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मर चुके लोगों को भी मिल रहा आयुष्मान भारत योजना का फायदा? CAG को मिलीं बड़ी खामियां

एक नंबर से करीब साढ़े सात लाख लाभार्थी योजना से जुड़े.

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CAG ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में योजना में कई और खामियों का ज़िक्र किया. (फोटो- आजतक)

9999999999. 10 डिजिट का ये मोबाइल नंबर देखने में खासा वीआईपी लग रहा है. हो भी सकता है. लेकिन इस नंबर से जुड़ा एक खुलासा सामने आया है. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट में. बताया गया है कि नरेंद्र मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के तहत लगभग साढ़े 7 लाख लोग एक ही फोन नंबर से जुड़े हैं.

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CAG ने अपनी जांच में योजना में अनियमितताओं की बात कही है. सोमवार, 7 अगस्त को लोकसभा में CAG ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट पेश की. इसमें कहा गया कि PMJAY के 7 लाख 49 हजार 820 लाभार्थी एक ही मोबाइल नंबर के जरिये योजना से जुड़े हैं. CAG ने ये भी बताया कि ये मोबाइल नंबर ‘अमान्य’ है. रिपोर्ट में कहा गया,

“BIS (लाभार्थी पहचान प्रणाली) के डेटाबेस की जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में लाभार्थी एक ही मान्य मोबाइल नंबर से इस योजना में रजिस्टर्ड थे. कुल मिलाकर 1119 से 7 लाख 49 हजार 820 लाभार्थी BIS डेटाबेस में एक ही मोबाइल नंबर से जुड़े हुए थे.”

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इतना ही नहीं, रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि एक लाख 39 हजार 300 लाभार्थी इस योजना में ‘8888888888’ नंबर से जुड़े हुए हैं. वहीं 96 हजार 46 लाभार्थी ‘9000000000’ मोबाइल नंबर से योजना में रजिस्टर्ड हैं. रिपोर्ट में ये भी खुलासा किया गया कि लगभग 10 हजार से 50 हजार लाभार्थी कम से कम 20 मोबाइल नंबरों से योजना का हिस्सा बने हुए हैं.

NHA ने खुलासों से सहमति जताई

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक CAG की रिपोर्ट में किए गए खुलासों से नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) ने सहमति जताई है. NHA ने बताया कि BIS 2.0 सिस्टम आने के बाद मोबाइल नंबरों से जुड़े इस मुद्दे को हल कर लिया जाएगा. BIS 2.0 सिस्टम को इस तरह लागू किया जाएगा जिससे एक निश्चित संख्या से अधिक परिवार एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग न कर सकें. इससे रैंडम नंबर रजिस्टर कराने के प्रचलन पर रोक भी लेगगी.

रिपोर्ट में कहा गया है,

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“डेटाबेस में किसी भी लाभार्थी से संबंधित रिकॉर्ड खोजने के लिए मोबाइल नंबर का होना जरूरी है. इससे बिना आईडी के भी रजिस्ट्रेशन डेस्क से संपर्क किया जा सकता है. ई-कार्ड खो जाने की स्थिति में लाभार्थी की पहचान करना भी मुश्किल होता है. साथ ही एडमिशन से पहले और बाद की जानकारी से भी इनकार किया जा सकता है, जिससे उन्हें असुविधा हो सकती है."

मृत मरीजों को भी इलाज मिलता रहा

बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक ऑडिट में ये सामने आया कि TMS में 'मृत' बताए मरीज़ों को भी स्कीम का लाभ मिलता रहा. TMS के मुताबिक आयुष्मान भारत का लाभ ले रहे 88 हज़ार 760 मरीज़ इलाज के दौरान मरे. लेकिन इन्हीं मरीज़ों से जुड़े 2 लाख 14 हज़ार 923 नए दावों (क्लेम) का भुगतान कर दिया गया. इनमें से 3 हज़ार 903 दावों के बदले अस्पतालों को 6 करोड़ 97 लाख रुपए दिए गए.

CAG ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में योजना की कई और खामियों का ज़िक्र किया. जैसे अमान्य नाम, डुप्लीकेट हेल्थ ID, परिवार में सामान्य से ज्यादा लोग और असामान्य जन्मतिथि. कांग्रेस पार्टी ने इन खामियों और अनियमितताओं को 'भ्रष्टाचार' का मामला बताते हुए जांच करने की मांग की है.

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