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कानून वापसी की घोषणा, पर तुरंत वापस नहीं जाने वाले किसान

संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया कब तक जारी रहेगा आंदोलन.

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तीनों कृषि कानूनों की वापस लेने की घोषणा के बाद सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर इस तरह का नजारा देखने को मिलेगा.
केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया है. पीएम मोदी ने किसानों से घर लौटने की अपील की. लेकिन किसानों का कहना है कि आंदोलन खत्म नहीं होगा. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा,
आज मैं आपको, पूरे देश को ये बताने आया हूं कि हमने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है. इस महीने के अंत में शुरू होने जा रहे संसद सत्र में हम तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करेंगे. एमएसपी को और अधिक कारगर, प्रभावी बनाने के लिए एक कमिटी का गठन किया जाएगा. इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि होंगे. किसान, कृषि वैज्ञानिक और एक्सपर्ट होंगे.
हालांकि पीएम के ऐलान के बाद भी किसान आंदोलन तुरंत खत्म नहीं करेंगे. BKU नेता राकेश टिकैट ने कहा,
आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा, हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा. सरकार MSP के साथ-साथ किसानों के दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत करे.
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आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा, हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा । सरकार MSP के साथ-साथ किसानों के दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत करें : @Rakesh.Tikait #farmersprotest
- Rakesh Tikait (@Rakesh.Tikait) 19 Nov 2021
संयुक्त किसान मोर्चा ने तीनों कृषि कानून वापस होने की घोषणा के बाद बयान जारी किया है. इसमें कहा गया है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून 2020 में पहली बार अध्यादेश के रूप में लाए गए सभी तीन किसान-विरोधी, कॉर्पोरेट-समर्थक काले कानूनों को निरस्त करने के भारत सरकार के फैसले की घोषणा की है. उन्होंने गुरु नानक जयंती के अवसर पर यह घोषणा करने का निर्णय लिया. संयुक्त किसान मोर्चा इस निर्णय का स्वागत करता है. उचित संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से घोषणा के प्रभावी होने की प्रतीक्षा करेगा. अगर ऐसा होता है, तो यह भारत में एक वर्ष से चल रहे किसान आंदोलन की ऐतिहासिक जीत होगी. हालांकि, इस संघर्ष में करीब 700 किसान शहीद हुए हैं. लखीमपुर खीरी हत्याकांड समेत, इन टाली जा सकने वाली मौतों के लिए केंद्र सरकार की जिद जिम्मेदार है. संयुक्त किसान मोर्चा प्रधानमंत्री को यह भी याद दिलाना चाहता है कि किसानों का यह आंदोलन न केवल तीन काले कानूनों को निरस्त करने के लिए है, बल्कि सभी कृषि उत्पादों और सभी किसानों के लिए लाभकारी मूल्य की कानूनी गारंटी के लिए भी है. किसानों की यह अहम मांग अभी बाकी है. इसी तरह बिजली संशोधन विधेयक को भी वापस लिया जाना बाकि है. एसकेएम सभी घटनाक्रमों पर संज्ञान लेकर, जल्द ही अपनी बैठक करेगा और यदि कुछ हो तो आगे के निर्णयों की घोषणा करेगा. तीनों नए कृषि कानूनों को 17 सितंबर, 2020 को लोकसभा ने मंजूर किए थे. राष्ट्रपति ने तीनों कानूनों के प्रस्ताव पर 27 सिंतबर को दस्तखत किए थे. इसके बाद से ही किसान संगठनों ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया था. पिछले एक साल से किसान धरना दे रहे हैं. गौरतलब है कि तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल से दिल्ली-एनसीआर के चारों बार्डर शाहजहांपुर बॉर्डर, टीकरी, बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन चल रहा है.

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