इजरायल के चुनाव में बहुमत से दूर रह गए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अब चुनावी नतीजों के आधिकारिक ऐलान में देरी कराने की कोशिश कर रहे हैं. उनकी पार्टी लिकुड ने चुनाव में विदेशी दखल का आरोप लगाकर चुनाव के नतीजों के आधिकारिक ऐलान को टालने की मांग की. लेकिन चुनाव समिति ने ये मांग खारिज कर दी. इस बीच, नेतन्याहू ने विपक्षी दलों को साथ लेकर एक व्यापक राष्ट्रीय सरकार बनाने की बात कही है. हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया है कि वे अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार नहीं बनाएंगे.
इजरायल में सरकार नहीं बना पा रहे बेंजामिन नेतन्याहू, तो चुनाव रिजल्ट ही टलवाने लगे
बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें इसलिए भी बढ़ रही हैं, क्योंकि विपक्षी दल अब एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं. विपक्ष के चार प्रमुख दलों के नेताओं ने गादी आइसेनकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन देने का संकेत दिया है.

यानी एक तरफ नेतन्याहू सरकार बनाने का रास्ता तलाश रहे हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष उन पर चुनावी नतीजों को कमजोर करने का आरोप लगा रहा है. तो पहले बात करते हैं चुनावी नतीजों पर छिड़े विवाद की.
इजरायल चुनाव नतीजे 2026
इजरायल में 27 अक्टूबर को आम चुनाव हुए. इसमें पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. लेकिन नेतन्याहू के समर्थन वाले गठबंधन को बहुमत नहीं मिला. इस गठबंधन को कुल 53 सीटें मिलीं. जबकि 120 सीटों वाली संसद यानी नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटें चाहिए.
दूसरी तरफ, विपक्षी दलों को 48 सीटें मिलीं. जबकि अरब पार्टियों ने कुल 19 सीटें जीतीं. इस तरह किसी भी खेमे के पास अपने दम पर सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या नहीं है. इसी बीच, लिकुड ने चुनाव में विदेशी दखल का आरोप लगाया.
लिकुड का दावा है कि कतर या किसी दूसरी विदेशी ताकत ने अरब वोटरों की भागीदारी बढ़ाने के लिए पर्दे के पीछे से पैसा लगाया. हालांकि, इन आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है. इजरायल की सुरक्षा एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं.
अब लिकुड ने चुनाव के नतीजों के आधिकारिक ऐलान को टालने की मांग की है. टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, लिकुड पार्टी के वकील इलान बोम्बाख ने चुनाव समिति के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के जज नोआम सोहल्बर्ग को पत्र लिखकर तत्काल बैठक बुलाने की मांग की. लेकिन सोहल्बर्ग ने इसे खारिज कर दिया.
जज नोआम सोहल्बर्ग ने कहा कि चुनाव समिति के पास नतीजों को प्रमाणित करने से रोकने का अधिकार नहीं है. जांच अपनी जगह चलती रहेगी, लेकिन उसके नाम पर चुनावी नतीजों को रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ होगा.
नेतन्याहू की मुश्किलें इसलिए भी बढ़ रही हैं, क्योंकि विपक्षी दल अब एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं. विपक्ष के चार प्रमुख दलों के नेताओं ने गादी आइसेनकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन देने का संकेत दिया है. इनमें एविग्डोर लिबरमैन, यायर गोलान और नफ्ताली बेनेट की पार्टी शामिल हैं. विपक्षी गठबंधन की अगुवाई आइसेनकोट कर रहे हैं. उनकी अपनी पार्टी यशार ने चुनाव में 21 सीटें जीती हैं.
2 नवंबर को इन नेताओं ने ऐलान किया कि वे 3 नवंबर को एक ज्वाइंट मीटिंग करेंगे. इसमें सरकार बनाने की रणनीति पर चर्चा होगी. विपक्षी दल संसद के स्पीकर अमीर ओहाना को हटाकर उनकी जगह यायर लैपिड को लाने के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं.
लेकिन विपक्ष के सामने भी एक बड़ी चुनौती है. उसके पास अभी सिर्फ 48 सीटें हैं. बहुमत के लिए 13 और सीटों की जरूरत है. इसके लिए उसे अरब पार्टियों का समर्थन लेना होगा.
अरब-मुस्लिम पार्टी जॉइंट लिस्ट के नेता यूसुफ जबरीन ने न्यूज एजेंसी AFP से बातचीत में कहा कि विपक्ष को राजनीतिक हकीकत समझनी होगी. मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए अरब पार्टियों के साथ तालमेल जरूरी है.
जॉइंट लिस्ट और राआम पार्टी के पास कुल 19 सीटें हैं. अगर ये पार्टियां विपक्ष का समर्थन करती हैं, तो गादी आइसेनकोट के पास 67 सांसदों का समर्थन हो सकता है. हालांकि, सभी विपक्षी दल अरब पार्टियों को सरकार में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं.
बेंजामिन नेतन्याहू ने अरब पार्टियों पर क्या कहा?बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इन्हीं पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने से इनकार किया है. उन्होंने 2 नवंबर की देर रात X पोस्ट करते हुए लिखा,
"इजरायल की जनता ऐसी सरकार नहीं चाहती, जो राआम पार्टी और जॉइंट लिस्ट जैसी पार्टियों के समर्थन पर निर्भर हों. ये पार्टियां आतंकवाद का समर्थन करती हैं और यहूदी राष्ट्र के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करतीं. पहले दिन से ही हमने एक व्यापक राष्ट्रीय सरकार बनाने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया है. यहूदी समुदाय के एक स्पष्ट बहुमत ने लिकुड को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में चुना है और मुझे अगली सरकार का नेतृत्व करने के लिए प्रधानमंत्री के तौर पर जनादेश दिया है. हम अपने सहयोगियों और ऐसी किसी भी अन्य पार्टी के साथ मिलकर एक व्यापक सरकार बनाना चाहते हैं, जो ऐसा करने की इच्छुक हो और आतंकवाद का समर्थन ना करती हो. मैं इस मुद्दे पर बातचीत करने के लिए तैयार हूं."

वहीं, दूसरी तरफ, जॉइंट लिस्ट का कहना है कि वो ऐसे कानूनों और फैसलों में विपक्ष का साथ देने को तैयार है, जो उसके राजनीतिक एजेंडे से मेल खाते हों.
अब सबकी नजर इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग पर है. वे 4 नवंबर से सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे. इसके बाद तय होगा कि किस नेता को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाए.
नई इजरायल सरकार कैसे बनेगी?नियम के मुताबिक, सरकार बनाने के लिए किसी नेता को 120 सदस्यों वाली संसद में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए. चुने गए नेता को सरकार बनाने के लिए 28 दिन मिलते हैं. जरूरत पड़ने पर 14 दिन की अतिरिक्त मोहलत भी मिल सकती है.
इजरायल की नई संसद यानी 26वीं नेसेट का शपथ ग्रहण 10 नवंबर को होना है. अगर कोई भी नेता बहुमत जुटाने में नाकाम रहता है, तो देश में फिर से चुनाव कराने की नौबत आ सकती है.
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फिलहाल, बेंजामिन नेतन्याहू के सामने दो रास्ते हैं. या तो वे विपक्ष के किसी धड़े को अपने साथ लाएं या फिर अरब पार्टियों के समर्थन के बिना सरकार बनाने का कोई दूसरा रास्ता तलाशें. दूसरी तरफ, विपक्ष के लिए भी अरब पार्टियों के समर्थन के बिना बहुमत जुटाना मुश्किल है. यानी इजरायल में चुनाव खत्म हो चुका है, लेकिन सत्ता की लड़ाई अभी बाकी है.
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