दुनिया भर की अर्थव्यवस्था इन दिनों खराब दौर से गुजर रही है. सिर्फ GDP के आंकड़े नहीं, आए दिन मल्टीनेशनल कंपनी में होने वाली छटनी की खबरें भी इसकी बानगी हैं. 19 जनवरी की सुबह, आंखें खोलने के साथ लोगों के सामने सत्या नडेला का वो लेटर था जिसमें उन्होंने CEO की हैसियत से बताया है कि माइक्रोसॉफ्ट में 10 हजार लोगों की छटनी की जाएगी. लेकिन ये किसी एक कंपनी का हाल नहीं है. ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन, मार्क ज़करबर्ग की मेटा जिसका नाम पहले फेसबुक था, एलन मस्क के ट्विटर, ये वो नामी गिरानी कंपनियां हैं जिनके नाम लोगों को मुंह जबानी याद रहते हैं. और यही वो कंपनियां है जहां हजारों की संख्या में कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा है.
Amazon ने हजारों लोगों को नौकरी से निकालते हुए कितना पैसा दिया?
ट्विटर ने पराग अग्रवाल को 300 करोड़ से ज्यादा दिए थे.


जब कोई कर्मचारी अपनी कंपनी से रिज़ाइन करता है तो कंपनी और कर्मचारी के बीच एक आपसी समझ होती है. आपसी सहमती से कर्मचारी, कंपनी से अलग होता है. लेकिन जब किसी कर्मचारी को निकाला जाता है तो ये एकतरफा फैसला होता है. और इसकी ऐवज में कंपनी जिस कर्मचारी को निकालती है उसे सेवरेंस पे देता होता है. हिंदी में समझें तो बर्खास्तगी के बदले पैसे दिए जाते हैं. हर कंपनी अपनी-अपनी पॉलिसी के हिसाब के अलग-अलग सेवरेंस पे देते हैं. जैसे जब ट्विटर ने पराग अग्रवाल को CEO के पद से हटाया था तो कौन कितना दे रहा है, इस रिपोर्ट में देखिए.
माइक्रोसॉफ्टCEO सत्या नडेला ने एक लेटर के साथ ये घोषणा की. नडेला ने अपने लेटर में कहा कि सभी को अपना काम और बेहतर करने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि करीब 5 प्रतिशत कर्मचारियों की छटनी की जा रही है. ये छटनी एक बार में नहीं की जाएगी. जब भी किसी को टर्मिनेट किया जाएगा, उसे दो महीने पहले नोटिस दिया जाएगा. साथ ही उसे कुछ और चीज़ें भी उपलब्ध कराई जाएंगी.
-6 महीने की तन्ख्वाह.
इसमें ये क्लियर नहीं किया गया है कि पूरी तन्ख्वाह मिलेगी या उसका कुछ हिस्सा.
- 6 महीने तक हेल्थ इन्शॉरेंस कवर दिया जाएगा.
- नौकरी बदलने में मदद की जाएगी.
9 नवंबर, 2022 को जकरबर्ग ने भी लेटर लिखा और एक झटके में 11 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया. ये संख्या कंपनी के 13 प्रतिशत कर्मचारियों की थी. जकरबर्ग ने अपने कर्मचारियों को निकाला उन्हें क्या-क्या दिया?
- 6 महीने की बेसिक पे और कंपनी में जितने साल काम किया उतने सालों के अतिरिक्त दो हफ्ते का बेसिक पे.
- जितनी छुट्टिया बचीं है उनके पूरे पैसे.
- 6 महीने तक परिवार सहित हेल्थ केयर.
- अगर कोई वीज़ा पर अमेरिका आया है और वापस जाना चाहता है तो उसके लिए मदद की जाएगी.
एमेज़ॉन ने पहले ही 18,000 हजार कर्मचारियों को निकालने का ऐलान कर दिया है. अब ये प्रकिया शुरू भी हो गई है. भारत में एमेज़ॉन के 18 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं. इनमें से एक हजार कर्मचारियों की छटनी का ऐलान कर दिया गया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक एमेज़ॉन ये सहूलियत दे रहा है.
- 4 महीने की तन्ख्वाह.
- 6 महीने का इन्श्योरेंस.
ये सभी कंपनियां आखिर में ये भी कहती हैं कि ये बेनिफिट्स अमेरिका के लिए लागू हैं. अलग-अलग देश में वहां के नियम कानून के हिसाब से चीज़ें बदल भी सकती हैं.
लेकिन यहां कई और सवाल भी हैं. जिनके सवाल ये अच्छे से दिखने वाले सेवरेंस पे में नहीं मिलते हैं. सबसे पहला तो यही कि क्या सबको ये सारी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं. या ये सिर्फ कागजी हवाबाजी है. क्योंकि ट्विटर ने जब अपने कर्मचारियों को निकाला था तब ऐसी खबरें सामने आई थीं कि सेवरेंस पे नहीं मिल रहा है.
दूसरी बात जिस पर ध्यान नहीं जाता है. कंपनी के बड़े ओहदों पर बैठे लोगों को हटाया जाता है तो उसकी ऐवज में उन्होंने करोड़ों मिलते हैं. लेकिन कम सैलरी में काम करने वालों के लिए दो या चार महीने का सेवरेंस पे कितने दिन काम आएगा. ट्विटर को खरीदने के बाद एलन मस्क ने बड़े टॉप एक्सीक्यूटिव्स को निकाला. बदले में उन्हें लगभग एक हजार करोड़ मिल रहे हैं. ये इतना पैसा कि चारों मिलकर एक नई कंपनी शुरू कर सकते हैं. लेकिन उसी कंपनी में छोटे पद पर काम करने वालों को जब निकाला गया होगा तो एवज में उन्हें कुछ लाख रुपये मिले होंगे. और सामने बेरोजगारी का एक ठप्पा भी रखा होगा. तो क्या दोनों तरह के कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने पर समान आंकलन किया जाना चाहिए?

















