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DJ की तेज आवाज से बच्ची की मौत! अब HC ने अधिकारियों से पूछा- 'ध्वनि प्रदूषण पर क्या किया?'

Allahabad high court: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में जब एक स्कूल के बाहर से एक जुलूस गुज़र रहा था, तब एक लड़की अपनी क्लास में गिर पड़ी. बाद में उसकी मौत हो गई. अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लिया है.

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यूपी के बलरामपुर जिले में एक स्कूली बच्ची की DJ की तेज आवाज़ की वजह से मौत हो गई. (courtesy: ITG)

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  • इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बलरामपुर की क्लास-2 की बच्ची की अचानक मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जवाबदेही तय करने हेतु सुनवाई शुरू की है।
  • मामला उस समय सामने आया जब 22 सितंबर को स्कूल के बाहर तेज आवाज़ वाले जुलूस के कारण बच्ची गिर पड़ी और उसकी मौत हो गई, जिससे नॉइज़ पॉल्यूशन की गंभीरता पर सवाल उठे।
  • कोर्ट ने संबंधित विभागों को पक्षकार बनाया है और अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को नियत करते हुए संबंधित अधिकारियों से कानूनी प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में एक क्लास-2 की लड़की की स्कूल में अचानक मौत हो गई. पिछले महीने 22 सितंबर को स्कूल के बाहर एक जुलूस निकाला गया था. जुलूस में DJ पर बहुत तेज गाना चल रहा था. स्कूल और परिवार का आरोप है कि इसी तेज आवाज़ की वजह से बच्ची की मौत हुई है. अब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में हादसे की जवाबदेही तय करने के लिए स्वतः संज्ञान लिया है. 

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22 सितंबर को जब डिवाइन पब्लिक स्कूल के बाहर से एक जुलूस गुज़र रहा था, तब बच्ची अपनी क्लास में गिर पड़ी. बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां पहुंचते ही उसे मृत घोषित कर दिया गया.

स्कूल प्रशासन ने FIR दर्ज कराई. स्कूल का आरोप है कि तेज़ आवाज़ में DJ का संगीत बजने की वजह से बच्ची की मौत हुई. DJ के मालिक और ऑपरेटर को गिरफ़्तार कर लिया गया. स्थानीय पुलिस चौकी के इंचार्ज को सस्पेंड कर दिया गया है. 

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पूरा मामला समझते हैं

लाइव लॉ के मुताबिक, हाईकोर्ट में पहले से पेंडिंग पड़ी नॉइज़ पॉल्यूशन से जुडी कई याचिकाओं की सुनवाई चल रही थी. इसी दौरान ये मामला सामने आया. हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए आदेश दिया कि इस मामले में अलग से PIL दायर किया जाए. हालांकि, हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने साफ़ किया कि बच्ची की मौत की वजह सामने नहीं आई है. 

लेकिन, जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की पीठ ने कहा, 

‘लाउडस्पीकर की आवाज़ पूरी हाई पिच पर थी जिसकी वजह से बच्ची गिर पड़ी. इसलिए हम लोगों ने इसमें स्वतः संज्ञान लिया है. नॉइज़ पॉल्युशन अब बड़ी समस्या बन गया है.’

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कोर्ट ने माना कि एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट, 1986 और नॉइज़ पॉल्युशन रेगुलेशन रूल्स, 2000 के नियमों के बाद भी हर रोज़ इसका उल्लंघन होता है.  

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कोर्ट ने पूछा, 'कौन है जिम्मेदार?'

कोर्ट ने कुछ ज़रूरी सवाल उठाए. अदालत ने कहा कि इस समस्या को रोकने और कम करने के लिए कौन ज़िम्मेदार है? इस दिशा में क्या किया जा रहा है? अगर उठाए गए कदमों के बावजूद यह समस्या कम या बंद नहीं हो रही है, तो कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कोई सिस्टम बनाना होगा. 

अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 12 अक्टूबर तय की है. बेंच ने आदेश दिया कि यूपी के गृह विभाग, परिवहन, वन एवं पर्यावरण, आवास एवं शहरी नियोजन और शहरी विकास विभागों के प्रमुखों को विपक्षी पक्ष के तौर पर शामिल किया जाए. 

इस आदेश में डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस, पुलिस कमिश्नर (सेंट्रल), यूपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, लखनऊ पुलिस, म्युनिसिपल कमिश्नर, लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी के वाइस-चेयरमैन और बलरामपुर ज़िले के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस और चीफ़ मेडिकल ऑफ़िसर को पक्षकार के तौर पर शामिल किया गया है.

कोर्ट ने एक बात और साफ कर दी कि बच्ची के घरवालों और स्कूल प्रशासन को कोई भी स्टेट अथॉरिटी परेशान न करे. कोर्ट ने स्कूल प्रशासन को भी सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहने का आदेश दिया है. 

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