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पहले मोदी जी की फ़िल्म रिलीज़ नहीं हो रही थी, अब ट्रेलर भी यूट्यूब से गायब हो गया

ये तो गजब हो गया भाया!

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विवेक ओबेरॉय स्टारर इस फिल्म को ओमंग कुमार ने डायरेक्ट किया है.
विवेक ओबेरॉय मोदी बने हैं. वो मोदी जो मोदी जैसा दिखता कतई नहीं है. लेकिन चूंकि फ़िल्म में ऐसा कह दिया गया है इसलिए उन्हें मोदी कहने के सिवा हमारे-आपके पास और कोई चारा नहीं है. खैर, अभी ख़बर ये आई है कि मोदी की बायोपिक, जिसकी रिलीज़ पर चुनाव आयोग ने रोक लगा दी थी, का ट्रेलर भी यूट्यूब से हटा लिया गया है. इस बारे में किसी ने भी आधिकारिक रूप से कुछ भी नहीं कहा हिया लेकिन संभावना यही है कि ऐसा चुनाव आयोग के चलते ही किया गया है. चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता के अंतर्गत किसी भी राजनीतिक व्यक्तित्व या समूह को प्रमोट करती हुई किसी भी तरीके की बायोग्राफ़ी जो कि चुनावों में किसी का पक्ष भारी कर रही हो, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में नहीं दिखाई जा सकती. इसमें थियेटर में दिखाई जाने वाली फ़िल्में/वीडियो शामिल होंगे. मोदी की बायोपिक के ट्रेलर में नरेंद्र मोदी का रोल निभाने वाले विवेक ओबेरॉय पाकिस्तान का हाथ काट देने जैसी और कई ऐसी बातें कहते हैं जो कि फ़िलहाल पॉपुलर कल्चर का हिस्सा बनी हुई हैं और मोदी के भाषणों, उनके कथनों में आती रही हैं. फ़िल्म के बारे में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा था कि वो फ़िल्म देखे और उसके बाद एक बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ये भेजे कि फ़िल्म को चुनावों के दौरान रिलीज़ किया जा सकता है या नहीं. इससे पहले फ़िल्म से जुड़े लोगों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि चूंकि इलेक्शन कमीशन ने बिना फ़िल्म देखे ही उस पर रोक लगा दी है इसलिए ये सही नहीं है और ऐसे में बिना किसी ग्राउंड के उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को किनारे रखा जा रहा है. ओमंग कुमार द्वारा डायरेक्ट की गई ये फ़िल्म मोदी की बायोपिक है और इसे 11 अप्रैल को रिलीज़ होना था. 11 अप्रैल को भारत में जनरल इलेक्शन का पहला दिन था. रिलीज़ से एक दिन पहले ही चुनाव आयोग ने इस पर रोक लगाई थी जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा था कि फ़िल्म से जुड़े लोगों की बात भी सुनी जानी चाहिए. विवेक ओबेरॉय लगातार ये कह रहे थे कि इस फ़िल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे मोदी की पब्लिसिटी होगी. वो ये भी कह रहे थे कि उनकी फ़िल्म रोकना मोदी के विरोधियों की साज़िश है और वो बेजा ही नुकसान उठा रहे हैं. 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के एक एक्टिविस्ट की PIL को ये कह कर रिजेक्ट कर दिया था कि उसे खुद नहीं मालूम है कि फ़िल्म के किस हिस्से में कैसा प्रपोगेंडा डाला गया है.

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