दिल्ली के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में शामिल हुए छात्र को 5 लाख का नोटिस भेजने के मामले में एक सब-इंस्पेक्टर (SI) को सस्पेंड कर दिया गया है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रोटेस्ट में शामिल किसी भी छात्र पर कार्रवाई नहीं होगी. इसके बावजूद नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट यानी ACP ने छात्र को नोटिस थमा दिया. अब इस मामले में बड़े अधिकारी को बचाने के लिए SI पर गाज गिरा दी गई है.
CJP प्रदर्शन में शामिल छात्र को नोटिस देने पर SI सस्पेंड, UP पुलिस की कार्रवाई पर क्यों उठे सवाल?
CJP Protest में शामिल छात्र को 5 लाख का नोटिस भेजने के मामले में सब-इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है. आरोप है कि एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की तरफ से यह नोटिस जारी किया गया था. अब इस मामले में बड़े अधिकारी को बचाने के लिए SI पर गाज गिरा दी गई है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश डीजीपी हेडक्वार्टर ने गुरुवार, 10 सितंबर को बताया कि सब-इंस्पेक्टर शिवा पांडे को सस्पेंड कर दिया गया है. उन्होंने कथित तौर पर छात्र और SFI नेता अक्षत त्रिपाठी को सीजेपी प्रोटेस्ट में शामिल होने के लिए नोटिस भेजा था.
9 सितंबर को यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. इस पर अदालत ने नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (ACP) को जमकर फटकार लगाई. कोर्ट ने पूछा कि पहले ही साफ कर दिया था कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. ऐसे में किसी मजिस्ट्रेट की तरफ से इस तरह का नोटिस क्यों जारी किया गया. कोर्ट ने संबंधित अधिकारी से इस पर स्पष्टीकरण मांगा.
10 सितंबर को कोर्ट में स्पष्टीकरण दिया गया. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सुनवाई हो रही थी. सीनियर वकील पीवी दिनेश ने पहले कहा कि छात्र को नोटिस जिला मजिस्ट्रेट की तरफ से जारी किया गया था. हालांकि, उन्होंने तुरंत अपनी गलती सुधारते हुए कहा कि यह नोटिस एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की ओर से जारी किया गया था.
बाद में, यूपी डीजीपी ऑफिस ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि जिस ACP (एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट) ने छात्र को 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरने का नोटिस जारी किया था, उन्हें सस्पेंड नहीं किया गया है.
क्या है मामला?मामला गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है. उन्हें सीजेपी प्रदर्शन में छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काने और भीड़ जुटाने के आरोप में यह नोटिस भेजा गया था. 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की तरफ से यह नोटिस जारी किया गया. इस नोटिस में उनको छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपये का निजी बॉन्ड और इतनी ही रकम की दो जमानत देने को कहा गया था.
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यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 130 के तहत जारी किया गया. यह कार्रवाई ईकोटेक-1 थाने के एक सब-इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर की गई है. हालांकि बाद में नोटिस वापस ले लिया गया. पुलिस की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि अक्षत यूनिवर्सिटी के दूसरे छात्रों को सरकार विरोधी और भ्रामक बातें बताकर उन्हें सीजेपी प्रोटेस्ट में शामिल होने के लिए उकसा रहे थे.
अक्षत ने क्या बताया?पुलिस ने इसे शांति और कानून-व्यवस्था के लिए संभावित खतरा बताया था. हालांकि, अक्षत ने इन आरोपों को खारिज किया. उनका कहना था कि उन्होंने प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से हिस्सा लिया था. उन्होंने यह भी कहा कि उस समय यूनिवर्सिटी करीब तीन महीने से बंद थी, इसलिए उनके खिलाफ छात्रों को भड़काने का आरोप ही सवालों के घेरे में है.
वीडियो: सीजेपी प्रदर्शन में गए जीबीयू छात्र को 5 लाख का नोटिस, एसएफआई का आरोप सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन?












