प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस ने लाल किले पर केसरी झंडा फहराने वाले को 3.5 लाख डॉलर देने की घोषणा की है. फोटो- इंडिया टुडे
26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में जो कुछ भी हुआ, पूरे देश ने देखा. ट्रैक्टरों से बैरीकेड्स तोड़ती भीड़ देखी, निहंगों के हाथों में खुली तलवारें देखीं और दिल्ली के लाल किले पर झंडा फहराते प्रदर्शनकारी भी देखे. ये सिख धर्म का झंडा था, जिसे निशान साहिब कहा जाता है. लाल किले पर जबरन झंडा फहराने को लेकर अलग अलग दावे सामने आ रहे हैं. एक तरफ एक्टर और ऐक्टिविस्ट दीप सिद्धू ये दावा कर रहे हैं. वहीं एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें दावा किया जा रहा है कि जिस शख्स ने लाल किले लगे पोल पर चढ़कर निशान साहिब फहराया, उसका नाम जुगराज सिंह है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, वीडियो में एक युवक को ये कहते सुना जा सकता है कि वान तारा सिंह गांव के रहने वाले जुगराज सिंह ने खालसा ध्वज फहराया है. वान तारा सिंह पंजाब के तरनतारन जिले के गांव है. वो युवक जुगराज का नजदीकी रिश्तेदार होने का दावा भी करता है. https://twitter.com/ANI/status/1353984535084470272
आजतक के मंजीत सहगल के मुताबिक, एक अन्य वीडियो में जुगराज सिंह कहता नजर आ रहा है-
मैं सुबह से प्रार्थना कर रहा था कि मुझे लाल किले पर झंडा फहराना है, और मेरी अरदास सुन ली गई. मुझे गोलियों का डर नहीं था
परिवार का एक वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल है, जिसमें जुगराज सिंह के पिता और दादा खुशी जता रहे हैं. उनका कहना है कि उनके बेटे ने बहादुरी दिखाई है. वह इससे बहुत खुश हैं. वीडियो में जुगराज के पिता बलदेव सिंह, दादा महल सिंह के अलावा उसकी दादी और मां भी नजर आते हैं. 2 मिनट 21 सेकेंड्स के इस वीडियो में जुगराज के दादा उसकी तारीफ करते दिखाई देते हैं. उन्हें ये कहते साफ सुना जा सकता है कि,
"ये सिख पंथ के लिए गर्व की बात है कि पहले लाल किले पर खालसा का विजय ध्वज फहराया गया था, और अब 2021 में फिर से खालसा की विजय पताका लाल किले पर लगाई गई."
टाइम्स नाउ के मुताबिक, जब जुगराज सिंह के दादा से खालिस्तान से संबंध और पैसा दिए जाने से जुड़े सवाल किए गए तो उन्होंने कहा कि ऐसा कोई सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने बताया कि जुगराज खेतीबाड़ी का काम करता है. पहले एक कंपनी में काम करता था. किसान आंदोलन में शामिल होने के बारे में उन्होंने बताया कि जुगराज एक-दो दिन पहले ही गया था. इस मामले को लेकर पुलिस फिलहाल जांच कर रही है. तरनतारन के एक सीनियर पुलिस अधिकारी कहते हैं कि पुलिस फिलहाल ये देख रही है कि युवक ने किस नियम तो तोड़ा है और कानून की किस धारा के अंतर्गत उस पर कार्रवाई की जानी चाहिए. गौरतलब है कि 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली के लिए लंबी बातचीत के बाद पुलिस ने इजाजत दे दी थी. लेकिन तय वक्त से पहले ही कुछ जगहों पर किसान दिल्ली में घुस गए. जो रूट तय किया गया था, प्रदर्शनकारियों का एक जत्था उससे अलग हटकर लालकिले की तरफ चल पड़ा. पुलिस ने रोकने की कोशिश की. लाठियों और आंसूगैस का सहारा लिया. लेकिन नाकामयाब रहे. इसी दौरान आईटीओ पर ट्रैक्टर पलटने से एक प्रदर्शनकारी किसान की मौत हो गई. वीडियो में साफ दिखा कि तेज रफ्तार ट्रैक्टर बैरीकेड्स को तोड़ने की कोशिश में पलट गया. पहले कुछ प्रदर्शनकारियों ने दावा किया था कि पुलिस की गोली से युवक की मौत हुई है, लेकिन CCTV फुटेज से साफ हो गया कि ट्रैक्टर कैसे पलटा. फिलहाल पुलिस हिंसा करने वालों की पहचान में जुटी है. सीसीटीवी और वीडियो के जरिये उपद्रवियों पहचान की कोशिश हो रही है. दिल्ली में हुई हिंसा, तोड़फोड़, पुलिसवालों पर हमले आदि को लेकर करीब 22 FIR दर्ज की गई हैं. पुलिस का कहना है कि जिन लोगों ने हालात बिगाड़े, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.