एशिया की टॉप यूनिवर्सिटी में भले ही भारत की भागेदारी बढ़ी हो, लेकिन भारतीय शिक्षण संस्थानों की रैंक में 71% की गिरावट आई है. QS एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 (QS Asia University Rankings 2027) में 325 भारतीय यूनिवर्सिटी और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को जगह मिली. संख्या के लिहाज से चीन के बाद भारत दूसरे नंबर पर है. QS रैंकिंग में ओवरऑल इंडियन इंस्टीट्यूशन ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली (IIT दिल्ली) भारत में टॉप रैंक वाला इंस्टीट्यूशन बना. भारतीय विश्वविद्यालयों में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने नंबर वन पोजीशन हासिल की.
DU टॉप 100 की लिस्ट से बाहर, भारत की 71% यूनिवर्सिटीज की एशिया रैंकिंग में भारी गिरावट
QS Asia University Rankings 2027: QS एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में 325 भारतीय यूनिवर्सिटी और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को जगह मिली. QS रैंकिंग में IIT दिल्ली भारत में टॉप रैंक वाला इंस्टीट्यूशन बना.

भारत के 71 फीसदी शिक्षण संस्थानों की रैंक नीचे गई है. इसमें देश के बड़े IIT और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय शामिल हैं. QS एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 के मुताबिक, भारत के 18 फीसदी यूनिवर्सिटीज की रैंक में सुधार हुआ है, जबकि 11 फीसदी संस्थान अपनी पिछली रैंक पर कायम रहे.
IIT और बड़े विश्वविद्यालयों की रैंक भी गिरीगिरावट का असर देश के टॉप संस्थानों पर भी देखने को मिला. रैंकिंग 2027 में भारतीय संस्थानों में IIT दिल्ली सबसे आगे है. लेकिन, इसकी रैंक में सात स्थान की गिरावट आई है. देश में सबसे अच्छी रैंक लाने के बावजूद IIT दिल्ली की रैंक 59 से गिरकर 66 रह गई.
इसी तरह, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु (IISc Bengaluru) की रैंक 64 से गिरकर 79 हो गई. IIT बॉम्बे 71वें से 83वें और IIT मद्रास 70वें से 85वें पायदान पर पहुंच गया. देश की रेपुटेड यूनिवर्सिटीज में दिल्ली यूनिवर्सिटी की रैंक भी 95 से गिरकर 106 हो गई. इस कारण दिल्ली यूनिवर्सिटी एशिया की टॉप 100 यूनिवर्सिटी की लिस्ट से भी बाहर हो गई.
IIT कानपुर की रैंक में भी 20 स्थान की गिरावट आई है. ये 77वें से 97वें स्थान पर पहुंच गया. यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (UPES) की रैंक भी 163 से गिरकर 183 हो गई. वहीं, शूलिनी यूनिवर्सिटी 159वें से 177वें स्थान पर पहुंच गई.
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी भारतीय विश्वविद्यालयों में नंबर वनरैंकिंग में कुछ भारतीय संस्थानों ने बेहतर प्रदर्शन भी किया है. चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की रैंक 109 से सुधरकर 104 हो गई. इसके साथ ही ये भारतीय विश्वविद्यालयों में पहले नंबर पर रही. वहीं, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने 187वें से 154वें और सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने 200वें से 175वें स्थान पर जगह बनाई.
सरकारी संस्थानों में IIT हैदराबाद की रैंक 270 से सुधरकर 251 हो गई. IIT BHU, वाराणसी 237वें से 219वें स्थान पर पहुंचा. जामिया मिल्लिया इस्लामिया 197वें से 183वें, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी 278वें से 268वें और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी 130वें से 128वें स्थान पर पहुंच गई.
क्यों गिरी भारतीय यूनिवर्सिटी की रैंक?QS के मुताबिक, भारतीय विश्वविद्यालयों की रैंक में गिरावट की बड़ी वजह एशिया में बढ़ता कंपटीशन है. इस साल रैंकिंग में 195 नए विश्वविद्यालय शामिल हुए हैं. इसके अलावा पहले से मौजूद कई संस्थानों ने भी अपनी परफॉर्मेंस में सुधार किया है.
QS के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बेन सॉटर ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि 71 फीसदी का आंकड़ा ये नहीं बताता कि भारत का प्रदर्शन 71 फीसदी गिर गया है. इसका मतलब है कि रैंकिंग में शामिल 325 भारतीय संस्थानों में से 71 फीसदी की रैंक नीचे गई है.
उन्होंने बताया कि रैंक गिरने का मतलब हमेशा संस्थान के प्रदर्शन में गिरावट होना नहीं है. रैंकिंग में नीचे जाने वाले भारतीय विश्वविद्यालयों में से करीब दो-तिहाई ने अपने ओवरऑल स्कोर में सुधार किया है. IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली और IISc जैसे संस्थानों ने भी अपने स्कोर को लगभग बरकरार रखा है.
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QS के मुताबिक, भारतीय विश्वविद्यालयों की सबसे ज्यादा गिरावट एकेडमिक रेपुटेशन, एम्प्लायर्स के बीच रेपुटेशन और इंटरनेशनल स्टूडेंट्स से जुड़े पैमानों पर देखने को मिली. वहीं, रिसर्च के क्षेत्र में भारतीय संस्थानों की परफॉर्मेंस बेहतर रही. प्रति फैकल्टी रिसर्च पेपर इकलौता ऐसा पैमाना था, जिसमें विश्वविद्यालयों की संख्या घटने के बजाय बढ़ी. इस मामले में एशिया की टॉप 50 यूनिवर्सिटी में भारत के 27 संस्थान शामिल हैं.
10 साल में 24 से बढ़कर 325 हुई संख्याबेन सॉटर के मुताबिक, बीते दशक में एशिया लिस्ट में भारतीय विश्वविद्यालयों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है. 2016 में QS रैंकिंग में भारत के सिर्फ 24 संस्थान शामिल थे, जो 2027 में बढ़कर 325 हो गए हैं. यानी इस दौरान इसमें 1,250 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.
वीडियो: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय विश्वविद्यालयों से क्या कहा?













