इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा है कि अगर किसी महिला को पति की पूर्व शादी के बारे में जानकारी न हो और उसकी शादी अमान्य करार कर दे दी जाए तब भी वो भत्ते (Allowance) की हकदार है. कोर्ट ने साफ किया कि पति अपनी गलतियों की आड़ में पत्नी को भत्ता देने से बच नहीं सकता है. इस मामले में अपनी दूसरी शादी से पहले पति तलाकशुदा नहीं था और ये बात उसने दूसरी पत्नी से छुपाई थी जिस वजह से उनकी शादी कानूनी तौर पर अमान्य करार दी गई. अब पति दूसरी पत्नी को गुजारा भत्ता देना नहीं चाहता.
शादी लीगल नहीं, तब भी पति देगा गुजारा भत्ता, हाईकोर्ट ने सारे वहम दूर कर दिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अमान्य करार दी गई शादी में महिलाओं को मिलने वाले भत्ते को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ कहा कि अगर किसी महिला को पति की पहली शादी की जानकारी नहीं है और उसकी शादी अवैध है, तब भी पति को भत्ता देना होगा.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस गरिमा प्रसाद की सिंगल बेंच इस केस की सुनवाई कर रही थी. अदालत ने पति की याचिका ख़ारिज कर दी. शख्स ने फैमिली कोर्ट के आदेश को चैलेंज किया था जिसमें कहा गया था कि महिला को भत्ता मिलना चाहिए.
पूरी कहानीरिपोर्ट के मुताबिक, पति का कहना है कि महिला के साथ उसकी शादी कानून की नज़र में वैध नहीं है. उसने बताया कि उसकी पहली शादी 2008 में हुई थी और तलाक 2017 में पूरा हुआ. इसी बीच शख्स ने दूसरी शादी कर ली. दूसरी शादी साल 2016 में हुई, इसलिए पति का दावा है कि उसकी दूसरी शादी लीगल नहीं है. और महिला को मेंटेनन्स देने के दायरे से बाहर है.
फैमिली कोर्ट ने माना कि दोनों पक्षों की शादी हिन्दू परंपरा के हिसाब से हुई है. पति ने आरोप लगाया था कि उसकी दूसरी शादी बन्दूक की नोक पर हुई है. लेकिन कोर्ट ने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया. अदालत में सामने आया कि पति ने महिला से अपनी पहली शादी की बात छुपाई थी. फैमिली कोर्ट ने ये भी माना कि भले ही ये शादी नियमों के मुताबिक, वैध नहीं है. फिर भी महिला भत्ते की हक़दार है. हाईकोर्ट ने भी फैमिली कोर्ट के फैसले को सपोर्ट किया.
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महिला को कितना भत्ता मिलेगा?रिपोर्ट के मुताबिक, महिला का दावा है कि पति एक सरकारी कर्मचारी है और 50 हज़ार रुपये महीना कमाता है. अदालत ने पाया कि पति हर महीने 35 हज़ार रुपये कमाता है. शख्स रेवेन्यू डिपार्टमेंट में लेखपाल है. फैमिली कोर्ट ने महिला के लिए 6000 रुपये प्रति महीना भत्ता तय किया था.
लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाया कि चूंकि पति एक परमानेंट सरकारी कर्मचारी है इसलिए 6000 रुपये प्रति महीना भत्ता महिला के लिए काफी कम है. कोर्ट ने महिला के लिए 12 हज़ार रुपये प्रति माह भत्ता तय किया है.
वीडियो: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने Forensic Lab की रिपोर्ट्स पर क्या कहा?













