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नेपाल बाढ़: अब तक 177 लोगों की मौत, 1500 से ज्यादा लापता, 200 भारतीय भी नहीं मिल रहे

Nepal में बाढ़ से 177 लोगों की मौत हो चुकी है. 200 भारतीयों समेत करीब 800 पर्यटक लापता हैं. सेना हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू कर रही है. यूपी-बिहार में हाई अलर्ट है. भारत ने नेपाल को 10 टन राहत सामाग्री भेजी है.

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नेपाल में आई बाढ़ के बाद सैकड़ों लोग लापता हैं. (फोटो: PTI)

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  • नेपाल में 26 अगस्त को तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में हिमस्खलन और भूकंप के बाद आई बाढ़ ने 177 लोगों की जान ले ली है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं।
  • बाढ़ का मुख्य कारण तिब्बत क्षेत्र में आए भूकंप के झटके और उसके बाद ग्लेशियर का टूटना है, जिससे मलबे के प्राकृतिक बांध का टूटना हुआ और बाढ़ आई।
  • भारत ने नेपाल को मानवीय सहायता के तहत 10 टन राहत सामग्री भेजी है और बिहार व उत्तर प्रदेश में अलर्ट जारी कर नदी स्तर पर नजर रखी जा रही है।

नेपाल में अचानक आई बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा 177 पहुंच गया है. सैकड़ों लोग लापता हैं. ताजा जानकारी के मुताबिक, करीब 800 नेपाली और विदेशी पर्यटक लापता हैं. इनमें से 200 भारतीय हैं. बिहार और उत्तर प्रदेश में नेपाल से सटे जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन के लिए सेना और पुलिस को तैनात किया गया है. फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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बुधवार, 26 अगस्त की सुबह तिब्बत सीमा की तरफ से भोटेकोशी नदी में बाढ़ आई थी. बाढ़ इतनी भयानक थी कि कई इमारतें पानी में बह गईं. 11 हाइड्रोपावर प्लांट डैमेज हो गए. 19 पुल और 40 किमी सड़कें खराब हो गईं. 431 MW बिजली का प्रोडक्शन सिस्टम से बाहर हो गया. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ में रासुवा से मलखु तक 20 से ज्यादा सस्पेंशन और मोटरेबल पुल बह गए. 25 से ज्यादा टेलीकम्युनिकेशन साइट पर असर पड़ा. 

बाढ़ की वजह क्या है?

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद (प्रतिनिधि सभा) को बताया कि इस बाढ़ की शुरुआती और मुख्य वजह तिब्बत क्षेत्र में आया भूकंप और उससे हुआ हिमस्खलन (Avalanche) है. विदेश मंत्री के मुताबिक, तिब्बत में सुबह 8:37 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए. इसके ठीक तीन मिनट बाद ही अचानक बाढ़ आने की खबरें मिलने लगीं. 

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उन्होंने बताया कि इससे साफ संकेत मिलता है कि भूकंप के तेज झटकों की वजह से ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर गिर गया. इसने ल्हेंडे खोला नदी के प्रवाह को अस्थायी रूप से रोक दिया था. इसके बाद मलबे से बना प्राकृतिक बांध अचानक टूट गया और पानी का भारी सैलाब भोटेकोशी नदी में आ गया.

हालांकि, अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने इसकी वजह कुछ और ही बताई है. USGS के मुताबिक, कोई अलग से भूकंप नहीं आया था, बल्कि इतनी ऊंचाई से बड़े ग्लेशियर और चट्टान के गिरने (ग्लेशियल कोलैप्स) की ताकत इतनी भयानक थी कि उससे खुद 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसे झटके दर्ज किए गए थे. ग्लेशियर का हिस्सा टूटने के बाद बर्फ और चट्टानों का यह सैलाब पहाड़ों से बेहद तेज रफ्तार में नीचे की तरफ बढ़ा. हालांकि अधिकारी अभी भी घटनाओं के सही क्रम की जांच कर रहे हैं. 

भारत ने भेजी मदद

भारत ने नेपाल की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की और उन्हें हर संभव मानवीय सहायता का भरोसा दिलाया. इसके बाद भारत ने 10 टन राहत सामग्री भेजी. इसमें अस्थायी शेल्टर, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाएं शामिल थीं. यह सामान भारतीय वायु सेना के C-130J एयरक्राफ्ट से काठमांडू पहुंचाया गया.

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बिहार और यूपी अलर्ट पर

नेपाल में आई बाढ़ की वजह से निचले इलाकों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है. बिहार में बाढ़ के संभावित खतरे की समीक्षा की जा रही है, क्योंकि गंडक नदी में बाढ़ का पानी घुस गया है. पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली के साथ-साथ सीतामढ़ी और शिवहर जैसे संवेदनशील जिलों को खास सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए. वहीं, उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर प्रशासन को गंडक-नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना के चलते हाई अलर्ट पर रखा गया है. 

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नेपाली अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार, 27 अगस्त को लगभग 100 भारतीयों का पता लगाया है. इससे कुछ घंटे पहले ही नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया था कि भीषण बाढ़ में करीब 300 भारतीय लापता हो गए थे. हालांकि, नेपाल सरकार या भारत की ओर से लापता भारतीयों की सही संख्या के बारे में कोई पुष्टि नहीं की गई है.

वीडियो: दुनियादारी: नेपाल की बाढ़ का असर यूपी-बिहार में भी दिखेगा?

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