9 सितंबर को उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक विमान लैंड करता है. देखने में तो ये आम सा विमान था. लेकिन ये अपने आप में बहुत खास था. रूस से आए इस विमान में कोई यात्री नहीं, बल्कि कुछ गाड़ियां और ब्लैक सूट पहने कुछ लोग आए. ये रूस का सरकारी विमान था. कहा गया कि 11 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit) में भाग लेने के लिए प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन आ रहे हैं. उनके आने से पहले कुछ 'जरूरी' सामान आया है. पता चला कि इस जहाज से कुछ गाड़ियां आईं थीं. वही गाड़ियां, जिन्हें चलता फिरता किला कहा जाता है. नाम है Aurus Senat.
'उड़ता किला' और बख्तरबंद कार: प्रेसिडेंट पुतिन का अभेद्य सुरक्षा चक्र, दुश्मन की हर चाल करे नाकाम
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंचे तो उनके विमान और कार की तस्वीरें इंटरनेट पर छा गईं. लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है कि पुतिन किस कार में बैठे या किस विमान से आए. पुतिन की ये कार और विमान दोनों ही सुरक्षा के लिहाज से अहम हैं.

प्रेसिडेंट पुतिन इसी गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं. फिर 11 सितंबर को जब प्रेसिडेंट पुतिन आए तो उनके विमान की भी खूब रीलें कटी और इंटरनेट पर वायरल हो गई. और होती भी कैसे नहीं. क्योंकि ये वो विमान है जिसे उड़ता 'क्रेमलिन' कहा जाता है. नाम है Ilyushin-96-300. तो समझते हैं कि प्रेसिडेंट पुतिन की गाड़ी और जहाज में ऐसा क्या है, जो हमेशा लोगों के बीच कौतूहल का विषय बना रहता है.
उड़ता किला है प्रेसिडेंट पुतिन का विमानजब-जब दुनिया की सबसे सुरक्षित और सुविधाओं से लैस एयरक्राफ्ट की बात आती है, तब प्रेसिडेंट पुतिन के विमान का नाम जरूर आता है. दरअसल रूस की खुफिया एजेंसी GRU अपने प्रेसिडेंट की सुरक्षा को लेकर काफी चौकन्ना रहती है. मकसद है प्रेसिडेंट पुतिन के काफिले के आसपास परिंदा भी पर न मार सके.
रूसी एजेंट्स इतने सतर्क रहते हैं कि प्रेसिडेंट पुतिन का पेशाब और पॉटी भी किसी और देश में नहीं छोड़ते. इसलिए क्योंकि उनके पेशाब या पॉटी से उनके बारे में काफी कुछ पता किया जा सकता है. अब वापस आते हैं उनके एयरक्राफ्ट पर. प्रेसिडेंट पुतिन Ilyushin-96-300 नाम के एयरक्राफ्ट की तर्ज पर बने एक स्पेशल विमान का इस्तेमाल करते हैं. इस विमान को Ilyushin Design Bureau ने बनाया था. 90 के दशक की शुरुआत में इसे सर्विस में शामिल किया गया.
खैर ये मॉडल प्रेसिडेंट पुतिन के विमान से काफी अलग है. बस बनाने वाली कंपनी एक है. प्रेसिडेंट वाले विमान को Voronezh Aircraft Production Association (VASO) बनाती है. प्रेसिडेंट वाले वेरिएंट को IL-96-300PU कहा जाता है. PU का रूसी में मतलब होता है Punkt Upravleniya. हिंदी में बोले तो Command Post. प्रेसिडेंट के विमान के पायलट भी खास होते हैं. इसे 'स्पेशल फ्लाइट स्क्वाड्रन' नाम की एक खास यूनिट के लोग उड़ाते हैं.
प्रेसिडेंट पुतिन का विमान लगभग 55.35 मीटर लंबा है. इसके विंगस्पैन यानी डैने 60.12 मीटर के हैं. इस विशाल एयरक्राफ्ट को पावर देने के लिए इसमें चार इंजन लगे हैं. प्रेसिडेंट वाले विमान के कुछ फीचर्स पर नजर डालें तो-
- इसमें एनक्रिप्टेड कम्युनिकेशन है. यानी इसके रेडियो से लेकर किसी भी तरह के कम्युनिकेशन को ट्रैक करना बहुत ही मुश्किल है.
- इस एयरक्राफ्ट के जरिए प्रेजिडेंट हमेशा अपने टॉप मिलिट्री कमांडर्स से जुड़े रहते हैं.
- इसमें कम्युनिकेशन के लिए अलग से सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जाता है.
- ये एयरक्राफ्ट इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, रडार जैमिंग तकनीक और कई तरह के डिफेंसिव सिस्टम्स से लैस है.
- अगर इसपर मिसाइल से हमला होता है, तो उससे बचने के लिए भी इसमें फ्लेयर और एंटी-मिसाइल सिस्टम्स लगे हैं.
- इमरजेंसी में प्रेसिडेंट इसी विमान में बैठ कर जंग की अगुवाई कर सकते हैं. इसीलिए इसे कमांड पोस्ट भी कहा जाता है.
- इसका फ्यूल टैंक इतना बड़ा है कि ये बिना रिफ्यूलिंग के 11 हजार किलोमीटर तक लगातार उड़ान भर सकता है. यानी एक फुल टैंक में ये लगभग 3 बार दिल्ली से मॉस्को का चक्कर लगा सकता है.
अब जहाज आया, तो प्रेसिडेंट पुतिन के उनके उतरने से पहले ही एक कार रनवे पर उनका इंतजार कर रही थी. इस कार का नाम Senate Aurus है. वही कार जिसमें सितंबर 2025 में वो पीएम मोदी के साथ बैठे थे. इंटरनेट पर उनकी तस्वीरें खूब वायरल हुई थीं.
क्यों खास है पुतिन की कार?ऑरस सेनेट (Aurus Senat) रूस की एक लग्जरी लिमोजीन कार है. इसे खास तौर पर राष्ट्रपति और सरकारी इस्तेमाल के लिए बनाया गया है. इसे अक्सर ‘रूसी रॉल्स-रॉयस’ कहा जाता है. इसमें मज़बूत बख्तरबंद यानी हथियारों से सुरक्षित बॉडी, ब्लैकआउट खिड़कियां और शानदार, हाई-टेक इंटीरियर है.

इस कार को अपनाने से पहले, पुतिन मर्सिडीज-बेंज S 600 गार्ड पुलमैन का इस्तेमाल करते थे. लेकिन बाद में रूस ने बाहर से मंगाई गई सरकारी कारों की जगह अपने 'कोर्टेज्ह' (Kortezh) प्रोजेक्ट के तहत बनी गाड़ियों का इस्तेमाल शुरू किया. यह प्रोजेक्ट लग्जरी और पूरी तरह से बख्तरबंद सरकारी गाड़ियां बनाने के लिए शुरू किया गया था.
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पुतिन की इस कार को 2018 में, उनके शपथ ग्रहण समारोह के दौरान लॉन्च किया गया था. यह कंपनी रूस के NAMI इंस्टीट्यूट, सोलर्स JSC और UAE के तवाजुन होल्डिंग के बीच एक पार्टनरशिप के तहत बनाई जाती है. 2021 में येलाबुगा में बड़े पैमाने पर इसका प्रोडक्शन शुरू हुआ. तब से यह लिमोजीन कई अहम कूटनीतिक मौकों पर नजर आई है. 2024 में प्रेसिडेंट ने उत्तर कोरिया के लीडर नेता किम जोंग-उन को तोहफे में यही गाड़ी दी थी. वैसे तो ये आम लोगों को नहीं मिलती. लेकिन इसका एक वर्जन है जो आम लोगों के लिए भी उपलब्ध है. पर इसका प्रोडक्शन काफी लिमिटेड होता है.

इस कार के कुछ फीचर्स पर नजर डालें तो-
- पूरी तरह बुलेटप्रूफ, हर तरह की गोलियां झेलने में सक्षम
- मिसाइल अटैक का असर नहीं होता.
- पानी में गिरने पर डूबती नहीं है.
- टायर फट जाएं, तो भी चल सकती है.
- केमिकल, बायोलॉजिकल अटैक से सुरक्षित
- इंडिपेंडेंट एयर फिल्टर - जहरीली गैसों को अंदर नहीं आने देता.
इस कार की कीमत के वैसे तो ढाई करोड़ के आसपास है. लेकिन प्रेसिडेंट पुतिन जैसे VIP के लिए इसमें कई तरह के कस्टमाइजेशन किया गए हैं. इससे इसकी कीमत काफी बढ़ गई है.
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