श्रीनगर एयरपोर्ट के करीब ही BSF का हमहमा कैम्प है. कैम्प के आस-पास के दुकानदारों का कहना है कि उन्हें कैम्प से बाहर आने वाला राशन बाज़ार के मुकाबले आधे दाम में मिल जाता है. एक ठेकेदार ने यही बात पेट्रोल-डीज़ल को लेकर कही. एक फर्नीचर डीलर ने यहां तक कहा कि BSF के अफसर जब अपने ऑफिस के लिए फर्नीचर खरीदते हैं तो इतना कमीशन खाते हैं, जितना बेचने वाले का मार्जिन भी नहीं होता. BSF में 'ई-टेंडर' (ऑनलाइन टेंडर) नहीं होते. इसलिए जितना चाहे हेर-फेर की जा सकती है. कॉन्ट्रैक्टर कमीशन देकर घटिया माल भी बेच जाते हैं. कमोबेश यही हाल CRPF के भी बताए जाते हैं.लेकिन इस बात की पूरी सम्भावना है कि तेज बहादुर की बात पूरी तरह गलत न हो. आज के टाइम्स ऑफ़ इंडिया के हवाले से खबर है कि जम्मू-कश्मीर में पैरामिलिट्री कैम्प के आस-पास रहने वाले लोगों के लिए वहां के अफसरों से आधे दाम में राशन खरीदना आम बात है.
CRPF के IG रविदीप सिंह साही ने अपनी ओर से कह दिया है कि उनके यहां इस तरह की घटनाएं नहीं होतीं. लेकिन अगर ऐसा होता है, तो वो मामले को दिखवाएंगे. तेज प्रताप मामले में BSF ने भी जांच शुरू की है, लेकिन जिस जल्दबाज़ी में तेज प्रताप का रिकॉर्ड खंगाला गया है, उस से यही लगता है कि BSF की दिलचस्पी अपनी खामियों में कम है. इस मामले में BSF को अपनी जांच रिपोर्ट आज गृह मंत्रालय को सौंपनी है.एक और BSF जवान ने इस बात की तस्दीक की है, मगर वो सामने नहीं आना चाहते. क्यों? ये तेज बहादुर के किस्से से साफ़ है.
ये समझें कि तेज बहादुर 29वीं बटालियन का हिस्सा हैं और वीडियो बनाते वक़्त वो कैंप से दूर नियंत्रण रेखा (LOC) की तरफ तैनात थे, जहां हालात कैंप से अलग (और थोड़े दुश्वार) होते हैं. ताज़ा खुलासा श्रीनगर शहर में एक BSF कैंप के हालात बताता है. लेकिन उनके कहे और इस खुलासे में जितनी करीबी है, वो यही बताती है कि BSF में काम करने के तौर-तरीकों में बड़ी खामी है और तेज प्रताप के इलज़ाम कतई बेबुनियाद नहीं हैं.
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