चरखा लिए गांधी का फोटो सहज लगता था. उसको वैसे ही रहने देना चाहिए था. किसी ने बड़े उत्साह कुछ किया होगा लेकिन गांधी तो रोज चरखे पर काम करते थे. इसलिए ये उनका सहज चित्र था. हर कोई चरखा थोड़ी चला सकता है देश में. गांधी को किनारे न करें, उनको प्रधानता दें. बाकी नेता चरखा लेकर बैठें तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है. आजकल कोई चरखा नहीं चलाता है. ये उस वक्त की परिस्थितियों की तस्वीर थी.बात तो कांटे की कहे हैं गुरू जी. लेकिन सरकार से पंगा लेने के चक्कर में लिभड़ न जाना. पुराने पाप खोद निकालते हैं ट्रोलर लोग. संभाल के हां.
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