The Lallantop

पायदान पर झंडे से हमें दिक्कत है, तो कच्छे पर दूसरों के झंडे से क्यों नहीं?

सुषमा स्वराज की ऐमज़ॉन से नाराजगी के बाद ये सवाल उठता है.

Advertisement
post-main-image
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की ओर से मसूद अजहर को बैन कराने के लिए कूटनीतिक पहल की गई. पर कामयाबी नहींं मिल सकी. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
विदेश-मंत्री सुषमा स्वराज के गुस्से से सब डरते हैं. उनके ट्वीट कभी खाली नहीं जाते. एक ट्वीट पर दूतावास छुट्टी के दिन खुल जाते हैं, हफ्तों-महीनों के काम घंटों में हो जाते हैं. इसीलिए ऐमज़ॉन ने भी अपनी भलाई इसी में समझी कि मैडम जैसा कह रही हैं, कर लो. वरना क्या पता सही में लेने के देने पड़ जाएं.
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्विटर पर ऐमज़ॉन से साफ कह दिया था कि आदतें सुधार लो वरना भारतीय वीज़ा भूल जाओ. हिंदुस्तान में पैर नहीं रख पाओगे, ऊपर से जितने लोग यहां पहले से हैं, उन्हें भी उनके झोले समेत वापस जाना पड़ेगा.

क्यों नाराज़ थीं सुषमा?

ट्विटर सक्रीनशॉट
ट्विटर स्क्रीनशॉट

अतुल भोबे नाम के एक शख्स ने सुषमा स्वराज को ट्विटर पर टैग कर के एक तस्वीर डाली थी. उसमें ऐमज़ॉन कैनेडा के पेज पर ऐसी डोरमैट्स मिल रही थीं, जिन पर भारत का झंडा बना हुआ है. अतुल ने सुषमा से इसके खिलाफ एक्शन लेने को कहा था.
swaraj complaint
ट्विटर स्क्रीनशॉट

सुषमा ने फटाक से एक्शन लिया और ट्वीट कर के कैनेडा में भारत के उच्चायोग (हाई कमिशन) को तुरंत ऐमज़ॉन के सीनियर अधिकारियों के सामने ये मामला उठाने को कहा. सुषमा ने ऐमज़ॉन से बिना शर्त माफी मांगने को कहा और ये भी कि 'भारतीय झंडे का अपमान करने वाले' सभी प्रॉडक्टस को साइट से हटाया जाए. वरना वो चुन-चुन कर ऐमज़ॉन वालों के वीज़ा कैंसल कर देंगी.
sushma1
ट्विटर स्क्रीनशॉट

sushma2
ट्विटर स्क्रीनशॉट

इस सब के बाद ऐमज़ॉन कैनेडा (amazon.ca) ने वो डोरमैट्स अपने पेज से हटा लीं. 'अनकंडिश्नल अपॉलजी' के बारे में फिलहाल खबर नहीं है. वैसे भारत वो अकेला देश नहीं था, जिसके झंडे के डिज़ाइन वाली डोरमैट्स ऐमज़ॉन कैनेडा पर बिक रही थीं. अमेरिका, ब्रिटेन, नॉर्वे और जमैका के साथ-साथ खुद कैनेडा का झंडा भी डोरमैट की शक्ल में साइट पर मौजूद है.
15978805_10210422551493510_1723619024_n

ये सही हुआ कि गलत?

इसके लिए कोइ 'थंब-रूल' नहीं हो सकता कि किस चीज़ से आहत हुआ जाए, किस से नहीं. और ये बात भी समझने वाली है कि किसी एक समाज में पूरी तरह नॉर्मल, पूरी तरह स्वीकार्य चीज़ किसी दूसरे समाज के लिए बिल्कुल 'टैबू' हो सकती है. इसलिए डोरमैट पर अपने देश का झंडा न देख सकने वालों को (और देख सकने वालों को भी) 'जज' करने से बचना चाहिए. 'कैनेडा में चलता होगा, यहां के हिसाब से गलत है' इस दलील को एक मौका देकर देख सकते हैं.
पिक्चर: amazon.in
पिक्चर: amazon.in

पर इतना ज़रूर कहा जाएगा कि अगर आपको अपने देश के झंडे के 'बेज़ा' इस्तेमाल पर ऐतराज़ है, तो फिर किसी भी देश के झंडे को डोरमैट (या कच्छा) बने देख आपको गलत ही लगना चाहिए. यहां आप सेलेक्टिव नहीं हो सकते. 'नमस्ते लंडन' का ये सीन आपको याद होगा:
https://www.youtube.com/watch?v=_8dZR6_6HME
मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि इस सीन को हम में से ज़्यादातर लोगों ने एंजॉय किया था. कहीं से कोई ऐतराज़ आया हो, ये याद नहीं. उलटे यूनियन जैक को 'डंडे' पर देख कर हमें खास खुशी हुई थी. इसके अलावा किसी भी मार्केट में जाकर देख लीजिए. अमेरिका का झंडा बनियान पर, यूनियन जैक कच्छे पर और ब्राज़ील का झंडा चप्पल पर छपा मिल जाएगा. और ये सब खूब बिकता है. क्योंकि 'कूल' लगता है.
इसलिए इस डोरमैट वाले वाकये के बाद ये सवाल ज़रूर पूछा जाएगा कि इस तरह के ऐतराज़ हमारे मूल्यों से आते हैं या उस नेश्नलिज़म (राष्ट्रवाद) से जो दबे पांव हमारे अंदर घर कर रहा है. सुषमा स्वराज ने शिकायत के बाद जो किया, भारत की विदेश मंत्री की हैसियत से किया. इसलिए उनकी राय, भारत सरकार की राय समझी जाएगी.

इस राय में आपकी राय शामिल है या नहीं, ये आपको सोचना चाहिए.

Advertisement


ये भी पढ़ें


सुषमा स्वराज से ट्रांसफर की सिफारिश मत करना, वरना..

डूब रहे जहाज से भारतीयों ने कहा - सुषमा मैम, बचा लो

Advertisement
Advertisement