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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा - हमारी सेनाओं ने आतंकवादियों को पैदा किया

साथ में पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़े फायदे की बात भी कह दी.

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फोटो - thelallantop
इमरान खान. पाकिस्तान के वज़ीर-ए-आज़म. मने प्रधानमंत्री. 10 अप्रैल, 2019 को विदेशी पत्रकारों से मुखातिब थे. कुछ स्वीकारोक्ति वाले मूड में थे, कुछ परिवर्तन के मूड में थे. वैसे 'मूड' में थे या सिर्फ ये शब्द उनके 'मुंह' भर में थे, ये कहना नामुमकिन है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट मुताबिक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि भारत के साथ गतिरोध को देखते हुए आर्म्ड मिलिटेंट समूहों पर अंकुश लगाने के लिए पाकिस्तान की ओर से परमाणु संपन्न पड़ोसियों को युद्ध से दूर ले जाने की जरूरत है. बढ़ती आर्थिक चुनौतियों को पूरा करने के लिए और क्षेत्र की स्थिरता के लिए तत्काल कोशिश की जानी चाहिए. फाइनेंशियल क्राइसिस और मिलिटेंट समूहों पर कारवाई करने को लेकर पाकिस्तान पर भारी दबाव है ताकि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (फाटा), ग्लोबल मनी लौंडरिंग और टेरर फाइनेंस वाचडॉग के प्रतिबंधों से बचा जा सके. इमरान खान ने कहा है कि पाकिस्तान अपने हितों को ध्यान में रखकर काम कर रहा था. विदेशी पत्रकारों से बात करते हुए इमरान खान ने बताया कि- सभी जानते हैं कि पाकिस्तान में जो हो रहा है वह पहले कभी नहीं हुआ है. पूरे पाकिस्तान से करीब तीस हजार मदरसों को सरकार अपने कंट्रोल में ले रही है. हजारों पूर्व मिलिटेंट को रिहैबिलिटेट किया जा रहा है.
"हमने फैसला किया है, इस देश ने फैसला किया है, देश के भविष्य के लिए- बाहर के दबाव को भूल जाओ- हम आर्म्ड मिलिशिया को ऑपरेट करने की इज़ाज़त नहीं देंगे."
सालों तक आरोप झेलने के बाद पाकिस्तान अपनी छवि को सुधारना चाहती है कि पाकिस्तानी सिक्यूरिटी एजेंसियों ने भारत और अफगानिस्तान सहित पड़ोसी देशों के खिलाफ आतंक के जरिए शोषण किया है. इस्लामाबाद ने लगातार इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि पाकिस्तान किसी भी अन्य देश की तुलना में आतंकवादी हिंसा से सबसे ज्यादा पीड़ित है. हालिया दशकों में दस हज़ार से भी अधिक मौत और अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है. पीएम और पूर्व क्रिकेट स्टार ने 1980 के दशक में पड़ोसी अफगानिस्तान में सोवियत सेना से लड़ रहे अमेरिकी समर्थित मुजाहिदीन से बाहर निकलने वाले आतंकवादी समूहों को बढ़ावा देने और स्टीयरिंग में पाकिस्तान द्वारा निभाई गई भूमिका को साफ तरीके से माना है. उन्होंने कहा कि जिहाद खत्म होने के बाद हमें उन्हें कभी भी अस्तित्व में नहीं आने देना चाहिए था. उन्होंने उन सुझावों को खारिज़ कर दिया जिनमें कहा गया था कि वह पॉवरफुल मिलिट्री और पाकिस्तान की मुख्य खुफिया एजेंसी आईएसआई के विरोध का सामना कर सकते हैं. खान ने कहा- आज हमें पाकिस्तान सेना और इंटेलिजेंस सर्विसेज का पूरा सपोर्ट है. आइएसआई को अब उनकी क्या जरूरत है? ये समूह अफगान जिहाद के लिए बनाए गए थे.
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