दरअसल संजय और अदिति दोनों ही विदेश से भारत लौटे हैं. देश प्रेम था या कोई और वजह, पूछने पर इंजीनियरिंग करने अमेरिका जाने वाले संजय बोले कि स्वदेश देख ली और विदेश से वापस आ गया. अदिति बोलीं कि 2009 में रिशेसन के बाद वो भारत लौट आईं. उन पर स्वदेश का असर नहीं हुआ था. मजबूरी का नाम महात्मा गांधी वाला काम हो गया था.

लल्लनटॉप शो में पहुंचे स्टैंडअप कॉमेडियन संजय और अदिति.
गपशप करते हुए संजय एक और मजेदार बात बोल गए- मेहनत करने वाले की तकदीर में होता है, मेहनत करना और रिटायर हो जाना. समझे गुरु. ये थ्री इडियट टाइप था.
कॉमेडी में एंट्री का मोटिवेशन कहां से मिला, पूछने पर अदिति ने बताया कि वो बचपन से ही नौटंकी की शौकीन थीं. फिर धीरे धीरे ये नौटंकी का शौक स्टैंडअप कॉमेडी में बदल गया. काम की डिमांड पर बोलीं कि दुनियाभर के लोग जनना चाहते हैं कि भारत में क्या हो रहा है. सो काम भी खूब मिल रहा है.

जोक्स पर खूब मुस्कुराया लखनऊ.
नोटबंदी से बड़ा घोटाला है क्या?
बात आगे बढ़ी तो अदिति बोलीं कि डव साबुन से बड़ा कोई और स्कैम नहीं है. संजय राजौरा का इस पर तपाक से सवाल आया. नोटबंदी आने के बाद भी तुम ये कहोगी कि डव से बड़ा कोई घोटाला नहीं है. बस जनता भी लोट गई. दे ताली. दे ताली. संजय राजौरा से पूछा गया कि आपने 5 साल में ग्रैजुएशन किया था तो बोले- ऐसा नहीं है, मैं बचपन में बहुत तेज था पढ़ने में. टॉपर था. फिर 11वीं क्लास में मैं कम्युनिस्ट हो गया. कई चीजों से मोहभंग हुआ. उनमें से एक चीज पढ़ाई भी थी. फिर 5 साल में ग्रैजुएशन पूरा हुआ. फिर बोले- मैं उत्तर प्रदेश का जाट हूं. पारंपरिक रूप से ही हमारे यहां के लड़कों में लड़कियों के साथ पेश आने की तमीज़ नहीं होती. अदिति ने एक और मजेदार बात बोली कि पहले सिर्फ सेक्स की ही बात होती थी.सेक्स पर खूब ताली बजती हैं. मगर जब से उत्तर प्रदेश में एंटी रोमियो स्क्वाड बना है, तब से सेक्स को गहरी चोट लगी है. फिर शुरू हुई कॉमेडी की मालगाड़ी. लखनऊ की हस हस के तर हो गई. कई तगड़े जोक्स मारे संजय और अदिति ने. और पेट पकड़े लोगों के लोटते-पोटते ये सेशन खत्म हो गया.
देखिए लल्लनटॉप शो में अदिति और संजय की पूरी बातचीत:












