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SIR सूची से नाम हटने वाले 'बांग्लादेशी' की याचिका खारिज, HC ने कहा- 'भारतीय हो तो साबित करो!'

मुर्शिदाबाद की नरगिस बीबी का नाम SIR में कट गया है. पति सेलिम शेख को डिपोर्ट किए जाने से रोकने के लिए महिला ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया था. कोर्ट ने भारतीय नागरिकता का दस्तावेज पेश करने को कहा.

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हाईकोर्ट ने वकील से डॉक्यूमेंट्स प्रस्तुत करने को कहा है (COURTSEY- Wikimedia Commons)

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  • कलकत्ता हाईकोर्ट ने नरगिस बीबी की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने अपने पति सेलिम शेख को देश से बाहर जाने से रोकने की मांग की थी।
  • सेलिम शेख का नाम SIR प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से हटाया गया और उन्हें बंगाल पुलिस ने गैर-कानूनी प्रवासी बताते हुए डिटेंशन कैंप में रखा गया।
  • हाईकोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान पति की भारतीय नागरिकता साबित करना आवश्यक है, और याचिका खारिज करने के बाद मामले की जांच चल रही है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार, 1 अक्टूबर को मुर्शिदाबाद की नरगिस बीबी की याचिका खारिज कर दी. महिला ने अपने पति को देश से बाहर जाने से रोकने की गुहार लगाई थी.  महिला के पति का नाम SIR में काटा गया है. चुनाव आयोग बीते कुछ समय से वोटर लिस्ट को रिफाइन करने के लिए SIR की प्रक्रिया कर रहा है. इसमें कई अयोग्य मतदाताओं के नाम काटे गए हैं. हालांकि. हाई कोर्ट से भी नरगिस को राहत नहीं मिली.

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इस मामले पर टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट ने कहा,

पहले साबित करें कि आप (पति) भारतीय हैं.

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डिटेंशन कैंप में है पति

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की जांच चल रही है. महिला का नाम नरगिस बीबी है. नरगिस की याचिका पर जस्टिस कृष्णा राव की सिंगल बेंच सुनवाई कर रही थी. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक उनके पति सेलिम शेख को 31 अगस्त से डिटेंशन कैंप में रखा गया है. हालांकि, नरगिस का नाम 2002 और 2026 की वोटर लिस्ट में था. SIR के बाद संशोधित लिस्ट में सेलिम का नाम नहीं था.

वहीं बंगाल पुलिस के वकील ने कहा कि 31 अगस्त को छापेमारी हुई थी. पुलिस को मिले डॉक्यूमेंट्स से पता चला है कि सेलिम बांग्लादेशी नागरिक है. उसे गैर-कानूनी प्रवासियों की ‘पहचान, शिनाख्त और निर्वासन’ के लिए MHA (गृह मंत्रालय) की मई 2026 के नोटिफिकेशन के तहत हिरासत में लिया गया था. 

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वहीं नरगिस के वकील ने हिरासत को गैर-कानूनी बताया है. उन्होंने कहा कि सेलिम को किसी भी अधिकारी के सामने पेश नहीं किया गया है. वकील ने पूछा,

क्या मुझे अधिकारी के सामने पेश होने का मौका नहीं दिया जाएगा?

इस पर जस्टिस राव ने पूछा कि ‘किस तरह का मौका’ दिया जाना चाहिए? जज ने आगे कहा कि कानून के मुताबिक, 30 दिन की जांच चल रही है. अगर आप कोर्ट या अधिकारी को यह साबित नहीं कर पाते कि आप भारतीय नागरिक हैं, तो अधिकारी क्या करेगा? क्या वह आपको भारतीय इलाके में घूमने देगा? आपसे एक दस्तावेज मांगा गया है. वह दिखाएं. जस्टिस राव ने कहा कि मुझे वह दस्तावेज़ दिखाएं जिसमें आपका नाम 2002 की वोटर लिस्ट में था. इसके बाद उन्होंने याचिका खारिज कर दी.

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