कहा है. लेकिन अगर मेरा परिवार और मेरे दोस्त नहीं होते तो ये यूनिवर्स खाली होता मेरे लिए. तो जब मैं 75 का हो गया हूं, मैं सबको धन्यवाद करता हूं. जिन्होंने मुझे सपोर्ट किया. वैसे हम बता दें कि इससे पहले स्टीफन ने 2016 नवंबर में एक अनुमान दिया था कि दुनिया से मानव सभ्यता अगले हज़ार सालों में खत्म हो जाएगी. विज्ञान जगत में इस बात ने खलबली मचा दी थी. तो स्टीफन के पोस्ट सिर्फ धन्यवाद के लिए ही नहीं है. ये उन तमाम चीजों को निरूपित करता है, जिससे हमारी मानव-सभ्यता अभी चल रही है. स्टीफन का शरीर काम नहीं करता. 21 साल की उम्र में हॉकिंग को पता चला कि वो मोटर न्यूरॉन डिजीज़ है. इस बीमारी में शरीर धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है. डॉक्टर्स ने बता दिया कि वो हद से हद दो साल और जी पाओगे. पर इसके बाद हॉकिंग लड़ते रहे. देखते ही देखते जीवन के 75वें बसंत पर पहुंच गए.

और क्या किया स्टीफन ने अपने इन 75 सालों में कि दुनिया का बच्चा-बच्चा जानता है इनको?

हम सब ने बचपन में विज्ञान में बल (फोर्स) के बारे में पढ़ा है. एक समय तक ये सारे बल अलग-अलग गिने जाते रहे. मतलब दरवाजा खोलने का अलग, गाड़ी चलाने का अलग और काम करने का अलग. फिर एक दिन आइंस्टीन ने दुनिया को बताया कि ब्रह्मांड में दो ही चीज़ें हैं. पदार्थ और ऊर्जा. एक प्रकार की ऊर्जा को दूसरे प्रकार में बदला जा सकता है इसके बाद दुनिया के विज्ञान में ब्रह्मांड को देखने का तरीका बदल गया. ऐसा माना जा रहा था कि आइंस्टीन की इस बात के बाद नई चीज आनी मुश्किल है.
पर हॉकिंग ने आइंस्टीन के सिद्धांत को अगले बड़े स्तर तक पहुंचाया. ब्रह्मांड की उत्पत्ति और समय की शुरुआत कैसे हुई, इसे समझाया. हॉकिंग के अनुसार ब्रह्मांड की शुरुआत 1500 करोड़ साल पहले हुई थी. इसका अंत भी तय है. इसकी शुरुआत से पहले समय का कोई अस्तित्व नहीं था. हॉकिंग के इन नए सिद्धांतों के साथ विज्ञान के कई नियमों को नए सिरे से समझना आसान हो गया. बिग बैंग थ्योरी को समझाते हुए हॉकिंग ने बताया कि दुनिया की शुरुआत में सिर्फ दो चीज़ें थीं. एक मैटर और दूसरा ऐंटी मैटर. फिर एक विस्फोट हुआ जिसे बिग बैंग कहते हैं इसके बाद ऐंटी मैटर कम होता चल गया और मैटर बढ़ता गया. और इसी से ब्रह्मांड बना. हॉकिंग के सिद्धांतों पर ही इमैजिनरी टाइम का कॉन्सेप्ट आया. इसे बहुत ज़्यादा आसान करें तो ऐसे समझ सकते हैं कि हम गाड़ी में बैठकर जा रहे हैं तो हमें लगता है कि पेड़ पीछे जा रहे हैं. मगर असल में पेड़ अपनी जगह पर होते हैं हम चल रहे होते हैं.
मतलब जो समय पीछे निकल गया है वो कहीं तो होगा. जो नहीं आया है वो भी ब्रह्मांड के इस सफर के रास्ते में कहीं तो होगा. ठीक वैसे ही जैसे हाइवे पर पीछे कोई ढाबा छूट गया हो या कोई पेट्रोल पंप आगे आने वाला हो. हॉकिंग ने ब्लैक होल के बारे में कई सिद्धांत दिए हैं. आसान भाषा में ब्लैक होल किसी तारे के मरने से पैदा हुई वो चीज है जिसका गुरुत्वाकर्षण इतना ज्यादाहोता है कि रौशनी को भी खींच ले. कह सकते हैं कि अगर कोई आदमी ब्लैक होल में खड़े होकर टॉर्च की रौशनी सामने दीवार पर मारे तो रौशनी दीवार पर टकराने से पहले ही ज़मीन पर गिर पड़ेगी.

हिंदी सिनेमा के गीतकार जावेद अख्तर ने हॉकिंग की ही ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम पर आधारित एक नज़्म लिखी है. 'ये वक्त क्या है'. उसका एक हिस्सा आप भी पढ़िए. दुनिया को बड़ी आसानी से समझने का मौका मिलेगा.

ये वक़्त क्या है? ये क्या है आख़िर कि जो मुसलसल गुज़र रहा है ये जब न गुज़रा था तब कहां था? कहीं तो होगा गुज़र गया है तो अब कहां है? कहीं तो होगा? कहां से आया किधर गया है? ये कब से कब तक का सिलसिला है ये वक़्त क्या है? ... कभी कभी मैं ये सोचता हूं कि चलती गाड़ी से पेड़ देखो तो ऐसा लगता है दूसरी सम्त जा रहे हैं मगर हक़ीक़त में पेड़ अपनी जगह खड़े हैं तो क्या ये मुमकिन है सारी सदियां क़तार-अंदर-क़तार अपनी जगह खड़ी हों ये वक़्त साकित हो और हम ही गुज़र रहे हों इस एक लम्हे में सारे लम्हे तमाम सदियाँ छुपी हुई हों न कोई आइंदा न गुज़िश्ता जो हो चुका है जो हो रहा है जो होने वाला है हो रहा है मैं सोचता हूं कि क्या ये मुमकिन है? सच ये हो कि सफ़र में हम हैं गुज़रते हम हैं जिसे समझते हैं हम गुज़रता है वो थमा है गुज़रता है या थमा हुआ है? इकाई है या बटा हुआ है? है मुंजमिद या पिघल रहा है किसे ख़बर है? किसे पता है? ये वक़्त क्या है?

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