"हमने फैसला किया है, इस देश ने फैसला किया है, देश के भविष्य के लिए- बाहर के दबाव को भूल जाओ- हम आर्म्ड मिलिशिया को ऑपरेट करने की इज़ाज़त नहीं देंगे."सालों तक आरोप झेलने के बाद पाकिस्तान अपनी छवि को सुधारना चाहती है कि पाकिस्तानी सिक्यूरिटी एजेंसियों ने भारत और अफगानिस्तान सहित पड़ोसी देशों के खिलाफ आतंक के जरिए शोषण किया है. इस्लामाबाद ने लगातार इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि पाकिस्तान किसी भी अन्य देश की तुलना में आतंकवादी हिंसा से सबसे ज्यादा पीड़ित है. हालिया दशकों में दस हज़ार से भी अधिक मौत और अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है. पीएम और पूर्व क्रिकेट स्टार ने 1980 के दशक में पड़ोसी अफगानिस्तान में सोवियत सेना से लड़ रहे अमेरिकी समर्थित मुजाहिदीन से बाहर निकलने वाले आतंकवादी समूहों को बढ़ावा देने और स्टीयरिंग में पाकिस्तान द्वारा निभाई गई भूमिका को साफ तरीके से माना है. उन्होंने कहा कि जिहाद खत्म होने के बाद हमें उन्हें कभी भी अस्तित्व में नहीं आने देना चाहिए था. उन्होंने उन सुझावों को खारिज़ कर दिया जिनमें कहा गया था कि वह पॉवरफुल मिलिट्री और पाकिस्तान की मुख्य खुफिया एजेंसी आईएसआई के विरोध का सामना कर सकते हैं. खान ने कहा- आज हमें पाकिस्तान सेना और इंटेलिजेंस सर्विसेज का पूरा सपोर्ट है. आइएसआई को अब उनकी क्या जरूरत है? ये समूह अफगान जिहाद के लिए बनाए गए थे.
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