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Johnson & Johnson को लगा तगड़ा फटका, बेबी पाउडर से कैंसर विवाद में चुकाएगी ₹52 हजार करोड़!

जॉनसन एंड जॉनसन के प्रोडक्ट इस्तेमाल करने की वजह से ओवेरियन कैंसर के दावों से जुड़े हजारों मुकदमे अमेरिका की कोर्ट में चल रहे हैं. अब कंपनी कैंसर के दावों से जुड़े ऐसे मुकदमों को खत्म करने के लिए 5.5 अरब डॉलर मुआवजा देने के लिए तैयार हो गई है.

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कंपनी ने साल 2020 में अमेरिका में टैल्क-आधारित जॉनसन बेबी पाउडर की बिक्री बंद कर दी थी (फोटो क्रेडिट: India Today)

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  • जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने ओवेरियन कैंसर से जुड़े 76,000 मुकदमों के निपटारे के लिए 5.5 अरब डॉलर का समझौता करने पर सहमति जताई है, जो लंबित कानूनी लड़ाई का एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
  • इस समझौते के पीछे वर्षों से चल रही मुकदमेबाजी और आरोप हैं कि कंपनी के टैल्क-आधारित उत्पादों के उपयोग से महिलाओं में ओवेरियन कैंसर हुआ, हालांकि कंपनी ने सुरक्षा दावों को निरस्त किया है।
  • समझौते के लागू होने पर कंपनी से जुड़े अधिकांश मुकदमे खत्म हो जाएंगे, बशर्ते 95% से अधिक मामले दावेदार इसे मान लें, जिससे कंपनी को वित्तीय और कानूनी बोझ में राहत मिलेगी।

जॉनसन एंड जॉनसन (Johnson & Johnson) कंपनी को तगड़ा झटका लगा है. कंपनी ने अपने बेबी पाउडर और दूसरे टैल्क-आधारित उत्पादों से ओवेरियन कैंसर (ovarian cancer) होने के दावों से जुड़े मामले में 5.5 अरब डॉलर (करीब 52 हजार 675 करोड़) देने पर सहमति जताई है. बता दें कि इस कंपनी के प्रोडक्ट इस्तेमाल करने की वजह से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने के दावे से कई मुकदमे कोर्ट में चल रहे थे. 

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इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट में समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से यह जानकारी दी गई है. इसे बिजनेस की दुनिया में किसी प्रोडक्ट को लेकर चलने वाली सबसे लंबी कानूनी लड़ाई माना जा रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक इस मुआवजे को चुकाने के बाद कंपनी के खिलाफ अमेरिका में दायर लगभग 76,000 केस खत्म हो जाएंगे. हालांकि, यह समझौता तभी लागू होगा जब कम से कम 95% दावेदार इस समझौते पर सहमत होंगे. यह समझौता एक दशक से ज्यादा समय तक चले कानूनी विवाद में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है.

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जॉनसन एंड जॉनसन अब समझौता क्यों कर रही है?

जॉनसन एंड जॉनसन ने लगातार यह दावा किया है कि उसके टैल्क-बेस्ड प्रोडक्ट्स सुरक्षित हैं और उनमें एस्बेस्टस नहीं होता है. कंपनी ने बार-बार इस बात से इनकार किया है कि वे ovarian cancer का कारण बनते हैं. 

कंपनी का कहना है कि वह इसलिए समझौता नहीं कर रही है क्योंकि उसे लगता है कि उसके दावों में कोई दम है, बल्कि इसलिए कर रही है क्योंकि वह सालों से चल रहे मुकदमेबाजी से छुटकारा पाना चाहती है. इन मुकदमों में कंपनी का काफी पैसा खर्च हो रहा है.

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कंपनी पर क्या आरोप थे?

इन सभी मुकदमों में आरोप लगाया गया था कि जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी पाउडर और अन्य टैल्क-आधारित उत्पादों का सालों तक इस्तेमाल करने के बाद महिलाओं में ovarian cancer विकसित हो गया. कई याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि टैल्क में एस्बेस्टस मौजूद था, जिसकी वजह से कैंसर हो सकता है.

जॉनसन एंड जॉनसन ने लगातार दोनों आरोपों को खारिज किया है. कंपनी का दावा है कि दशकों के वैज्ञानिक प्रमाण इस बात की गवाही देते हैं उसके उत्पाद सुरक्षित हैं. कंपनी ने साल 2020 में अमेरिका में टैल्क-आधारित जॉनसन बेबी पाउडर की बिक्री बंद कर दी थी . बाद में इसकी जगह पर कॉर्न स्टार्च-आधारित पाउडर का इस्तेमाल शुरू कर दिया था.

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