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काजीरंगा नेशनल पार्क का ESZ 10 से 1 किमी हुआ तो एक सींग वाले गैंडों का क्या होगा?

सीएम सरमा के मुताबिक इस एरिया के डेवलेपेंट के लिए ऐसा करना जरूरी है. यहां स्टेडियम बनाना है. इस प्रस्ताव से चिंता क्यों बढ़ी है और अब असम सीएम ने इसको लेकर क्या कहा है, आइए एक-एक करके पूरी कहानी जानते हैं.

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काजीरंगा नेशनल पार्क एक सींग वाले Rhino का सबसे बड़ा ठिकाना है. फोटो- Adobe stock

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  • असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने काजीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) को 10 किलोमीटर से घटाकर 1 किलोमीटर करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने की बात कही है।
  • इको-सेंसिटिव ज़ोन को घटाने का कारण यह है कि वर्तमान 10 किलोमीटर की सीमा के कारण क्षेत्र में शहरों का विकास चुनौतीपूर्ण हो रहा है और इससे विकास कार्यों में बाधा आ रही है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने ESZ की सीमा 1 किलोमीटर निर्धारित की है, और असम सरकार ने इसके अनुसार इसे घटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके बाद विकास कार्यों और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की उम्मीद है।

कुछ दिन से काजीरंगा नेशनल पार्क से जुड़ी खबरें आपने देखी या पढ़ी होंगी. असम के इस नेशनल पार्क को लेकर काफी चर्चा हो रही है. बीती 8 अगस्त को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सर्मा ने कहा था कि उनकी सरकार काजीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) को 10 किलोमीटर से घटाकर 1 किमी करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजनेवाली है.

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सीएम सरमा के मुताबिक इस एरिया के डेवलेपेंट के लिए ऐसा करना जरूरी है. यहां स्टेडियम बनाना है. इस प्रस्ताव से चिंता क्यों बढ़ी है और अब असम सीएम ने इसको लेकर क्या कहा है, आइए एक-एक करके पूरी कहानी जानते हैं.

असम के मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग तरह के रिएक्शन आए. लोगों ने चिंता जताई, क्योंकि ये एरिया एक सींग वाले गैंडे का सबसे बड़ा ठिकाना है. इस जानवर पर विलुप्त होने का खतरा है. अभी तक इस यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट के आसपास इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) की सीमा बाय डिफॉल्ट 10 किलोमीटर तय है. अगर ये कम हुई तो क्या होगा?

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ये ESZ जरूरी क्यों होता है?

इको-सेंसिटिव ज़ोन संरक्षित जंगल और Wildlife areas के आसपास का क्षेत्र होता है. यहां किसी भी तरह का डेवलपमेंट करने को लेकर कुछ नियम होते हैं ताकि इन कामों से जंगल, जानवरों और उनके प्राकृतिक ठिकानों को नुकसान न पहुंचे. समझते हैं कि अगर ESZ कम होता है तो क्या होगा.

- काजीरंगा को लेकर सबसे बड़ी चिंता ये है कि इसके जानवर सिर्फ पार्क के अंदर नहीं रहते, बल्कि बाढ़ आने पर Rhino, हाथी और हिरण जान बचाने के लिए कार्बी आंगलोंग की पहाड़ियों की तरफ चले जाते हैं.
- काजीरंगा और कार्बी आंगलोंग के बीच ऐसे कई रास्ते हैं, जिनसे जानवरों की आवाजाही होती है.
- अगर ESZ कम हुआ तो पार्क के करीब Construction बढ़ेगा, इससे जानवरों के ये रास्ते प्रभावित होंगे.
- अगर जानवर बाहर निकले तो रास्ते में एक्सीडेंट वगैरा का खतरा होगा और अगर पार्क में रहे तो बाढ़ की चपेट में आने का खतरा.
- साथ ही डेवलपमेंट से घास के मैदान और जानवरों के प्राकृतिक ठिकाने भी कम होंगे, और इससे जानवरों की संख्या भी घट जाएगी.

काजीरंगा कितना जरूरी है?

ये एक सींग वाले Rhino का सबसे बड़ा ठिकाना है. यहां दुनिया के 70% से ज्यादा एक सींग वाले गैंडे पाए जाते हैं. मार्च 2022 की गिनती में काजीरंगा में 2,613 एक सींग वाले गैंडे दर्ज किए गए थे. ये इलाका हाथियों के लिए भी बहुत अहम है. 2024 की गिनती में काजीरंगा नेशनल पार्क में 1,183 हाथी मिले थे. काजीरंगा से बाहर भी जानवरों की आवाजाही होती रहती है.

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Kaziranga national park
साल 2024 में काजीरंगा नेशनल पार्क में 1,183 हाथी मिले थे.
असम सीएम ने अब क्या कहा?

हालांकि इन सब चिंताओं के बीच असम के मुख्यमंत्री हिंमता बिस्वा सरमा ने 12 अगस्त को कहा कि ESZ को घटाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक ही लिया जाएगा. हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा,

“सुप्रीम कोर्ट ने खुद कहा था कि ESZ की सीमा 1 किलोमीटर होगी. लेकिन जब तक राज्य सरकार अपने स्तर पर ESZ को नोटिफाई नहीं करती, तब तक इसकी सीमा 10 किलोमीटर मानी जाएगी. जैसे ही राज्य सरकार ESZ को सही तरीके से नोटिफाई कर देगी, इसकी सीमा घटकर 1 किलोमीटर हो जाएगी. यही सुप्रीम कोर्ट ने भी तय किया था.”

उन्होंने आगे कहा, 

“अगर काजीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व के आसपास 10 किलोमीटर की सीमा रखनी पड़ी, तो कालियाबोर, डोबोका, जाखालाबंधा और बोकाखात जैसे शहरों का अस्तित्व ही मुश्किल में पड़ जाएगा. सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस में ESZ की सीमा 1 किलोमीटर बताई गई है, हालांकि हालात के हिसाब से इसे 3 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है. दुनिया में कोई भी ऐसा वन्यजीव अभयारण्य नहीं है, जिसके चारों तरफ 10 किलोमीटर का ESZ हो.”

आपको बता दें कि, जून 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि संरक्षित जंगलों, नेशनल पार्क और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास कम से कम 1 किलोमीटर का ESZ होना चाहिए. लेकिन अप्रैल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश में कुछ बदलाव किए, क्योंकि राज्यों और केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट को जानकारी दी गई थी कि हर जगह ये आदेश पारित करना मुमकिन नहीं है. हर जगह एक जैसी 1 किलोमीटर की सीमा लागू करने में दिक्कत आ सकती है. इससे इंसानों और जानवरों के बीच टकराव बढ़ सकता है और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो सकती है. उस वक्त के आदेश में कोर्ट ने ये भी साफ किया था कि संरक्षित इलाकों की सीमा से 1 किलोमीटर के दायरे में खनन की इजाजत नहीं होगी. 

वीडियो: सीएम हिमंता बिस्वा शर्मा और सद्गुरु ने काजीरंगा नेशनल पार्क का कौन सा नियम तोड़ा?

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