नोरिसिगे कनाई के इस ट्वीट के बाद हंगामा मच गया. अगले ही दिन नोरिसिगे को इस बात का एहसास हुआ कि उसने जो कहा है, उससे पूरी दुनिया में हंगामा मचा हुआ है. इसके बाद 9 तारीख को उसने अपने ट्वीट के लिए माफी मांग ली और कहा कि उससे नापने में गलती हुई है. उसकी लंबाई में 9 सेन्टीमीटर नहीं, बस दो सेन्टीमीटर की बढ़ोतरी हुई है.
लेकिन सवाल तो फिर भी है कि क्या अंतरिक्ष में जाने पर इंसान की लंबाई बढ़ जाती है?इसका जवाब है हां. अंतरिक्ष में रहने के दौरान इंसान की लंबाई में बढ़ोतरी होती है. नासा ( National Aeronautics and Space Administration)ने अपनी स्टडी के दौरान ये पाया है कि जो भी अंतरिक्षयात्री अंतरिक्ष में जाते हैं, उनकी लंबाई जितनी होती है, उसकी तीन फीसदी लंबाई बढ़ जाती है. उदाहरण के लिए अगर कोई इंसान 180 सेंटीमीटर लंबा है, तो अंतरिक्ष में रहने के दौरान उसकी लंबाई तकरीबन 5 सेंटीमीटर बढ़ जाती है. यानि 180 सेंटीमीटर का इंसान अंतरिक्ष में 185 सेंटीमीटर का हो सकता है.

कनाई ने ये फोटो अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट की हैं.
अब वजह भी बता देते हैं, जो नासा के वैज्ञानिकों ने बताई है
इन्सान जब धरती पर रहता है, तो वह गुरुत्वाकर्षण के दायरे में रहता है. गुरुत्वाकर्षण वो ताकत है, जिससे धरती किसी चीज को अपनी ओर खींचती है. कोई भी चीज अगर आसमान की तरफ उछाली जाए, तो वो धरती पर वापस आ जाती है, इसकी वजह वही गुरुत्वाकर्षण ही है. अंतरिक्ष के पास ये ताकत नहीं होती है. इन्सान जब धरती पर रहता है, तो गुरुत्वाकर्षण की वजह से उसकी रीढ़ की हड्डी की लंबाई एक वक्त के बाद नहीं बढ़ती है. जैसे ही वह अंतरिक्ष में जाता है, गुरुत्वाकर्षण खत्म हो जाता है और उसकी रीढ़ की लंबाई में बढ़ोतरी हो जाती है. ये लंबाई 3 से 5 सेंटीमीटर तक की होती है.
हमारी रीढ़ की हड्डी स्प्रिंग जैसी होती है. गुरुत्वाकर्षण की वजह से नीचे की ओर दबी होती है. जैसे ही अंतरिक्ष में जाते हैं, स्प्रिंग फैल जाती है और इन्सान की लंबाई बढ़ जाती है.
हालांकि जब इन्सान धरती पर लौट आता है, तो कुछ ही वक्त के बाद गुरुत्वाकर्षण की वजह से उसकी लंबाई कम हो जाती है और वो अपनी पुरानी स्थिति में आ जाता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक रीढ़ की हड्डी में कई जोड़ होते हैं. गुरुत्वाकर्षण की वजह से ये एक-दूसरे से काफी करीब से जुड़े होते हैं. जब गुरुत्वाकर्षण नहीं होता है, तो रीढ़ की लंबाई के जोड़ों में थोड़ा सा गैप हो जाता है, जिससे लंबाई बढ़ जाती है. इसके अलावा खून का संचार भी गुरुत्वाकर्षण की कमी की वजह से ऊपर की ओर ही होता है.
पता कैसे चला, ये भी तो जान लो

दरअसल अंतरिक्षयात्री जब अंतरिक्ष में जाते थे, तो कुछ दिनों के बाद उन्हें लगता था कि उनकी लंबाई बढ़ गई है. वापस आते थे, तो उनकी लंबाई बढ़ी होती थी और कुछ दिनों के बाद सब पहले जैसा हो जाता था. वैज्ञानिकों ने ये निष्कर्ष तो निकाल लिया कि लंबाई बढ़ती है. लेकिन ये कैसे बढ़ती है, इसकी जांच की जानी थी. इसके लिए नासा के वैज्ञानिकों ने नया तरीका निकाला. उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में गए अंतरिक्ष यात्रियों को अल्ट्रासाउंड मशीनें दे दीं. इन अल्ट्रासाउंड मशीनों के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों ने एक दूसरे की रीढ़ की हड्डी को स्कैन किया, जिसकी जांच रिपोर्ट तुरंत-तुरंत धरती पर बैठे शोधकर्ताओं को भेजी जा रही थी. इसके लिए 30 दिन, 90 दिन और 150 दिन का अंतराल तय किया गया और इस दौरान होने वाली लंबाई की बढ़ोतरी को नापा गया. अंतिम निष्कर्ष के तौर पर नासा के वैज्ञानिकों ने पाया कि इन्सान अपनी लंबाई का तीन फीसदी तक अंतरिक्ष में रहने के दौरान लंबा हो सकता है.
पहले भी अंतरिक्षयात्रियों ने किए हैं दावे

स्कॉट केली (दाएं) ने भी दावा किया था कि उनकी लंबाई बढ़ गई है.
नोरिसिगे कनाई पहले ऐसे शख्स नहीं हैं, जिन्होंने अपनी लंबाई के बढ़ने के बारे में दावा किया था. उनसे पहले मार्च 2016 में नासा के वैज्ञानिक स्कॉट केली लगभग एक साल अंतरिक्ष में बिताने के बाद धरती पर वापस लौटे थे. आने के बाद उन्होंने भी कहा था कि उनकी लंबाई पांच सेंटीमीटर बढ़ गई है. हालांकि बाद में उनकी लंबाई पहले वाली स्थिति में आ गई थी.
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