डायनासोर की एक दुर्लभ प्रजाति होती है नैनोटायरैनस (Nanotyrannus). खबर ये है कि न्यूयॉर्क में इसका कंकाल 47.3 मिलियन डॉलर में नीलाम हुआ है. भारतीय रुपये में इसकी कीमत करीब 450 करोड़ रुपये है. ऑक्शन सेरेमनी के दौरान छह लोगों के बीच इसको खरीदने की होड़ थी. इसके चलते फाइनल प्राइस पर पहुंचने से पहले करीब 12 मिनट तक बोली लगाई गई.
डायनासोर का कंकाल ₹450 करोड़ में बिका, खरीदने वाला क्या करेगा?
सेरेमनी से पहले ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि जोडी के कंकाल की कीमत 6 से 9 मिलियन डॉलर यानी करीब 57 से 86 करोड़ रुपये के बीच रहेगी. लेकिन नीलामी में इसे अंदाजे से कई गुना ज्यादा कीमत मिली.

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कंकाल का नाम 'जोडी' है. यह T. rex से मिलता-जुलता है, मगर उससे छोटा डायनासोर था. अब तक वैज्ञानिकों को इस प्रजाति के सिर्फ तीन ऐसे कंकाल मिले हैं, जो काफी हद तक पूरे हैं. जबकि इस प्रजाति के जो बाकी कंकाल मिले तो वो शरीर के कुछ हिस्सों के अवशेष थे.
न्यूयॉर्क में सोथबीज़ (Sotheby’s) नीलामी घर में ये ऑक्शन सेरेमनी हुई. सेरेमनी से पहले ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि जोडी के कंकाल की कीमत 6 से 9 मिलियन डॉलर यानी करीब 57 से 86 करोड़ रुपये के बीच रहेगी. लेकिन नीलामी में इसे अंदाजे से कई गुना ज्यादा कीमत मिली. हालांकि, इसके बाद भी ये सबसे महंगे डायनासोर स्केलेटन का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाया. वो रिकॉर्ड भी इसी साल जुलाई में बना था. उस वक्त 'गस' नाम के T Rex के कंकाल को 50.1 मिलियन डॉलर यानी करीब 477 करोड़ रुपये में बेचा गया था.
जोडी का कंकाल 9.6 फीट ऊंचा और 19.6 फीट लंबा है. इसकी लंबाई गस के कंकाल की आधी से थोड़ी ज्यादा है. इस प्रजाति के काफी कम कंकाल मिलते हैं. इस वजह से भी इसकी कीमत इतनी ज्यादा रही. जोडी का कंकाल अमेरिका के हेल क्रीक इलाके में मिला था. यह इलाका मोंटाना, वायोमिंग और डकोटा राज्यों तक फैला हुआ है. यहां पहले भी जमीन की परतों में डायनासोर के कई जीवाश्म (Fossils) मिले हैं. T-rex का पहला कंकाल भी 1902 में इसी इलाके में मिला था. इसी इलाके में मिले Fossils के आधार पर इस डायनासोर का नाम T-rex रखा गया था.
सोथबीज़ के मुताबिक, ये कंकाल बहुत अच्छी हालत में सुरक्षित है. इसमें हड्डियों के 191 हिस्से हैं और इसकी खोपड़ी लगभग पूरी है. वैसे तो अभी तक इस बात की जानकारी सामने नहीं आई है कि जोडी के कंकाल को किसने खरीदा है. लेकिन, इस कंकाल की हालत काफी अच्छी है, इसलिए ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि नया मालिक इसके रेप्लिका (नकल) बनाकर म्यूजियम्स या इस तरह का कलेक्शन करने वाली संस्थाओं को बेच सकता है.
एक्सपर्ट्स क्यों चिंता में?इस नीलामी के बाद एक पुरानी बहस भी दोबारा शुरू हो गई है. बहस ये कि डायनासोर के ऐसे अहम कंकालों का मालिक कौन होना चाहिए और उन्हें कहां रखा जाना चाहिए. वैज्ञानिकों को चिंता है कि अगर ऐसे कंकाल निजी लोगों के पास चले जाते हैं, तो हो सकता है कि वे आम लोगों की नजरों से दूर हो जाएं. इससे वैज्ञानिकों के लिए उन पर रिसर्च करना मुश्किल हो सकता है. साथ ही, म्यूजियम में आने वाले लोग, छात्र और दूसरे लोग भी उन्हें देख नहीं पाएंगे.
वीडियो: तारीख : भारत का सबसे ताक़तवर डायनासोर कौन था?











