प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राजस्थान के चितौड़गढ़ में अपनी चुनावी रैली में श्रीलंका में हुए आतंकी हमलों का जिक्र किया -
"आज श्रीलंका में जो कुछ भी हुआ है, श्रीलंका वासियों के प्रति भारत पूरी मजबूती के साथ खड़ा है. ऐसी संकट की घड़ी में भारत श्रीलंका की जो भी मदद कर सकता है हर मदद के लिए तैयार है. इस संकट की घड़ी में, इस पवित्र अवसर पर भगवान में लीन अपने स्वजन खोए हैं उनके प्रति उनके परिवार के प्रति मैं अपनी संवेदनाएं प्रकट करता हूं."इसके बाद मोदी ने जो किया वो शायद अब तक श्रीलंका के नेताओं ने भी नहीं किया. वो था, इन धमाकों का नाम लेकर वोट मांगना. अपनी रैली में मोदी बोले -
"भाइयों-बहनों आप सब जब वोट देने जाएंगे. कमल के निशान पर बटन दबाएंगे तो मन में ये भी तय करिए कि आप जब बटन दबा रहे हैं आतंकवाद को खत्म करने के लिए. आपकी एक उंगली में ताकत है भाइयों बहनों, आप कमल के निशान पर बटन दबाओगे. आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की मुझे ताकत मिलेगी."
पीएम के इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं. लोग पूछ रहे हैं कि श्रीलंका में हुए आतंकी हमले के बाद इस तरह वोट मांगना कहां तक ठीक है. सवाल किए जा रहे हैं कि क्या पीएम मोदी भारत में आतंकवाद रोकने में सफल रहे हैं? हाल ही में पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ के करीब 40 जवान शहीद हो गए थे. इससे पहले उड़ी सैन्य कैंप पर हुए आतंकी हमले में 20 जवान शहीद हुए थे.

पुलवामा में कहां सुरक्षा चूक रही या इसे रोकने के लिए आगे क्या किया जाएगा, ऐसे प्रश्नों का कभी जवाब नहीं दिया गया. (फाइल फोटो)
हालांकि सरकार ने पुलवामा के बाद पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक करवाई थी और कश्मीर में कुछ एनकाउंटर हुए थे. लेकिन पुलवामा में कहां सुरक्षा चूक रही या इसे रोकने के लिए आगे क्या किया जाएगा, ऐसे प्रश्नों का कभी जवाब नहीं दिया गया. "पाकिस्तान को सबक सिखाने" को लेकर भी पीएम मोदी ने अभिनंदन की वापसी के बाद कुछ किया हो, याद नहीं आता. जब हम अपने देश में आतंकी हमलों को लेकर फूल प्रूफ नहीं हो पाए हैं, ऐसे में इस मुल्क का प्रधानमंत्री किसी दूसरे देश में हुए आतंकी हमले के नाम पर वोट मांगे ये शॉक भी करता है और पॉलिटिक्स की वजह से हमें दुखी भी करता है.
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