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मायावती की BSP में दूसरे दिग्गजों के लिए जगह नहीं? इन 'नवरत्नों' की कहानी बहुत कुछ कहती है

पिछले करीब 11 साल में लालजी वर्मा, ब्रजेश पाठक, इंद्रजीत सरोज, स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान, नसीमुद्दीन सिद्दीकी और धर्मसिंह सैनी समेत कई बड़े चेहरे BSP से अलग हुए. कोई BJP में गया, कोई कांग्रेस में, कोई समाजवादी पार्टी में और किसी ने अपनी अलग राजनीतिक राह चुन ली.

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मायावती की पार्टी से समय-समय पर कई बड़े नेता बाहर हो गए. (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • 10 सितंबर को बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर किया।
  • मायावती के करीबी कई बड़े नेता राजनीतिक मतभेदों और महत्वाकांक्षाओं के कारण बीते करीब 11 वर्षों में बसपा छोड़ चुके हैं।
  • आकाश आनंद के निष्कासन के बाद यह सवाल उठता है कि वह क्या नई पार्टी बनाएंगे या किसी अन्य दल में शामिल होंगे।

आकाश आनंद की BSP से विदाई कोई पहली कहानी नहीं है. 10 सितंबर को बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया. लेकिन BSP का इतिहास बताता है कि मायावती के बेहद करीबी रहे कई बड़े नेता भी वक्त के साथ उनसे दूर हुए और दूसरी पार्टियों का हिस्सा बन गए.

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दिलचस्प बात ये है कि 11 सितंबर को मायावती ने खुद उन नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी से निकाले गए कुछ लोग दूसरी पार्टियों के हाथों में खेलकर छोटी-छोटी पार्टियां और संगठन तक बना लेते हैं.

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यानी सवाल सिर्फ आकाश आनंद का नहीं है. सवाल ये भी है कि BSP से निकलने के बाद उन नेताओं का क्या हुआ, जो कभी मायावती के ‘नवरत्न’ माने जाते थे?

मायावती के ‘अपने’ हुए ‘पराये’

पिछले करीब 11 साल में लालजी वर्मा, ब्रजेश पाठक, इंद्रजीत सरोज, स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान, नसीमुद्दीन सिद्दीकी और धर्मसिंह सैनी समेत कई बड़े चेहरे BSP से अलग हुए. कोई BJP में गया, कोई कांग्रेस में, कोई समाजवादी पार्टी में और किसी ने अपनी अलग राजनीतिक राह चुन ली. तो चलिए जानते हैं, मायावती के ये पुराने साथी BSP से कब और क्यों अलग हुए और आज कहां हैं.

ब्रजेश पाठक

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इस ल‍िस्ट में पहला नाम हैं ब्रजेश पाठक का. साल 2004 में बसपा में शामिल हुए. 2004 के ही लोकसभा चुनाव में उन्नाव सीट से जीत कर सांसद बने. फिर 2008 से 2014 तक राज्यसभा के सदस्य रहे. 2016 में BSP से निष्कासित होने के बाद वो बीजेपी में गए. 2017 में योगी सरकार में मंत्री बने. फिर 2022 में उन्हें सीएम योगी के साथ डिप्टी सीएम बनाया गया.

नंदगोपाल नंदी

नंदगोपाल नंदी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बसपा से की. उन्होंने 2007 के विधानसभा चुनाव में दिग्गज नेता केसरीनाथ त्रिपाठी को हराया था. इसके बाद मायावती सरकार में मंत्री बने. 2012 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद वो बीएसपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए. लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले फिर पाला बदला और बीजेपी में शामिल हो गए. 2022 में सीएम योगी के नेतृत्व में फिर से बीजेपी सरकार बनी तो नंदी भी फिर मंत्री बने.

ओम प्रकाश राजभर

तीसरा नाम है ओम प्रकाश राजभर का. कांशीराम के समय से ही वो BSP के साथ थे. 2002 में मायावती से मतभेदों के बाद उन्होंने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) बनाई. फिलहाल बीजेपी के साथ गठबंधन में हैं. और योगी सरकार में मंत्री हैं.

बाबू सिंह कुशवाहा

चौथा नाम है बाबू सिंह कुशवाहा का. कांशीराम के बुलावे पर बाबू सिंह कुशवाहा ने राजनीति में कदम रखा. 1993 में बांदा के जिला अध्यक्ष बने. साल 2003 में बसपा सरकार में पंचायती राज मंत्री की जिम्मेदारी संभाली. 2007 में जब यूपी में BSP की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी, तब वे मायावती के सबसे भरोसेमंद और ताकतवर मंत्रियों में गिने जाने लगे. उनके पास खनिज, नियुक्ति, सहकारिता और परिवार कल्याण जैसे अहम विभाग रहे. मायावती सरकार के दौरान उन पर NRHM घोटाले के गंभीर आरोप लगे. इसके बाद उन्हें मंत्री पद से हटना पड़ा. कुशवाहा 27 साल तक BSP के सदस्य रहे. 2016 में BSP से अलग होने के बाद जन अधिकार पार्टी बनाई. फिर 2024 का चुनाव जौनपुर से समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ा और जीत गए. फिलहाल सपा से लोकसभा सांसद है.

दारा सिंह चौहान

पांचवां नाम है दारा सिंह चौहान का. साल 2007 के विधानसभा चुनाव में वो BSP में शामिल हुए थे. 2009 के लोकसभा चुनाव में घोसी से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. लेकिन 5 साल बाद तस्वीर बदल गई. 2014 में पार्टी ने निष्कासित कर दिया. फिर वो बीजेपी में चले गए. BJP ने दारा सिंह चौहान को पिछड़ा जाति प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था. 2017 का विधानसभा चुनाव बीजेपी के टिकट पर घोसी से लड़ा. जीते और योगी सरकार में मंत्री बने. बाद में SP में गए. फिर BJP में लौटे. फिलहाल 2024 से UP विधान परिषद के सदस्य हैं.

स्वामी प्रसाद मौर्य

छठवां नाम है स्वामी प्रसाद मौर्य का. साल 2016 में इन्होंने मायावती पर टिकट बेचने का आरोप लगते हुए बीएसपी से इस्तीफा दे दिया था. 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुए. योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने. फिर 2022 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी छोड़ सपा का हाथ थाम लिया. MLC बनाए गए. लेकिन ज्यादा दिन ये  साथ नहीं चला. फिलहाल स्थिति ये है कि इन्होंने अपनी पार्टी बना ली है, जिसका नाम 'राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी' (RSSP) है.

नसीमुद्दीन सिद्दीकी

सातवां नाम है नसीमुद्दीन सिद्दीकी का. एक समय मायावती के करीबी और BSP के बड़े मुस्लिम चेहरों में इनका नाम शामिल था. BSP ज्वॉइन करने से पहले नसीमुद्दीन रेलवे कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर काम करते थे. 2010 तक नसीमुद्दीन सिद्दीकी मायावती के सबसे ताकतवर मंत्रियों में से थे. उनके पास दर्जनों विभाग थे. इनमें पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग शामिल थे. नसीमुद्दीन के लिए स्थितियां 2017 में तब बदलीं, जब चुनावों में बीएसपी को सिर्फ 19 सीटें मिलीं. फिर बीजेपी की नई सरकार ने चीनी मिलों को बेचने के मामले में जांच के आदेश दिए. मायावती ने कहा कि ये फैसला कैबिनेट ने नहीं किया, बल्कि सिद्दीकी के विभाग का था. 2017 में BSP ने उन्हें पार्टी से निकाला तो वो कांग्रेस में चले गए. फिर इसी साल कांग्रेस का हाथ छोड़ सपा में शामिल हो गए.

धनंजय सिंह

आठवां नाम है धनंजय सिंह का. इनका राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के रारी विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक और जौनपुर से लोकसभा सांसद बनने तक रहा है. 2008 में BSP में शामिल हुए और 2009 में बसपा के टिकट पर जौनपुर से सांसद चुने गए. 2009 के बाद ये कोई भी चुनाव नहीं जीते. फिर 2011 में मायावती ने उन्हें 'पार्टी के खिलाफ काम करने' की वजह से निकाल दिया. फिलहाल धनंजय सिंह की अपनी पार्टी है. जिसका नाम - राष्ट्रवादी नौजवान सभा है.

दानिश अली

नौवां नाम है दानिश अली का. साल 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले BSP में शामिल हुए थे. पार्टी ने टिकट दिया तो अमरोहा सीट से जीत दर्ज की. ये वो दौर था जब देशभर में बीजेपी की लहर थी इसके बाद भी दानिश अली अमरोहा सीट निकालने में सफल रहे. इसके बाद से दानिश अली की गिनती मायावती के विश्वसनीय नेताओं में होने लगी थी. दानिश अली वहीं नेता है जिन पर लोकसभा में तत्कालीन बीजेपी सांसद रमेश बिधूड़ी ने विवादित टिप्पणी की थी. उस समय काफी विवाद हुआ. 2024 में दानिश कांग्रेस में शामिल हुए. लोकसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर अमरोहा सीट से लड़े लेकिन हार गए. फिलहाल कांग्रेस पार्टी में ही हैं.

तो ये वे नाम हैं जो एक समय BSP में मायावती के सबसे भरोसेमंद नेताओं की लिस्ट में शामिल थे. फिर कुछ अनबन या राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की वजह से पार्टी से साथ छूटा और फिर कभी BSP में वापसी नहीं की.

अब इन नेताओं की लिस्ट में आकाश आनंद का नाम भी शामिल हो गया है. हालांकि वे राजनीतिक दिग्गज नहीं थे, लेकिन मायावती से रिश्ते के चलते बड़ा नाम जरूर थे. अब देखना होगा कि आकाश इन नेताओं की तरह अपनी पार्टी बनाते हैं, या किसी दूसरे दल में शामिल होते है. 

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