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इजरायली डायरेक्टर ने गाजा नरसंहार पर फिल्म बनाई, वेनिस में 25 मिनट तक तालियां बजीं

Gaza में नागरिकों की मौत पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'Naza' ने Venice Film Festival में इतिहास रच दिया. प्रीमियर के बाद फिल्म को 25 मिनट तक स्टैंडिंग ओवेशन मिला. इस डॉक्यूमेंट्री को इजरायली फिल्ममेकर्स ने बनाया है.

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83वां वेनिस फिल्म फेस्टिवल इटली के वेनिस लिडो में आयोजित हो रहा है. (फोटो: La Biennale di Venezia)

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  • डॉक्यूमेंट्री 'नाज़ा' ने वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इजरायली फिल्ममेकर्स युवल अब्राहम और रेचल जोर द्वारा गाजा में फिलिस्तीनी नागरिकों की मौतों पर बने इंटरव्यू पर आधारित 80 मिनट की फिल्म का प्रीमियर किया।
  • डॉक्यूमेंट्री की पृष्ठभूमि में गाजा में हुई सुनियोजित हत्याओं के बारे में इजरायली सेना के 24 इंटेलिजेंस अफसरों और सैनिकों के गुप्त इंटरव्यू शामिल हैं, जिन्हें तीन साल तक तेल अवीव में छुपाकर रिकॉर्ड किया गया था।
  • फिल्म को 25 मिनट तक स्टैंडिंग ओवेशन मिला और यह फेस्टिवल के शीर्ष पुरस्कार गोल्डन लॉयन की प्रबल दावेदार है, जिसके परिणामों का घोषणा 12 सितंबर को की जाएगी।

गाजा में फिलिस्तीनी नागरिकों के सामूहिक नरसंहार पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘नाज़ा’ (Naza) ने वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इतिहास रच दिया है. फिल्म के प्रीमियर के बाद वहां मौजूद लोगों ने 25 मिनट तक खड़े होकर तालियां बजाईं. इसे इजरायली फिल्ममेकर्स युवल अब्राहम और रेचल जोर ने बनाया है. यह डॉक्यूमेंट्री इजरायली सेना के उन खुफिया अधिकारियों और सैनिकों के इंटरव्यू पर आधारित है, जिन्होंने गाजा में नागरिकों की मौतों पर खुलकर बात की है.

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25 मिनट तक स्टैंडिंग ओवेशन

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 10 सितंबर को ‘नाज़ा’ को प्रीमियर में 25 मिनट तक ‘स्टैंडिंग ओवेशन’ मिला. स्क्रीनिंग के बाद दर्शकों ने डायरेक्टर जोड़ी युवल अब्राहम और रेचल जोर के लिए लगातार तालियां बजाईं. इसने 'द वॉइस ऑफ हिंद रजब' का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिसे पिछले साल 23 मिनट तक तालियां मिली थीं. यह एक डॉक्यू-ड्रामा थी जिसमें इजरायली सेना द्वारा पांच साल की फिलीस्तीनी लड़की की हत्या के बारे में बताया गया था. इसने दूसरा प्राइज जीता था.

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'नाज़ा' इस साल के फेस्टिवल में मुकाबले में शामिल एकमात्र डॉक्यूमेंट्री है. यह फेस्टिवल के शीर्ष पुरस्कार ‘गोल्डन लॉयन’ की प्रबल दावेदार मानी जा रही है. यह फेस्टिवल 12 सितंबर को खत्म हो रहा है. इसी दिन विनर्स का ऐलान किया जाएगा.

किसने बनाई है डॉक्यूमेंट्री?

80 मिनट की डॉक्यूमेंट्री ‘नाज़ा’ को इजरायली फिल्ममेकर्स युवल अब्राहम और रेचल जोर ने डायरेक्ट किया है. उन्होंने फिलिस्तीनी को-डायरेक्टर बासेल अद्रा और हमदान बल्लाल के साथ मिलकर 'नो अदर लैंड' नाम की डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जिसके लिए उन्हें 2025 में ऑस्कर मिला था. इस फिल्म को ब्रिटेन के जिम विल्सन ने 'द गार्डियन' के साथ मिलकर प्रोड्यूस किया है. इसके एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर जोनाथन ग्लेजर थे. यही टीम ‘द जोन ऑफ इंटरेस्ट’ के पीछे भी थी, जिसने 2024 में बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म का ऑस्कर जीता था.

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नाज़ा डॉक्यूमेंट्री में क्या है?

‘नाज़ा’ डॉक्यूमेंट्री में इजरायली सेना के 24 इंटेलिजेंस अफसर और सैनिकों ने गाजा जंग के दौरान फिलिस्तीनी नागरिकों की सुनियोजित हत्याओं के बारे में जानकारी दी है. इसकी शूटिंग तेल अवीव की छतों पर तीन साल तक गुपचुप तरीके से की गई थी और इसमें शामिल लोगों की पहचान छिपाई गई है. उनकी आवाज और शक्ल-सूरत को डिजिटल रूप से बदला गया है.

‘नाज़ा’ उन रिपोर्टों पर भी आधारित है जो 2023 और 2025 के बीच इजरायली-फिलिस्तीनी '972 मैगजीन', हिब्रू-भाषा के आउटलेट 'लोकल कॉल' और 'द गार्डियन' में छपी थीं. 

‘नाज़ा’ का मतलब क्या है?

फिल्म का टाइटल हिब्रू इंटेलिजेंस का एक कोड-वर्ड है. इजरायली सेना जब गाजा में किसी जगह या घर पर एयरस्ट्राइक करने की प्लान बनाती है, तो वह पहले से ही यह हिसाब लगा लेती है कि इस हमले में कितने आम नागरिक (जो आतंकवादी नहीं हैं) मारे जा सकते हैं. सैन्य भाषा में इसे ‘कोलेटरल डैमेज’ (अतिरिक्त नुकसान) कहा जाता है. हिब्रू भाषा के मूल शब्द 'नेजेक अगावी' से यह शॉर्ट-फॉर्म 'नाज़ा' बना है, जिसका मतलब होता है- ‘संभावित नुकसान’.

AI के इस्तेमाल से की हत्या

इंटरव्यू देने वाले लोगों ने ‘लैवेंडर’ नाम के AI-बेस्ड सिस्टम के बारे में बताया. यह इजरायली सेना का एक कंप्यूटर प्रोग्राम (AI) है, जो गाजा के लोगों के फोन कॉल, मैसेज और लोकेशन पर नजर रखकर यह तय करता था कि किसे मारना है. 

डॉक्यूमेंट्री में एक अधिकारी ने बताया कि यह प्रोसेस एक वीडियो गेम जैसा है, क्योंकि सब कुछ रिमोटली किया जाता है. उसने कहा कि यह ‘बहुत मजेदार’ है. ‘नाज़ा’ में सैन्य सूत्रों ने बताया कि उन्होंने अपनी आंखों और कानों से देखा-सुना कि जिन घरों को वे ‘अपराध से जुड़ा’ बता रहे थे, वे परिवारों से भरे हुए थे.

डॉयरेक्टर्स ने क्या कहा?

इजरायली न्यूजपेपर हारेत्ज के मुताबिक, फिल्म के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में युवल अब्राहम ने कहा, 

“फिल्म का मुख्य विषय हत्या का वह सिस्टम है जिसने गाजा में 70,000 से ज्यादा फिलिस्तीनियों की जान ली है. अंदाजा है कि असली संख्या इससे कहीं ज्यादा है. यह सिस्टम कैसे काम करता था और दुनिया ने इसे कैसे होने दिया. हम असल में यही दिखाना चाहते हैं.”

 युवल अब्राहम ने AFP न्यूज एजेंसी को बताया, 

"हम सैनिकों और अधिकारियों को यह बताने दे रहे हैं कि उन्होंने क्या किया. मकसद बहुत सीधा था. हम ज्यादा से ज्यादा विस्तार से यह जानना चाहते थे कि गाजा में लोगों को मारने का सिस्टम कैसा था और वह कैसे काम करता था." 

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युवल ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह फिल्म पश्चिमी सरकारों को इजरायल का समर्थन छोड़ने और प्रतिबंधों के जरिए दबाव डालने के लिए मजबूर करेगी. उन्होंने कहा,

“हममें से जो लोग इजरायल और फिलिस्तीन के अंदर बदलाव के लिए लड़ रहे हैं, उन्हें इसकी जरूरत है.”

'972 मैगजीन' में युवल और रेचल जोर ने लिखा कि फिल्म इस नतीजे पर पहुंचती है कि गाजा में फिलिस्तीनी नागरिकों की हत्या ‘हमास के खिलाफ युद्ध’ नहीं था, बल्कि यह पहले से सोची-समझी, नपी-तुली और जानबूझकर की गई कार्रवाई थी.

IDF ने आरोपों को खारिज किया

इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने ‘नाज़ा’ डॉक्यूमेंट्री में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया. एक बयान जारी कर IDF ने कहा,

"यह फिल्म ऐसे लोगों के गुमनाम बयानों पर आधारित है जिनकी पहचान की पुष्टि नहीं की जा सकती- जैसे कि क्या उन्होंने IDF में सेवा की थी या नहीं, किस पद पर काम किया था, या क्या वे उन मामलों में शामिल थे जिनके बारे में आरोप लगाए जा रहे हैं."

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अक्टूबर 2023 से गाजा पर इजरायल के हमले में लगभग 73,500 फिलिस्तीनी मारे गए हैं और 174,500 घायल हुए हैं.

वीडियो: दुनियादारी: गाजा के लोगों को दूसरे देश में भेजने का प्लान क्या है?

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