पिछले चुनाव से भी ज्यादा गरीब हो गए हैं सरकार त्रिपुरा में चुनाव होने वाले हैं. नामांकन दाखिल शुरू हो चुका है. माणिक सरकार ने धनपुर सीट से नामांकन भरा. नॉमिनेशन के वक्त नेताओं को अपनी निजी संपत्ति का ब्योरा देना होता है. कौन सी गाड़ी है, कितने रुपये हैं, कितने की संपत्ति है. वगैरह वगैरह. माणिक सरकार ने जो हलफनामा दिया, उसी से जानकारी निकाल लाए हैं हम आपके लिए. इससे पहले जब 2013 में चुनाव हुए थे, तब उनका बैंक बैलेंस 9, 720 रुपया था. इस बार उससे भी घट गया. माणिक धनपुर सीट से चार बार चुनाव जीत चुके हैं. पहली बार 1998 में वो इस सीट से लड़े थे. जीते भी थे. इसी साल वो पहली बार मुख्यमंत्री बने थे.

29 जनवरी को माणिक सरकार ने धनपुर सीट से नामांकन भरा. वो पिछले चार बार से ये सीट जीतते आ रहे हैं.
एक मोबाइल तक नहीं है उनके पास त्रिपुरा में लेफ्ट की सरकार है. उसके मुखिया हैं माणिक. सीपीएम के हैं. पार्टी की पोलितब्यूरो में भी हैं वो. उनकी सादगी नई बात नहीं है. आप त्रिपुरा में रहते हों, तो माणिक अक्सर दिख जाएंगे. अपनी साइकिल पर आते-जाते. उनकी पत्नी को भी जब कहीं जाना होता है, तो रिक्शा लेती हैं. माणिक अपना पूरा वेतन पार्टी फंड में दान कर देते हैं. पार्टी उनको हर महीने 10,000 रुपये देती है. ताकि वो अपना गुजारा चला सकें. यहां तक कि उनके पास एक अदद मोबाइल भी नहीं है. एकदम जमीन का आदमी. इस जमाने में भी ईमेल अकाउंट नहीं है उनके पास. उनसे ज्यादा दौलत उनकी पत्नी पांचाली भट्टचार्ज के पास है. पांचाली सरकारी कर्मचारी थीं. रिटायर हो चुकी हैं. उनके पास 20,140 रुपये की नकदी है.

ये चुनाव न केवल माणिक सरकार, बल्कि पूरे लेफ्ट फ्रंट के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं.
बीजेपी पूरी ताकत झोंककर लड़ रही है माणिक सरकार के खिलाफ धनपुर सीट से लड़ रही हैं बीजेपी की प्रतिमा भौमिक. प्रतिमा त्रिपुरा बीजेपी की महासचिव हैं. बीजेपी इस चुनाव को जीतने के लिए पूरी मेहनत झोंक रही है. अमित शाह समेत पार्टी के बड़े नेता त्रिपुरा आ-जा रहे हैं. 60 सीटों वाली त्रिपुरा विधानसभा के लिए 18 फरवरी को चुनाव होना है. बीजेपी स्थानीय 'इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा' के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है. 51 सीटों पर बीजेपी लड़ रही है और बाकी की नौ सीटों पर उसकी पार्टनर पार्टी.

बीजेपी माणिक सरकार को हराने में पूरी ताकत झोंक रही है.
लेफ्ट के लिए ये मुकाबला बहुत अहम है त्रिपुरा में लेफ्ट फ्रंट काफी मजबूत स्थिति में रहा है. 1978 में पहली बार यहां उसकी सरकार बनी. अगला चुनाव भी उसने जीता. 1978 से 1988 तक सत्ता में रहने के बाद उसके हाथ से सरकार निकल गई. फिर 1993 में दोबारा उसे जीत मिली. 1998 में माणिक सरकार मुख्यमंत्री बने. चार बार मुख्यमंत्री का कार्यकाल पूरा किया. अगर माणिक सरकार इस बार भी अपनी पार्टी को जीत दिला देते हैं, तो पांचवी बार मुख्यमंत्री बनेंगे. और लेफ्ट, वो लगातार छठी बार सरकार बनाएगी यहां. लेकिन अगर त्रिपुरा उनके हाथ से निकल जाता है, तो ये बीजेपी के लिए बहुत बड़ी जीत होगी.
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