आंध्र प्रदेश में निकाय चुनावों के दौरान एक महिला बोरे के साथ नामांकन वाले दफ्तर पहुंची थी. यह सीन अपने आप में इतना असामान्य था कि पुलिस की नजरें भी महिला पर जाकर अटक गईं. पुलिस ने संदिग्ध समझकर महिला से पूछताछ की. इसके बाद जो कहानी सामने आई, वो चुनावी राजनीति पर सवाल भी उठाती है. साथ-साथ समाधान की एक खिड़की भी खोलती है. महिला ने बताया कि उसके बोरे में कोई संदिग्ध सामान नहीं है. ये वो पैसा है, जो जमा करके वो चुनाव लड़ेगी. बस ये है कि पैसा चिल्लर में है. उसके बोरे को खोला गया तो कुल 6 हजार रुपये के सिक्के मिले.
नेताओं से परेशान महिला चुनाव में उतरी, थैले में हजारों सिक्के लेकर नामांकन भरने पहुंची
आंध्र प्रदेश के तिरुपति में सुभद्रा नाम की महिला एक-एक रुपये के 6 हजार सिक्के लेकर नामांकन शुल्क जमा करने पहुंचीं. उन्होंने बताया कि गांव चिगुरुवाड़ा के लोगों ने मिलकर ये पैसे जुटाए हैं, ताकि वह चुनाव लड़कर गांव की समस्याएं दूर करने की कोशिश कर सकें.

आंध्र प्रदेश में निकाय चुनाव के दो पहलू इस बार देखने को मिले हैं. एक तो ये कि चुनावी विरोध हिंसक झड़पों में बदल रहे हैं. दूसरा, नेताओं की वादाखिलाफी से परेशान लोग विरोध के रचनात्मक तरीकों से लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. आंध्र प्रदेश के तिरुपति का ये मामला दूसरे लोकतांत्रिक तरीके की एक छोटी सी बानगी है.
महिला का नाम सुभद्रा है. वो चुनाव लड़ने वाली हैं. उन्हें अपना नामांकन शुल्क जमा करना था. इसके लिए वह पूरे 6 हजार रुपये लेकर पहुंचीं थीं. लेकिन रकम पूरी तरह एक-एक रुपये के सिक्कों में थी. अब इतने सारे सिक्के देखकर पुलिस का ध्यान जाना भी लाजिमी था. जांच के दौरान पुलिस ने उन्हें रोका और बैग में रखे सिक्कों के बारे में पूछताछ की.
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सुभद्रा ने आगे बताया कि ये पैसे उन्होंने खुद अकेले जमा नहीं किए हैं. उनके गांव चिगुरुवाड़ा के लोगों ने अपने-अपने घरों से सिक्के इकट्ठा करके उन्हें दिए थे, ताकि वह नामांकन की फीस भर सकें. गांव वालों ने जितना योगदान दिया, सुभद्रा उतने ही पैसे लेकर नामांकन दाखिल करने पहुंच गईं. अधिकारी सिक्कों से भरा बैग देखकर हैरान रह गए.
सुभद्रा ने बताया कि उनके गांव के लोग नेताओं की धोखेबाजी के परेशान हैं. उनके गांव के साथ इंसाफ नहीं हुआ. उन्होंने दुख जताया कि उनके गांव में बेसिक समस्याओं की परवाह करने वाला भी कोई नहीं है. नेता और अधिकारियों ने गांव पर कभी ध्यान नहीं दिया. नेताओं ने वोट लेकर अपना चेहरा दिखाना ही बंद कर दिया. इस वजह से सारे गांव के लोगों ने मिलकर एक-एक रुपये जुटाए. फिर सबने तय किया कि इन पैसों से सुभद्रा चुनाव लड़ेंंगी. सुभद्रा ने बताया कि वह अपने गांव की प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने के मकसद से आगे बढ़ रही हैं.
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