जयपुर-मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस में फायरिंग (Mumbai Train Firing) के वक्त मौजूद ट्रेन अटेंडेट का बयान सामने आया है. घटना के वक्त अटेंडेंट कृष्ण कुमार शुक्ला B5 और B6 कोच के बीच में सो रहे थे. पहली गोली चलने की आवाज सुनी तो नींद खुली. उठकर B5 कोच की तरफ बढ़े और देखा कि RPF जवान चेतन सिंह हाथ में राइफल लिए खड़ा है. बगल में एक दूसरा RPF कर्मी खून से लथपथ पड़ा था. कृष्ण कुमार ने बताया कि ये मंजर देखकर उन्हें आतंकवादी कसाब की याद आ गई.
"कसाब जैसे घुसा..."- ट्रेन हत्याकांड के चश्मदीद ने RPF कॉन्सटेबल के बारे में क्या-क्या बताया?
घटना के वक्त अटेंडेंट कृष्ण कुमार शुक्ला B5 और B6 कोच के बीच में सो रहे थे.


इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में अटेंडेंट कृष्ण कुमार शुक्ला ने बताया कि वो मृतक अब्दुल कादर को जानते थे. क्योंकि अब्दुल अक्सर उसी ट्रेन से यात्रा करते थे. फायरिंग से एक दिन पहले शाम को अब्दुल ने अटेंडेंट शुक्ला से ही अपने और आसपास के बाकी यात्रियों के लिए चाय मंगाई थी. कृष्ण कुमार शुक्ला ने बताया कि तबीयत ठीक ना होने के चलते उस रात वो जल्दी सोने चले गए.
अगली सुबह यानि 31 जुलाई को जोरदार आवाज सुनकर उनकी नींद खुली. अटेंडेंट ने बताया कि उन्हें पहले लगा कि वो शोर, शॉर्ट सर्किट का होगा. वो उठकर B5 कोच में गए तो हाथ में राइफल लिए चेतन सिंह को देखा. वो B4 की तरफ जा रहा था. शुक्ला बताते है कि वो B5 के दरवाजे के पास खड़े थे और अपने कोच पर नजर रख रहे थे. कुछ देर बाद उन्होंने देखा कि आरोपी चेतन लौटकर ASI मीणा के शव के पास आया और पांच मिनट तक वहीं खड़ा रहा.
अटेंडेंट ने बताया कि आरोपी चेतन दोबारा कोच B4 की तरफ गया. इसी दौरान उसने कथित तौर पर पहले अब्दुल कादिर को, फिर पेंट्री कोच में मोइनुद्दीन को और फिर S6 में असगर अब्बास शेख को गोली मारी. शुक्ला ने बताया उन्होंने फोन कर दो RPF कर्मियों को मामले की सूचना दी. वो बताते हैं कि वो अपनी जगह से हिलने में भी डर रहे थे. शुक्ला ने बताया कि वो 12 साल से भारतीय रेलवे के साथ काम कर रहे हैं लेकिन इस तरह की घटना के बारे में ना कभी सुना ना ऐसा कुछ देखा.
ASI टीकाराम मीणा के अलावा तीन और मृतकों के नाम सैयद सैफुल्लाह, अब्दुल कादिर और असगर अब्बास शेख हैं. अब ये जांच का विषय है कि टीकाराम के अलावा बाकी सभी मृतकों का मुस्लिम होना महज एक संयोग है या ये ‘हेट क्राइम’ में किया गया हत्याकांड.
इधर, 1 अगस्त को आरोपी चेतन को मुंबई के बोरीवली की एक अदालत में पेश किया गया. इस दौरान पुलिस ने आरोपी की 14 दिन की कस्टडी मांगी. हालांकि, अदालत ने पुलिस को आरोपी की 7 दिन की हिरासत ही दी. खबर है कि वो पुलिस जांच में सहयोग नहीं कर रहा है. जब उससे घटना को लेकर सवाल किए गए तो उसने कुछ और ही जवाब दिए. हिरासत में नारे भी लगाए.
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