राजस्थान के धौलपुर में एक 11 साल की बच्ची को कोई स्कूल एडमिशन नहीं दे रहा. प्रिंसिपल लोग बताते हैं कि ये लड़की इतनी 'बदसूरत' है, कि बच्चे इसे देखकर डर जाते हैं. 'आज तक' चैनल पर खबर चलने और जिला शिक्षा अधिकारी के इंट्रेस्ट दिखाने के बाद एडमिशन तो हो गया. लेकिन बच्ची आगे कौन कौन से संकट का सामना करेगी, ये अपनी सोसाइटी की बनावट देखकर हम समझ सकते हैं.
आठ साल पहले का हादसा
धौलपुर जिले की सीताराम कॉलोनी में रहते हैं वीरेंद्र कुशवाहा. उनकी 11 साल की बच्ची है. नाम है प्रिया. आठ साल पहले बड़े भारी हादसे से गुजरी. 24 दिसंबर सन 2007 की बात है. तब वो बहुत छोटी थी. इस दिन सुबह उसके पापा काम पर गए थे. मां नहाने और बड़ी बहन सो रही थी. और ये बच्ची अंगारों से भरे अलाव में मुंह के बल गिर गई. चेहरा और उंगलियां बुरी तरह झुलस गए.

वीरेंद्र प्राइवेट बस के कंडक्टर हैं. अब कमाई का अंदाजा लगा लो. लोगों से कर्ज लेकर धौलपुर, जयपुर, आगरा में इलाज कराया. लेकिन चेहरा और हाथ ठीक नहीं हुए. इतना पैसा है नहीं कि प्लास्टिक सर्जरी करा सकें.
एक सत्र बाद ही खड़ी हो गई पढ़ाई की समस्या
पिछले साल वह स्कूल जाने लगी थी. कुछ दिन गई. दिमाग बहुत तेज है. हिंदी, गणित, अंग्रेजी की एकदम शुरुआती पढ़ाई उसे अच्छे से आ गई है. लेकिन आगे अब एडमिशन देने से इंकार कर दिया स्कूल वालों ने. चैनल पर खबर चली तो जिला शिक्षा अधिकारी मुकेश शर्मा पहुंचे उस बच्ची के घर. और दोनों बहनों को साथ लिया. सनातन धर्म शिक्षा सदन में एडमिशन कराया. पढ़ाई होगी बिना फीस के.