हॉकिंग 8 जनवरी को 75 साल के हो गए. तो इस मौके पर स्टीफन ने फेसबुक पर पोस्ट डाला. कहा कि मैं दुनिया के शानदार वक्त में हूं. मैं खुश हूं कि ब्लैक होल और यूनिवर्स की शुरूआत के बारे में मैंने भी कुछ कहा है. लेकिन अगर मेरा परिवार और मेरे दोस्त नहीं होते तो ये यूनिवर्स खाली होता मेरे लिए. तो जब मैं 75 का हो गया हूं, मैं सबको धन्यवाद करता हूं. जिन्होंने मुझे सपोर्ट किया. वैसे हम बता दें कि इससे पहले स्टीफन ने 2016 नवंबर में एक अनुमान दिया था कि दुनिया से मानव सभ्यता अगले हज़ार सालों में खत्म हो जाएगी. विज्ञान जगत में इस बात ने खलबली मचा दी थी. तो स्टीफन के पोस्ट सिर्फ धन्यवाद के लिए ही नहीं है. ये उन तमाम चीजों को निरूपित करता है, जिससे हमारी मानव-सभ्यता अभी चल रही है. स्टीफन का शरीर काम नहीं करता. 21 साल की उम्र में हॉकिंग को पता चला कि वो मोटर न्यूरॉन डिजीज़ है. इस बीमारी में शरीर धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है. डॉक्टर्स ने बता दिया कि वो हद से हद दो साल और जी पाओगे. पर इसके बाद हॉकिंग लड़ते रहे. देखते ही देखते जीवन के 75वें बसंत पर पहुंच गए.
और क्या किया स्टीफन ने अपने इन 75 सालों में कि दुनिया का बच्चा-बच्चा जानता है इनको?
हम सब ने बचपन में विज्ञान में बल (फोर्स) के बारे में पढ़ा है. एक समय तक ये सारे बल अलग-अलग गिने जाते रहे. मतलब दरवाजा खोलने का अलग, गाड़ी चलाने का अलग और काम करने का अलग. फिर एक दिन आइंस्टीन ने दुनिया को बताया कि ब्रह्मांड में दो ही चीज़ें हैं. पदार्थ और ऊर्जा. एक प्रकार की ऊर्जा को दूसरे प्रकार में बदला जा सकता है इसके बाद दुनिया के विज्ञान में ब्रह्मांड को देखने का तरीका बदल गया. ऐसा माना जा रहा था कि आइंस्टीन की इस बात के बाद नई चीज आनी मुश्किल है.पर हॉकिंग ने आइंस्टीन के सिद्धांत को अगले बड़े स्तर तक पहुंचाया. ब्रह्मांड की उत्पत्ति और समय की शुरुआत कैसे हुई, इसे समझाया. हॉकिंग के अनुसार ब्रह्मांड की शुरुआत 1500 करोड़ साल पहले हुई थी. इसका अंत भी तय है. इसकी शुरुआत से पहले समय का कोई अस्तित्व नहीं था. हॉकिंग के इन नए सिद्धांतों के साथ विज्ञान के कई नियमों को नए सिरे से समझना आसान हो गया. बिग बैंग थ्योरी को समझाते हुए हॉकिंग ने बताया कि दुनिया की शुरुआत में सिर्फ दो चीज़ें थीं. एक मैटर और दूसरा ऐंटी मैटर. फिर एक विस्फोट हुआ जिसे बिग बैंग कहते हैं इसके बाद ऐंटी मैटर कम होता चल गया और मैटर बढ़ता गया. और इसी से ब्रह्मांड बना. हॉकिंग के सिद्धांतों पर ही इमैजिनरी टाइम का कॉन्सेप्ट आया. इसे बहुत ज़्यादा आसान करें तो ऐसे समझ सकते हैं कि हम गाड़ी में बैठकर जा रहे हैं तो हमें लगता है कि पेड़ पीछे जा रहे हैं. मगर असल में पेड़ अपनी जगह पर होते हैं हम चल रहे होते हैं.
मतलब जो समय पीछे निकल गया है वो कहीं तो होगा. जो नहीं आया है वो भी ब्रह्मांड के इस सफर के रास्ते में कहीं तो होगा. ठीक वैसे ही जैसे हाइवे पर पीछे कोई ढाबा छूट गया हो या कोई पेट्रोल पंप आगे आने वाला हो. हॉकिंग ने ब्लैक होल के बारे में कई सिद्धांत दिए हैं. आसान भाषा में ब्लैक होल किसी तारे के मरने से पैदा हुई वो चीज है जिसका गुरुत्वाकर्षण इतना ज्यादाहोता है कि रौशनी को भी खींच ले. कह सकते हैं कि अगर कोई आदमी ब्लैक होल में खड़े होकर टॉर्च की रौशनी सामने दीवार पर मारे तो रौशनी दीवार पर टकराने से पहले ही ज़मीन पर गिर पड़ेगी.
हिंदी सिनेमा के गीतकार जावेद अख्तर ने हॉकिंग की ही ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम पर आधारित एक नज़्म लिखी है. 'ये वक्त क्या है'. उसका एक हिस्सा आप भी पढ़िए. दुनिया को बड़ी आसानी से समझने का मौका मिलेगा.














