रेलवे ने उन तमाम आरोपों को खारिज किया है, जिसमें कहा गया कि रेलवे ने राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष (RRSK) के फंड का दुरुपयोग किया. रेलवे ने कहा है कि उसके फंड का इस्तेमाल सिर्फ सेफ्टी से जुड़े खर्चों में किया जाता है. फुट मसाजर जैसी चीजों पर खर्च को लेकर रेलवे ने बताया है कि अगली ड्यूटी से पहले ये सुविधाएं ट्रेन ड्राइवरों के आराम के लिए होती हैं.
'मसाजर और बर्तनों पर रेल सुरक्षा फंड के पैसे खर्च हुए'- आरोपों पर रेलवे का जवाब आया है
CAG की रिपोर्ट पर रेलवे पर उठे थे सवाल.
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रेलवे के बयान और लगाए जा रहे आरोपों की पूरी बात बताते हैं. जैसा कि आप जानते हैं, ओडिशा में बालासोर रेल हादसा हुआ. 288 लोगों की जान चली गई. हादसे के बाद से ही सरकार और रेलवे सुरक्षा पर तमाम सवाल उठ रहे हैं. आरोपों और सवालों का आधार CAG की रिपोर्ट को बनाया गया.
CAG की रिपोर्ट पर दी लल्लनटॉप ने भी एक विस्तृत खबर की थी. आजतक के सूर्याग्नि रॉय की रिपोर्ट के मुताबिक CAG की रिपोर्ट के आधार लग रहे आरोपों पर रेलवे की ओर से जवाब दिया गया है. रेलवे ने कहा है कि उसने सेफ्टी कमिटी की सिफारिशों के आधार पर लोको पायलटों के लिए रनिंग रूम में बॉडी मसाजर, फुट मसाजर, AC जैसी सुविधाएं दी हैं, ताकि काम करने के लिए उनके शरीर को आराम और तनाव से राहत मिले.
रेलवे की ओर से बयान दिया गया,
"सिविल इंजीनियरिंग के काम, सिग्नलिंग, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल कामों जैसी प्राथमिकता सुरक्षा परियोजनाओं वाले प्रोजेक्ट के अलावा, ऑपरेशन के अहम क्षेत्रों में मानवीय त्रुटियों की संभावना को कम करने के लिए खर्च का स्पष्ट प्रावधान है. इसके लिए लोको पायलट जैसे कर्मियों के काम करने की स्थिति में सुधार और ट्रेनिंग शामिल है. मानव संसाधन विकास के लिए कम से कम 1,861 करोड़ रुपये दिए गए हैं."
बयान में कहा गया है कि ट्रेनों के लोको पायलट घंटों ट्रेनों में खड़े रहते हैं. ड्यूटी के बाद, वे अगली ड्यूटी से पहले एक अनिवार्य ब्रेक के लिए रनिंग रूम में जाते हैं. रनिंग रूम में मेस की सुविधा के साथ बर्तन और फुट मसाजर की सुविधा होती है. ये इसलिए होती है ताकि ड्राइवरों को अगली ड्यूटी से पहले अच्छी तरह से आराम मिले.
रेलवे पर जारी की गई CAG की रिपोर्ट का ही हवाला देते हुए कांग्रेस ने भी आरोप लगाया कि ये हादसा मोदी सरकार की लापरवाही का नतीजा है. कांग्रेस ने 8 जून को ट्वीट किया,
ओडिशा रेल हादसे के बाद से कई ऐसी बातें सामने आई हैं, जो बताती हैं कि 288 लोगों की जान लेने वाला ये हादसा मोदी सरकार की लापरवाही का नतीजा है. इन्हीं में से एक राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष यानी कि RRSK है, जिसे साल 2017 में बनाया तो यात्रियों की सुरक्षा के लिए गया था लेकिन इसमें आवंटित फंड का इस्तेमाल अधिकारी अपनी सुविधाओं पर करते हैं. आपको समझाते हैं कैसे...
रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए ‘राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष’ (RRSK) बनाया. इसमें 5 साल के लिए 1 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे. टैक्स पेयर्स के इस पैसे का इस्तेमाल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाना था, लेकिन रेलवे के अधिकारी इस पैसे को खुद पर खर्च कर रहे हैं.
ये हम नहीं कह रहे बल्कि साल 2021 में आई CAG (Comptroller and Auditor General of India) की रिपोर्ट में बताया गया है. रिपोर्ट में कहा गया- इस फंड का इस्तेमाल गैर-जरूरी चीजों पर किया गया. अब इन गैर-जरूरी चीजों की लिस्ट देख लीजिए ...
• फुट मसाजर
• जैकेट
• फर्नीचर
• महंगी क्रॉकरी
• किचन का सामान
• इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
• लैपटॉप
रेलवे के बयान में बताया गया कि क्रॉकरी, फुट मसाजर, विंटर जैकेट वगैरह की व्यवस्थआ 2013 की CAMTECH रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसे मार्च 2014 में मंजूर किया गया था. यह 2017-18 में RRSK के आने से पहले था. रेलवे ने कहा कि लिस्टेड खर्च रनिंग रूम और ट्रेनिंग स्टाफ के अपग्रेडेशन के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों पर आधारित हैं और ट्रेन चलाने की सुरक्षा से सीधे संबंधित हैं.
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