The Lallantop

ईरान-अमेरिका की जंग में पाकिस्तान बुरा फंसा, सिर से हटे 'बवाल', इसलिए करवा रहा डील

Pakistan ने ही कथित तौर पर अमेरिका का पीस प्लान Iran को सौंपा, जिसे तेहरान ने रिजेक्ट कर दिया. पाकिस्तान के लिए यह रास्ता आसान नहीं है. खासकर तब जब ईरान ने पीछे हटने से इनकार कर दिया है. लेकिन पाकिस्तान ये डील करवाना क्यों चाहता है? इसके पीछे है सऊदी एंगल, जिसमें उसके लिए आगे कुंआ और पीछे खाई जैसी स्थिति बन गई है.

Advertisement
post-main-image
पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश की है. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने का प्रयास किया और कथित तौर पर अमेरिका का पीस प्लान ईरान को सौंपा, जिसे तेहरान ने अस्वीकार कर दिया है।
  • पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान के कड़े रुख के कारण पाकिस्तान को सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते के चलते युद्ध में फंसने का खतरा है।
  • पाकिस्तान मध्यस्थता की कोशिश करता रहा है ताकि युद्ध में शामिल होने से बचा जा सके, लेकिन इसकी सफलता भविष्य में स्पष्ट होगी और क्षेत्रीय तनाव पर प्रभाव पड़ेगा।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने ही कथित तौर पर अमेरिका का पीस प्लान ईरान को सौंपा, जिसे तेहरान ने रिजेक्ट कर दिया. पाकिस्तान के लिए यह रास्ता आसान नहीं है. खासकर तब जब ईरान ने पीछे हटने से इनकार कर दिया है. ऐसे में यह जंग अगर और बढ़ती है तो पाकिस्तान को भी इस लड़ाई में घसीटे जाने का खतरा है. वजह है- सऊदी अरब के साथ उसका रक्षा समझौता.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
पाकिस्तान क्या सोचकर चल रहा?

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र बीते कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल डिप्लोमेसी में लगे हुए हैं. पाकिस्तान के इसमें दो हित है. पहला- दुनिया में उसका कद थोड़ा ऊंचा हो जाएगा. ठीक वैसे ही जैसे 1972 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की चीन यात्रा के वक्त हुआ था. उस समय इस्लामाबाद ने वाशिंगटन और बीजिंग के बीच ‘पुल’ की भूमिका निभाई थी. दूसरा- वह युद्ध में घसीटे जाने से बच जाएगा.

ईरान का रुख इन दिनों और भी कड़ा हो गया है. वह भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ गारंटी, नुकसान की भरपाई और ‘होर्मुज स्ट्रेट’ पर कंट्रोल की मांग कर रहा है. इसलिए, अगर तेहरान पड़ोसी खाड़ी देश पर हमले जारी रखता है, तो सितंबर 2025 में हुआ सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान का आपसी रक्षा समझौता, इस्लामाबाद के लिए मुसीबत बन सकता है. इस समझौते के तहत दोनों देशों के लिए एक-दूसरे की मदद करना जरूरी है.

Advertisement

जैसे ही पश्चिम एशिया में चल रही जंग दूसरे हफ्ते में पहुंची और ईरान ने सऊदी अरब पर हमला किया, पाकिस्तान चौकन्ना हो गया. विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि उन्होंने ईरान को सऊदी अरब के साथ अपने समझौते की याद दिलाई है. यह भी कहा कि वे ईरान के साथ मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहे हैं. पाकिस्तान में सुरक्षा सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि इस्लामाबाद इस समझौते से बंधा हुआ है, लेकिन वह ईरान के साथ अपनी गुप्त बातचीत के जरिए इस संघर्ष में शामिल होने से बचने की कोशिश कर रहा है. लेकिन ये कोशिशें कितने दिन काम आएंगी, यह देखने वाली बात होगी.

वीडियो: ईरान के खर्ग आईलैंड पर कब्जे के लिए ट्रंप का प्लान तैयार?

Advertisement
Advertisement