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इस देश में डॉक्टरी मदद से 13 हजार लोगों ने जान दे दी, पूरी दुनिया में क्या बहस होने लगी?

कनाडा का मेडिकल असिस्टेंड इन डाइंग (MAID) कानून. इसे साल 2016 में मंजूरी दी गई थी. तब से 7 सालों में 40 हजार से ज्यादा लोगों की मौत इसके तहत दर्ज की गई है. ऐसे मामले बढ़ने के साथ ही इसे लेकर एक और बहस तेज हो गई है.

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कनाडा में मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग के तहत बढ़े मौत के मामले (सांकेतिक तस्वीर: आजतक)

कनाडा (Canada) दुनिया के कुछ उन देशों में से एक है, जहां कोई भी व्यक्ति अपनी जान देने के लिए कानूनी तौर पर मंजूरी ले सकता है. इसके तहत अपनी जान दे सकता है. जाहिर है, इसके कई नियम और शर्तें हैं. लेकिन अगर कोई तय शर्तों में आता है, तो उसे उसकी मौत के लिए बाकायदा मेडिकल मदद मुहैया कराई जा सकती है. ये प्रक्रिया Medical Assistance in Dying (MAID) के तहत कनाडा में वैध है. ये मदद उन लोगों के लिए है, जो गंभीर और लाइलाज बीमारी या विकलांगता से जूझ रहे हों और अपनी खराब होती जा रही मेडिकल कंडिशन के कारण जीना नहीं चाहते हों. 

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इस तरह से इच्छामृत्यु की मंजूरी खास परिस्थितियों में सभी क्राइटेरिया के पूरा होने पर ही दी जा सकती है. कनाडा में मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग (MAID) को जून 2016 में कानूनी मंजूरी दी गई थी. तब से हर साल लगातार MAID के तहत मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. अब तक 40 हजार से ज्यादा मौतें दर्ज की जा चुकी हैं. साल 2022 में सिर्फ एक साल में 13 हजार से अधिक लोगों ने MAID के तहत अपनी जान दी है. मौत का विकल्प चुनने के बढ़ते मामलों के साथ ही इस कानून को लेकर एक और बहस तेज हो गई है. बहस ये कि क्या मानसिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को भी इसकी पात्रता के दायरे में लाया जा सकता है या नहीं?

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इससे पहले कनाडा के Medical Assistance in Dying (MAID) कानून के बारे में कुछ बुनियादी बातें जान लीजिए.

कानूनी तौर पर मौत चुनने का अधिकार

बता दें कि कनाडा में पहले इच्छामृत्यु पर प्रतिबंध था. ये अपराध के दायरे में आता था. लेकिन साल 2015 में यहां के सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद इच्छामृत्यु की मंजूरी दिए जाने का रास्ता तैयार हुआ. 17 जून, 2016 को कनाडा की संसद में एक विधेयक पारित हुआ, जो कनाडा के वयस्कों को 'मरने के लिए मेडिकल मदद मांगने' की अनुमति देता है. इसके तहत वयस्कों को यानी 18 साल से अधिक उम्र की लोगों को मरने के लिए आवेदन करने और इसके लिए मेडिकल मदद की अनुमति दी गई. 

मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग (MAID) का विकल्प पहले उन लोगों के लिए दिया गया था, जिनके लिए मेडिकली तौर पर बहुत हद तक अनुमान हो कि मौजूदा स्थिति में व्यक्ति की मौत निकट है. बाद में, इसमें बदलाव कर उन लोगों को भी इसके दायरे में आने की अनुमति दी गई, जिनकी मौत का उचित पूर्वानुमान नहीं होता, लेकिन उनकी बीमारी या विकलांगता गंभीर होती है. 

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कनाडा में जब से  Medical Assistance in Dying की इजाज़त मिली है, तब से हर साल मेडिकल मदद से होने वाली मौतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. सात सालों में ऐसे 44 हजार 958 मामले दर्ज किए गए हैं. इसी साल अक्टूबर में मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग के तहत होने वाली मौतों पर चौथी वार्षिक रिपोर्ट आई. इसमें साल 2022 में मेडिकल मदद से हुई मौतों की जानकारी दी गई है. 

सालMAID के तहत दर्ज मौतें
20161,018
20172,838
20184,480
20195,661
20207,603
202110,064
202213,241
कुल44,958

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2022 में कनाडा में मेडिकल मदद से 13 हजार 241 लोगों की मौत हुई. ये उस साल कनाडा में होने वाली सभी मौतों का 4.1 फीसदी है. 2022 में 2021 की तुलना में 31.2% ज्यादा मामले सामने आए. इसमें सबसे ज्यादा 63 फीसदी मामले कैंसर के मरीजों के थे. इसके बाद 18.8 फीसदी मामले दिल से जुड़ी बीमारियों के रहे. 13.2 फीसदी इच्छामृत्यु के मामले सांस से जुड़ी दिक्कतों, 12.6 फीसदी मामले न्यूरोलॉजिकल कंडीशन और 14.9 फीसदी इच्छामृत्यु के मामले दूसरी दिक्कतों से जुड़े थे.

2022 में  MAID के लिए 16 हजार 104 अर्जियां दी गई थीं. साल 2021 के मुकाबले 26.5% ज्यादा अर्जियां. 16 हजार 104 अर्जियों में से 298 अर्जियां वापस ले ली गई थीं. 560 अर्जियां रद्द कर दी गई थीं, अर्जी देने वाले को इसके लिए अयोग्य समझा गया और 2 हजार 144 व्यक्तियों की MAID पाने से पहले मृत्यु हो गई थी. 

कनाडा में MAID किन्हें दी जा सकती है?

अब ये भी जान लीजिए कि कनाडा में स्वेच्छा से मरने के लिए मेडिकल मदद किन्हें मुहैया कराई जा सकती है. जैसा कि ऊपर भी बताया गया है कि ये मदद उन लोगों के लिए है, जो 'गंभीर और लाइलाज मेडिकल कंडिशन' से जूझ रहे हों. इसमें भी कुछ क्राइटेरिया हैं, जिन्हें देखा जाता है. जैसे, गंभीर और लाइलाज बीमारी या विकलांगता से जूझ रहे व्यक्ति की क्षमता में गिरावट हो रही हो और जिसे ठीक नहीं किया जा सकता हो. बीमारी या विकलांगता के कारण स्थायी शारीरिक या मनोवैज्ञानिक कष्ट होना, जिससे राहत नहीं मिल सकती हो. ये सारी चीजें होने पर ही किसी को MAID की मंजूरी मिल सकती है. 

कनाडा में MAID लेकर हालिया विवाद क्या है?

बता दें कि MAID की मंजूरी मिलने के लिए जिन ‘गंभीर और लाइलाज बीमारियों’ को कारण बताया जा सकता है, उनमें मानसिक बीमारियों को शामिल नहीं किया गया है. फिलहाल, मानसिक बीमारियों को  17 मार्च, 2024 तक के लिए MAID के दायरे से बाहर रखा गया है.  17 मार्च, 2024 के बाद इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है. और जैसे-जैसे ये तारीख नजदीक आ रही है, इस पर बहस तेज हो रही है.

कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह निर्धारित करना ‘संभव नहीं’ है कि मानसिक बीमारी का कोई विशेष मामला लाइलाज है या नहीं. साथ ही, ये भी चिंता जताई जा रही है कि मानसिक बीमारियों से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए इसकी मांग करने की अधिक संभावना है. ऐसे में MAID के तहत होने वाली मौतों में और इजाफा होता जाएगा, जो कि पहले से ही बढ़ रहा है.

यूं भी इच्छामृत्यु एक विवादास्पद विषय है. इसकी पैरवी करने वाले मानते हैं कि इंसान को 'गरिमा के साथ जीने' के साथ ही 'गरिमा के साथ मरने का भी अधिकार' है. इसमें व्यक्ति के चुनाव के अधिकार की दलील दी जाती है. किसी लाइलाज और गंभीर बीमारी से जूझ रहा व्यक्ति जो असहनीय पीड़ा से गुजर रहा हो, ऐसे में उसे ये तय करने का अधिकार है कि वो अपना जीवन समाप्त करना चाहता है या उसी कंडिशन में जीना चाहता है. ये भी तर्क ये दिया जाता है कि किसी असहनीय पीड़ा से जूझ रहे व्यक्ति को उस पीड़ा को समाप्त करने का विकल्प चुनने की अनुमति देना अधिक मानवीय है.

वहीं इच्छामृत्यु के बढ़ते मामलों को देखते हुए चिंता जताई जा रही है कि ये समाज में एक ट्रेंड बनता जा रहा है. लोगों के लिए मौत चुनने का ये एक नया तरीका बन गया है. ऐसा भी माना जाता है कि कानूनन इसकी मंजूरी मिलने से बुजुर्ग और कमजोर लोगों पर वित्तीय बोझ से चिंतित होकर अपने जीवन को समाप्त करने के लिए अधिक दबाव बन रहा है.

किन देशों में इच्छामृत्यु की इजाजत है?

कनाडा की तरह ही कई और देश भी हैं, जहां इच्छामृत्यु या इच्छामृत्यु के लिए इस तरह की मदद मुहैया कराना लीगल है. इसके लिए हर देश के अपने नियम तय हैं. स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड, बेल्जियम, कोलंबिया, लक्जमबर्ग, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, स्पेन, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया में इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता मिली है. अमेरिका के कई राज्यों में भी इसकी मंजूरी है. 

इच्छामृत्य की इजाजत देने वाले ज्यादातर देशों में इसकी मंजूरी उन्हीं लोगों को दी जा सकती है, जो लाइलाज जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हों. Psychiatric Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ बेल्जियम, नीदरलैंड और लक्ज़मबर्ग में बिना लाइलाज बीमारी वाले लोगों को भी इच्छामृत्यु की मंजूरी मिल सकती है. इसके लिए जरूरी शर्त ये है कि इच्छामृत्यु की मांग करने वाला मरीज की शारीरिक या मनोवैज्ञानिक पीड़ा असहनीय हो और उसका प्रभावी ढंग से इलाज नहीं किया जा सकता हो.

वहीं भारत में 'पैसिव यूथेनेसिया' की मंजूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में  ‘पैसिव यूथेनेसिया’ के पक्ष में फैसला सुनाया था. 'पैसिव यूथेनेसिया' का मतलब है किसी बीमार व्यक्ति का मेडिकल उपचार रोक देना. ये वो स्थिति है जब डॉक्टर किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज का मेडिकल उपचार बंद कर दें और उसे मरने दें. इसमें मरीज को लाइफ सपोर्ट मशीन्स से हटा देना, खाने की ट्यूब हटाना, किसी तरह का खास ऑपरेशन न करना और जरूरी दवाएं भी बंद कर देना शामिल है.

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