टीवी सीरियल 'लापतागंज' देखा है. 'सब टीवी' चैनल पर आता है. उसमें एक किरदार है लल्लनजी! लल्लनजी एक सरकारी मुलाजिम हैं. उनका तकिया कलाम है, 'हमसे तो किसी ने कहा ही नहीं.' काम चाहें कोई भी हो, कैसा भी हो, लल्लनजी से जब तक कोई कहता नहीं है तब तक वह कुछ नहीं करते. यहां तक कि खाना-पीना, उठना-बैठना भी उनका किसी के कहे बिना नहीं होता. और जब सवाल करो तो जवाब होता है, ''हमसे तो किसी ने कहा ही नहीं.' ऐसा ही अब पीएम मोदी के लिए सुना जा रहा है. लोग उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल कर ले रहे हैं. बाद में जवाब आता है. 'हमसे तो किसी ने पूछा ही नहीं.'
पीएम की तस्वीरें: जवाब जानना है तो लापतागंज के 'लल्लनजी' का डायलॉग सुनो
ये कोई पहली बार नहीं है. तस्वीर छपती है, जवाब वही होता है.
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फोटो - thelallantop
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केवीआईसी के कैलेंडर और डायरी में महात्मा गांधी के चरखा चलाने वाली ऐतिहासिक तस्वीर का इस्तेमाल होता आया है. केवीआईसी के अफसरों का कहना है कि ये पहली बार नहीं है, जब कैलेंडर और डायरी में महात्मा गांधी की तस्वीर को नहीं लगाया गया है. पहले कम से कम पांच बार आम लोगों की तस्वीर का इस्तेमाल इनमें हो चुका है. केवीआईसी के ही एक बड़े अफसर का कहना है कि पीएम मोदी की तस्वीर को इसलिए लगाया गया ताकि खादी की डिमांड बढ़े. क्योंकि पीएम मोदी लोकप्रिय और खादी के भारी समर्थक हैं.पहले रिलायंस जियो ने पीएम मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल किया. सोशल मीडिया पर आलोचना हुई. और बाद में खबर भी आई कि बिना इजाज़त तस्वीर इस्तेमाल करने पर जियो पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. फिर पेटीएम के ऐड में पीएम मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल हुआ. सोशल मीडिया पर मजाक उड़ाया गया कि देश के पीएम अब प्राइवेट कंपनी के प्रचार में लगे हैं. अब चरखा चलाते हुए तस्वीर. इस बार मामला सरकारी था. लेकिन महात्मा गांधी को हटाकर पीएम मोदी का तस्वीर में होना आलोचना की वजह बन गया. सोशल मीडिया पर मज़ाक भी उड़ाया गया. लेकिन खबर इस बार भी पहले की तरह ये ही है कि बिना इजाज़त तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है. और इस बात से पीएमओ नाराज़ है. सवाल ये है कि अगर बार-बार बिना इजाज़त तस्वीर इस्तेमाल हो रही है तो कोई कड़ा एक्शन क्यों नहीं ले रहा है पीएमओ. पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) ने खादी और ग्रामोद्योग कमीशन (केवीआईसी) के कैलेंडर और डायरी में पीएम नरेंद्र मोदी की बिना इजाज़त फोटो का इस्तेमाल करने पर माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) से जवाब मांगा है. इकॉनोमिक टाइम्स के मुताबिक इस मामले से वाकिफ सरकारी अफसर का कहना है कि पीएम इससे नाराज हैं. प्रधानमंत्री को खुश करने या उनके करीब दिखने के लिए ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि टेलीकॉम कंपनी जियो और मोबाइल वॉलेट सर्विस फर्म पेटीएम के ऐड में भी प्रधानमंत्री की फोटो का बिना इजाजत इस्तेमाल हुआ था. अफसर का कहना है कि पिछले साल अक्टूबर में पीएम मोदी ने लुधियाना में महिला बुनकरों को 500 चरखे बांटे थे. इसी वजह से कैलेंडर पर तस्वीर लगाने का फैसला किया गया. पीएम मोदी की इस तस्वीर को लेकर राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल समेत विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने केंद्र सरकार पर कटाक्ष किया. तस्वीर के इस्तेमाल पर पीएमओ के सवाल पूछे जाने से मन में सवाल आता है कि जब-जब सरकार किसी मुद्दे पर घिरती है. तो फैसला दूसरे पर टाल दिया जाता है. नोटबंदी के फैसले पर भी कभी खबर आई कि ये सरकार का फैसला है तो कभी खबर आई कि RBI का फैसला है. ऐसा तब हुआ जब लंबी कतारें लगीं और लोग परेशान हुए. फैसला किसका था, इसको लेकर इतना कंफ्यूजन क्रिएट हो गया कि पता नहीं फैसला किसका था. ऐसा ही अब तस्वीरों के मामले में हो रहा है. जियो पर जुर्माना लगाने की बात हुई, वो भी 500 रुपये की. बिना इजाजत प्रधानमंत्री की तस्वीर इस्तेमाल करने के लिए ये भी कोई जुर्माना होता. अब जहां तस्वीरें छपनी थीं, वहां तो छप गईं. सवालों का क्या, वो तो पूछे जाते हैं. और राजनीति में जवाब गोल-मोल ही होते हैं. यानी बिना इजाज़त का एक्सक्यूज़ देना, डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश है. इस तस्वीर की पूरी कथा यहां पढ़िए मोदी को अपने गोडसे भक्त समर्थकों पर यकीन है, इसलिए वे गांधी हो जाना चाहते हैं
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