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GST का फायदा खत्म! खाने-पीने की चीज़ों से लेकर गाड़ियों तक के बढ़ने लगे दाम, समझें पूरा गेम

पिछले साल GST की नई दरें लागू हुई थीं और सरकार ने इसे जीएसटी बचत उत्सव का नाम दिया था. हालांकि, अब फिर से आम लोगों पर महंगाई की मार पड़नी शुरू हो गई है. खाने-पीने की चीजों से लेकर गाड़ियां और फोन तक सब महंगे हो गए हैं.

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पिछले साल के मुकाबले कुछ कंपनियों ने कारों के दाम भी बढ़ा दिए हैं (Courtesy: India Today)

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  • पिछले साल 22 सितंबर को नई जीएसटी दरें लागू की गईं जिसमें कई जरूरी वस्तुओं पर टैक्स दरें 12% या 18% से घटाकर 5% कर दी गईं जिससे उनके दाम में औसतन 10% की कमी आई।
  • जीएसटी दरों में कमी के बाद भी बढ़ती कमोडिटी कीमतों और इनपुट लागत के कारण खाने-पीने की चीजों, स्मार्टफोन और गाड़ियों की कीमतें फिर से पिछले साल के स्तर तक पहुंच गई हैं।
  • महंगाई बढ़ने के कारण कंपनियों ने कीमतें 6-7% बढ़ा दी हैं जिससे उपभोक्ताओं को जीएसटी बदलाव का लाभ सीमित हो गया है तथा त्योहारी मौसम में कीमतों में और वृद्धि की संभावना है।

पिछले साल 22 सितंबर को नई जीएसटी दरें लागू की थीं. उस समय आम लोगों की रोजाना के जरूरत के कई चीजों के दाम काफी घट गए थे. लेकिन करीब सालभर बाद इन चीजों के दाम फिर से पिछले साल के आसपास पहुंच गए हैं. इसकी वजह है कमोडिटी की बढ़ती कीमतें. आम लोगों पर महंगाई की मार पड़ रही है. खाने-पीने की चीजों से लेकर स्मार्टफोन और गाड़ियों की कीमतें तक बढ़ गई हैं. 

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टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक जीएसटी दरों में बदलाव के एक साल बाद कमोडिटी की ऊंची कीमतों की वजह से महंगाई बढ़ गई है. काफी हद तक GST दरों में कटौती वाला फायदा खत्म कर दिया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि इसकी वजह यह है कि खाद्य पदार्थों से लेकर उपभोक्ता वस्तुओं और ऑटोमोबाइल तक कई उत्पादों की कीमतें धीरे-धीरे बढ़ रही हैं. 

छोटी-बड़ी हर रेंज की गाड़ियां हो रही महंगी 

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) के मुताबिक, इस साल अगस्त के आखिर तक यानी जीएसटी में कटौती के 11 महीने बाद ऑटोमोबाइल कंपनियों की रिटेल बिक्री 2 करोड़ 90 लाख यूनिट तक पहुंच गई. यह पिछले साल की तुलना में 20% ज्यादा है. यात्री वाहनों के रजिस्ट्रेशन में 22% की वृद्धि हुई. दोपहिया वाहनों में 20%, कमर्शियल व्हीकल में 19% और ट्रैक्टरों में 23% की वृद्धि हुई है.

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लेकिन पिछले साल जीएसटी दरें घटने के बाद जितना टैक्स का फायदा मिलने लगा था वह कमोडिटी के दाम बढ़ने से कम होता दिख रहा है. उदाहरण के लिए महिंद्रा स्कॉर्पियो-N जेड 2 की कीमत 13.9 लाख रुपये से घटकर 13.2 लाख रुपये रह गई थी. लेकिन, ये कार 13 लाख 60 हजार की हो गई है. इस तरह से देखें तो इस कार के दाम पिछले एक साल में 40 हजार दाम बढ़ चुके हैं. छोटी-बड़ी हर रेंज की गाड़़ियों की कीमतों में इजाफा देखने को मिल रहा है.

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खाने-पीने की चीजों में भी छाई महंगाई 

वहीं, कई जरूरी वस्तुओं पर जीएसटी को 12% या 18% से घटाकर 5% कर दिया गया था . इसके चलते चीजों के दाम औसतन 10% घट गए थे. लेकिन कंपनियों ने रॉ मैटेरियल की बढ़ती कीमतों, ईरान युद्ध के चलते आई महंगाई का हवाला देते हुए कीमतें 6-7% बढ़ा दी हैं. 

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पारले प्रोडक्ट्स के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर मयंक शाह ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, "उपभोक्ताओं को अभी भी 2-3% का लाभ मिल रहा है." हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अग इनपुट लागत महंगी होती रही, तो कंपनियों को दिवाली के आसपास कीमतों में एक और दौर की वृद्धि करनी पड़ सकती है.

भारतीय वस्त्र निर्माता संघ के मुख्य सलाहकार राहुल मेहता ने कहा, "जीएसटी 2.0 के सुधारों या कटौती का कीमतों पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ा है. राहुल मेहता का अनुमान है कि इस त्योहारी मौसम में  कपड़ों की लागत में 8-10% की वृद्धि होगी. हालांकि, उपभोक्ता कीमतों में 5-7% की मामूली वृद्धि हो सकती है.  इसकी वजह ये है कि कपड़ा बनाने वाली कंपनियां , ब्रांड और खुदरा विक्रेता लागत का कुछ हिस्सा वहन करेंगे.''

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