पाकिस्तान की संसद ने ‘इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (रिव्यू एंड री-कन्सीडरेशन) ऑर्डिनेंस 2020’ पास कर कुलभूषण जाधव को ये राहत दी है. आजतक/इंडिया टुडे के मुताबिक इससे पहले जून में पाकिस्तान की संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली ने कुलभूषण जाधव को उच्च अदालतों में अपील करने की मंजूरी देने वाले बिल को अपनी स्वीकृति दे दी थी. बिल के मुताबिक, पाकिस्तान की जेलों में सजायाफ्ता विदेशी कैदी ऊपरी अदालतों में अपील कर सकेंगे.

पाकिस्तान की संसद में पारित हुए बिल की तस्वीर.
बता दें कि सैन्य अदालत की ओर से मौत की सजा पाए कुलभूषण जाधव को पहले अपील करने का अधिकार नहीं था. भारत सरकार के प्रयासों के बाद इस पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान को लताड़ लगाई थी.
2019 में मिली थी पहली बड़ी राहत
कुलभूषण जाधव मार्च, 2016 से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं. नौसेना में अफसर रहे जाधव पर पाकिस्तान ने जासूसी और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था. वहां के मिलिट्री कोर्ट ने अप्रैल 2017 में जासूसी के आरोप में कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाई थी.लेकिन नीदरलैंड के हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने जुलाई 2019 जाधव की फांसी पर रोक लगा दी थी. भारत की तरफ से मशहूर वकील हरीश साल्वे ने ICJ में कुलभूषण जाधव का केस लड़ा था. उन्होंने ये केस लड़ने के लिए केवल एक रुपये फीस ली थी. उनकी दलीलों के आधार पर ICJ ने जाधव की फांसी का फैसला पलट दिया था. साथ ही पाकिस्तान से फांसी की सजा के फैसले पर फिर से विचार करने को कहा था.
हरीश साल्वे ने इस केस का बैकग्राउंड बताते हुए कहा था कि तालिबान ने कुलभूषण जाधव को पाकिस्तानी सेना को सौंप दिया था. पाकिस्तानी सेना ने ईरान से लगती पाकिस्तान सीमा पर उसे पकड़ा था. ये तथ्य पाकिस्तान ने भी माना है. हालांकि पाकिस्तान ये तो नहीं मानेगा कि तालिबान ने जाधव का अपहरण किया था. लेकिन पाकिस्तानी सेना ने उसे पकड़ा कैसे, इस पर कुछ स्पष्ट नहीं है.
साल्वे की दमदार दलीलों की बदौलत ICJ ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाया. कहा कि पाकिस्तान जाधव को दोषी ठहराने के फैसले और सजा को लेकर 'प्रभावी तरीके से समीक्षा और पुनर्विचार करे'. साथ ही बिना देरी के भारत को राजनयिक पहुंच दे. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय अदालत ने पाकिस्तान से कहा कि वो जाधव को सैन्य अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए उचित मंच मुहैया कराए. बुधवार को पाकिस्तानी संसद में पारित हुआ विधायक इसी कड़ी का हिस्सा है.












