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चुनाव आयोग और आचार संहिता बैठे रह गए, पीएम मोदी का प्रचार घर-घर घुस गया

चुनाव प्रचार में कोई माई का लाल बीजेपी को नहीं हरा सकता.

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फोटो - thelallantop
देश में चुनाव हैं. आदर्श आचार संहिता लगी है. (LOL) NaMo TV चल्ला है, पिच्चरें आ रही हैं. सीरीजें बह रही हैं. वैज्ञानिक प्रधानमंत्री देश को संबंधित कर्रे हैं. 'मोदी की सेना' पर बमचक कटी है. महामहिम राज्यपाल अभी के पीएम को देश के लिए ज़रूरी बता रहे हैं. रैली-वैली तो हइअय है. देश जब प्रचार के विभिन्न-विभिन्न रूप देख रहा है. तब तमाम संहिताओं के 'आचार' में फंफूद डालते हुए, पंतप्रधान का प्रचारटेनमेंट हो रहा है. ऐसी सफाई से कि शायद इलेक्शन कमीशन भी कन्फ्यूज है, टोके कहां पे और रोके कहां से.
ये हुआ इंट्रो. अब जानिए हुआ क्या. टीवी सीरियल्स होते हैं न? आज कल वहां प्रधानमंत्री का विज्ञापन चल रहा है. विज्ञापन भी ऐसा जो प्रचार कम महिमामंडन ज़्यादा लगे है. ट्विटर पर एक पैरोडी अकाउंट है, @VictimGames किसका है हमें नहीं पता, आप अपने विवेक से ओबेरॉय लीजिए. वहां कई वीडियोज डालकर दिखाया गया कि कैसे सीरियल्स के नाम पर प्रचार चल रहा है. जो उदाहरण सामने आए वो ये हैं.
"भाबीजी घर पर हैं' एक सीरियल है. हां, वही जो And TV पर आता है. (इसके आगे 'सही पकड़े हैं' लिखना है?) उसका 4 अप्रैल का विज्ञापन ( Sorry एपिसोड) देखिए. 18 मिनट 21 सेकेण्ड पर ये सीन नज़र आता है. मनमोहन तिवारी अपनी पत्नी अंगूरी से बात कर रहे हैं. कोफ्ते खाते हुए चूल्हे के खाने की तारीफ़ करते हैं. पत्नी का प्रोपैगैंडा आता है. "हमरी भारत सरकार एक ठो उज्ज्वला योजना शुरू की है, जिसके तहत न , 5 करोड़ लोगों के घरों तक LPG कनेक्शन पहुंचने का वादा किए हैं." "ई योजना के तहत एक लाख लोगों को रोज़गार भी मिलेगा." " आपको पता है, अब कछु भी नामुमकिन नाही है, सब कुछ मुमकिन है. और ई सब मुमकिन वो किए हैं, जो हम सबके बीच से ही निकल कर आए हैं." Rohan Desai नाम के यूजर ने इसमें एक चीज और जोड़ी. 2 अप्रैल का 'तुझसे है राब्ता' सीरियल की एक क्लिप दिखाई.


इस सीरियल के 2 अप्रैल के एपिसोड में 1 मिनट 50 सेकेण्ड पर एक सीन आता है. कल्याणी का कैरेक्टर एक महिला के पास उछलते हुए पहुंचती है. पूछने पर बताती है.
"मुद्रा योजना के हिसाब से आपके छोटे बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए. भारत सरकार आपको 10 लाख तक का लोन देगी."
"देश भर में 15 करोड़ से भी ज़्यादा लोगों ये लोन मिला है, और उन्होंने अपनी ज़िन्दगी सुधार ली है. आप सुनकर हैरान हो जाएंगी कि इनमें से 70% औरतें हैं औरतें."
महिला का सवाल आता है. "क्या ये संभव है, पांच साल पहले ये किसी सपने से कम नहीं था." "हऊ साहब, नामुमकिन है अब मुमकिन"
पूरा सीरियल यहां 
 देखा जा सकता है. 

अगर आपने आंखों-देखी मक्खी निगलने की शपथ न ली हो तो साफ़ नज़र आता है कि ये एक पार्टी का प्रचार है. जो बहुत सोचे-समझे तरीके से टीवी पर चलाया जा रहा है. स्क्रिप्ट की मांग के हिसाब से एक बार तारीफ़ हो सकी ता, बार-बार और अलग-अलग शोज में एक ही पार्टी और नेता की तारीफ़ सीधा-सीधा प्रचार है.
ध्यान देने वाली बात ये है कि कलाकार वही लाइनें दोहरा रहे हैं. जो पार्टी अपने कैंपेन में इस्तेमाल करते हैं. बार-बार " सब कुछ मुमकिन है", "नामुमकिन है मुमकिन" जैसे डायलॉग "मोदी है तो मुमकिन है" वाले नारे को ज़हन में चस्पा करने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं.
कर्मठ, सुशील, ज्ञानी, अतुलनीय जैसे महिमामंडन करने वाले शब्दों के जरिये ये बताया जा रहा है कि मौजूदा प्रधानमंत्री का कोई विकल्प नहीं है.
कलाकार जब कहते हैं, पांच साल पहले ये किसी सपने से कम नहीं था. तब वो वही बात दोहराते हैं, जो प्रधानमंत्री अपनी किसी भी रैंडम रैली में बोलते सुनाई देते हैं. जब ये सब हो रहा है, तो जिन संस्थाओं का काम इस पर निगरानी रखना या रोकना है, वो कहां हैं? खुद चुनाव आयोग कहां है? टीवी पर खुलेआम एक पार्टी एक नेता का प्रचार हो रहा है, किसी को कुछ नज़र क्यों नहीं आ रहा है. या जान-बूझकर आंखे मूंद ली गई हैं?
शेष जाते-जाते एक तथ्य ये जान लीजिए कि इनमें से एक सीरियल 'भाबी जी घर पर हैं' And TV पर आता है. दूसरा वाला 'तुझसे है राब्ता'  Zee TV पर आता है. दोनों Zee Entertainment Enterprises से जुड़े हैं. जो कि Essel Group से जुड़ा है. जिसके मालिक सुभाष चंद्रा हैं, जो राज्यसभा सांसद हैं. बीजेपी के समर्थन से.

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