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अमेरिका ने गोल्डी बराड़ को Most Wanted बनाया, कहानी गैंगस्टर से शुरू हो भारत तक कैसे पहुंची?

Goldy Brar FBI Most Wanted: अमेरिका की कार्रवाई को आधिकारिक तौर पर लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क और दूसरे India-based transnational organised crime groups के खिलाफ कार्रवाई बताया गया है. लेकिन निज्जर हत्या, कनाडा के पुराने आरोप और भारतीय एजेंसियों के साथ अमेरिकी कानून प्रवर्तन के सहयोग के बीच बड़ा सवाल ये है कि अमेरिका इस पूरे नेटवर्क को आखिर किस नजर से देख रहा है.

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अमेरिका की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में गोल्डी बराड़ (Courtesy: FBI X)

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  • एफबीआई ने 28 सितंबर 2026 को सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को अपनी Ten Most Wanted Fugitives की सूची में शामिल किया और उनके बारे में जानकारी देने पर 10 लाख डॉलर का इनाम घोषित किया।
  • गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई पर हत्या, ड्रग्स तस्करी और फिरौती जैसे संगठित अपराधों में भूमिका के आरोप हैं, जो अमेरिकी, कनाडाई और यूरोपीय एजेंसियों की साझा जांच का हिस्सा हैं।
  • अमेरिका ने गोल्डी बराड़ के खिलाफ प्रत्यर्पण की मांग करने का संकेत दिया है और इस कार्रवाई को संगठित अपराध के खिलाफ एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

28 सितंबर 2026 को अमेरिका की जांच एजेंसी FBI ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने भारत से जुड़े संगठित अपराध और विदेशों में बैठे गैंगस्टरों की कहानी को फिर से चर्चा में ला दिया. FBI ने सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को अपनी Ten Most Wanted Fugitives की लिस्ट में शामिल कर लिया. गोल्डी बराड़ के बारे में जानकारी देने पर 10 लाख डॉलर (करीब 9.58 करोड़ रुपये) तक के इनाम की घोषणा भी हुई है.

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FBI की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक गोल्डी बराड़ को लॉरेंस बिश्नोई Organized Crime Group से जुड़ा बताया गया है और उस पर हत्या, फिरौती, गोलीबारी, अपहरण, नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में कथित भूमिका के आरोप हैं. FBI उसे इस संगठन का उत्तर अमेरिकी नेता बताती है.

यानी अमेरिका की आधिकारिक कहानी की पहली लाइन काफी साफ है. यहां मामला किसी राजनीतिक संगठन के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर रखा गया है, जिसके बारे में अमेरिकी जांच एजेंसियां कह रही हैं कि उसका नेटवर्क अमेरिका, कनाडा, भारत और दूसरे देशों तक फैला हुआ है.

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गोल्डी बरार पर FBI का एक्शन (Courtesy: FBI X) 

लेकिन अमेरिका से शुरू हुई ये कहानी बस यहीं खत्म नहीं होती.

जुलाई में ही अमेरिका ने कर दिया था बड़ा ऑपरेशन

गोल्डी बराड़ को मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में डालना दरअसल एक बड़ी कार्रवाई की अगली कड़ी है. जुलाई 2026 में अमेरिका, कनाडा और यूरोप की एजेंसियों ने ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ (Operation Hard Ball) नाम से कार्रवाई की थी.

अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक तीन अलग-अलग अभियोगों में 37 लोगों को आरोपी बनाया गया था और 24 लोगों को अमेरिका, कनाडा और यूरोप में गिरफ्तार किया गया था या वो पहले से हिरासत में थे. इस कार्रवाई में तीन ‘भारत स्थित अंतरराष्ट्रीय संगठित आपराधिक समूह’ (India-based transnational organized crime groups) को निशाना बनाया गया था.

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अमेरिकी एजेंसियों ने करीब 1,000 किलोग्राम कोकीन, एक किलोग्राम हेरोइन, 40 हजार डॉलर नकद और 12 हथियार जब्त किए थे. अमेरिका में 23 और लॉस एंजिल्स इलाके में 11 तलाशी वारंट भी चलाए गए थे.

शिकागो में रहने वाली पत्रकार और इंडियन डायरपोरा की अहम सदस्य सविता झिंगरन कहती हैं,

यहां अमेरिकी अधिकारियों की भाषा पर गौर करना जरूरी है. अमेरिका के फर्स्ट असिस्टेंट यूएस अटॉर्नी बिल एसेली ने कहा कि जो अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह डर, ड्रग्स और हिंसा फैलाते हैं, उनके खिलाफ अमेरिकी सरकार पूरी ताकत से कार्रवाई करेगी. 

FBI के लॉस एंजिल्स कार्यालय के अधिकारी पैट्रिक ग्रैंडी ने भी कहा कि 

एजेंसियों का मकसद इन हिंसक संगठनों की पहचान करना, उनकी गतिविधियों को रोकना और उन्हें न्याय के सामने लाना है.

यानी अमेरिका की अपनी भाषा में देखें तो शुरुआती फ्रेम बिल्कुल क्राइम का है.

फिर भारत सरकार वाला सवाल कहां से आया?

अब यहां कहानी थोड़ी पेचीदा होती है. लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ का नाम सिर्फ गैंगवार, फिरौती और ड्रग्स की वजह से अंतरराष्ट्रीय चर्चा में नहीं आया. 2023 में कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद इस नेटवर्क का नाम भारत और कनाडा के बीच चले लंबे कूटनीतिक विवाद से भी जुड़ गया.

जुलाई 2026 में अमेरिकी अभियोग में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ पर निज्जर की हत्या की साजिश को अंजाम देने का आरोप लगाया गया. अमेरिकी अभियोग के मुताबिक बिश्नोई जेल में रहते हुए भी कथित तौर पर अपने नेटवर्क को निर्देश दे रहा था और गोल्डी बराड़ उत्तर अमेरिका में संगठन का काम संभाल रहा था.

ऑस्टिन, टेक्सास में रहने वाले भारतीय मूल के अमेरिकी आईटी प्रोफेशनल अमन अरोड़ा कहते हैं,

इस पूरे मामले में एक बहुत जरूरी बात है, जिसे ठीक से समझे बिना किसी तरह का कयास नहीं लगाना चाहिए. वो तथ्य ये है कि अमेरिकी अभियोग में भारत सरकार को निज्जर की हत्या में शामिल नहीं बताया गया है.

Reuters ने भी अपनी रिपोर्ट में इस बात को साफ तौर पर नोट किया कि अमेरिकी अभियोग में भारतीय सरकार की संलिप्तता का आरोप नहीं लगाया गया. यही बात इस पूरी कहानी को समझने की चाबी है.

कनाडा के आरोप और अमेरिकी केस को एक ही चीज समझना गलती होगी

निज्जर की हत्या के बाद तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय सरकारी एजेंटों और हत्या के बीच संभावित संबंध की बात कही थी. भारत ने इन आरोपों को खारिज किया था.

2024 में कनाडाई अधिकारियों ने भारत सरकार से जुड़े लोगों और आपराधिक नेटवर्क के बीच संबंधों को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे. कनाडा की सार्वजनिक सुरक्षा और खुफिया रिपोर्टिंग में भी इस तरह के आरोपों का उल्लेख हुआ.

लेकिन बाद की कहानी में एक अहम बदलाव आया. जुलाई 2026 में जब अमेरिका ने बिश्नोई और गोल्डी बराड़ के खिलाफ अभियोग दाखिल किया, तो उसमें भारत सरकार को इस आपराधिक नेटवर्क का संचालक या प्रायोजक नहीं बताया गया. यही वजह है कि अमेरिकी कार्रवाई को सीधे भारत सरकार के खिलाफ कार्रवाई कहना उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ठीक नहीं होगा.

और यहीं से आता है असली सवाल, “अमेरिका इन गैंग्स को देख कैसे रहा है?”

अगर अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों और वहां की मीडिया रिपोर्टिंग को साथ रखकर देखें तो एक तस्वीर बनती है. अमेरिकी फेडरल एजेंसियों के साथ काम कर चुकीं और इन दिनों नेवाडा (nevada) में HR फर्म चलाने वाली मरियम एनी इसे तीन नजरिये से देखती हैं. लल्लनटॉप से बात करते हुए मरियम कहती हैं,

पहला नजरिया ये है कि बिश्नोई नेटवर्क एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन है. दूसरा नजरिया ये है कि इस नेटवर्क की गतिविधियां भारतीय मूल के लोगों और भारतीय प्रवासी समुदायों तक पहुंच रही हैं. तीसरा सवाल ये है कि इस नेटवर्क के कुछ लोगों के संभावित संबंध अलग-अलग देशों की सुरक्षा और खुफिया गतिविधियों से जुड़े रहे हैं या नहीं.

लेकिन मरियम ये बात भी जोड़ना नहीं भूलतीं कि इन तीनों बातों को एक ही निष्कर्ष में बदल देना सही नहीं होगा.

FBI की अपनी भाषा में बिश्नोई संगठन एक आपराधिक गिरोह है. अमेरिकी अभियोग में उसे एक आपराधिक संगठन के तौर पर दर्ज किया गया है, जो फिरौती और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी गतिविधियों में शामिल होने का आरोपी है.

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बरार गैंग पर सख्त हुई FBI (Courtesy: FBI X)

अमेरिकी मीडिया में कहानी का दूसरा पहलू भी दिखता है

अमेरिकी मीडिया की कुछ रिपोर्टिंग में निज्जर मामले और भारत सरकार से जुड़े पुराने आरोपों को भी साथ में रखा गया है.

Wall Street Journal ने जुलाई 2026 में बिश्नोई पर अमेरिकी अभियोग की रिपोर्टिंग करते हुए ये सवाल उठाया कि भारत की जेल में बंद एक गैंगस्टर कथित तौर पर इतना बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क कैसे चला सकता था. उसी रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि अमेरिकी अभियोग ये नहीं कहता कि भारतीय सरकार इस हत्या में शामिल थी. रिपोर्ट में भारत और अमेरिका के बीच एक दूसरे मामले का भी जिक्र किया गया, जिसमें एक भारतीय सरकारी अधिकारी पर अमेरिका में एक अलग हत्या की साजिश से जुड़े आरोप लगे थे.

यानी अमेरिकी मीडिया में इंडिया कनेक्शन की चर्चा जरूर है, लेकिन हर मामले को एक ही खाते में डालकर नहीं देखा जा रहा. ये फर्क बहुत जरूरी है.

इस पहलू पर डिप्लोमैटिक थिंक टैंक ‘इंडिया मैटर्स’ के रोहित शर्मा बड़ी दिलचस्प बात कहते हैं. लल्लनटॉप से फोन पर बात करते हुए रोहित ने कहते हैं,

सबसे दिलचस्प बात ये है कि भारत की एजेंसियां अमेरिका के साथ ही काम कर रही हैं. सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है. मतलब सरकारी तौरपर ये सिर्फ और सिर्फ एक ‘संगठित आपराधिक गैंग’ के खिलाफ अमेरिकी फेडरल एजेंसियों का एक्शन है.

मगर ऐसे में ये सवाल उठना भी लाजिमी है कि आम अमेरिकी नागरिक क्या सोचता है. इस सवाल का  जवाब देते हुए रोहित कहते हैं,

कुछ नहीं…जी हां, एक आम अमेरिकी नागरिक इस बारे में कोई राय नहीं रखता. ज्यादातर अमेरिकियों ना तो गोल्डी बरार के बारे में कुछ पता है और ना ही लॉरेंस बिश्नोई. वो तो निज्जर की हत्या और पन्नू पर हमले के बाद भारत और कनाडा के बीच जो डिप्लोमैटिक उठापटक हुई, उसके चलते यूएस मीडिया के एक धड़े में इस केस को कवरेज मिल भी गई.

अब इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा.

ऑपरेशन हार्ड बॉल से पहले अमेरिकी कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने भारत की कई केंद्रीय एजेंसियों के साथ बैठकें की थीं. The Indian Express ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि इन बैठकों में लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा, जग्गू भगवानपुरिया और उनके सहयोगियों के नाम और संभावित ठिकानों से जुड़ी जानकारी साझा और सत्यापित की गई.

अगर सिर्फ राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो ये सवाल स्वाभाविक है कि अगर अमेरिका को इन गिरोहों को भारत सरकार का हिस्सा मानना होता, तो फिर भारतीय एजेंसियों से ही इन गिरोहों के खिलाफ जानकारी क्यों ली जाती?

जाहिर है, अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन में सहयोग अपने आप में ये साबित नहीं करता कि दोनों देशों के बीच हर मुद्दे पर एक जैसी राय है. लेकिन इस मामले में इतना जरूर दिखता है कि भारतीय और अमेरिकी एजेंसियां आपराधिक नेटवर्क को निशाना बनाने के मामले में एक दूसरे के साथ काम कर रही हैं.

एक और जरूरी कड़ी, अमेरिका बिश्नोई को भारत से निकालना चाहता है

शिकागो में रहने वाली भारतीय मूल की पत्रकार सविता झिंगरन अपने सोर्सेज के हवाले से कहती हैं,

ऑपरेशन हार्ड बॉल के बाद अमेरिकी अभियोजकों (प्रॉसिक्यूशन) ने ये भी संकेत दिया कि लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ अमेरिका प्रत्यर्पण की मांग कर सकता है. वो फिलहाल भारत की साबरमती जेल में बंद है.

अमेरिकी अभियोजक कार्यालय के सार्वजनिक मामलों के अधिकारी ने Indian Express को बताया था कि अमेरिका बिश्नोई के प्रत्यर्पण की मांग करेगा, हालांकि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया लंबी हो सकती है और इसमें कई साल लग सकते हैं.

सविता झिंगरन कहती हैं, 

इससे ये भी समझ आता है कि अमेरिका इस मामले को सिर्फ एक मीडिया हेडलाइन की तरह नहीं, बल्कि लंबी कानूनी प्रक्रिया के तौर पर देख रहा है.

तो क्या अमेरिका में ये माना जा रहा है कि गैंग्स को भारत सरकार चला रही है? 

यहीं सबसे सावधानी से जवाब देना होगा. अमेरिकी सरकार के मौजूदा अभियोग और FBI की आधिकारिक भाषा से ऐसा निष्कर्ष नहीं निकलता. अमेरिका की आधिकारिक कार्रवाई का आधार आपराधिक गतिविधियां हैं. हत्या, फिरौती, ड्रग्स, हथियार, अपहरण और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध.

लेकिन अमेरिकी और कनाडाई मीडिया की कुछ रिपोर्ट्स में भारतीय सरकारी एजेंसियों और कुछ आपराधिक नेटवर्क के संभावित संबंधों को लेकर चर्चा जरूर हुई है. ये चर्चा खास तौर पर निज्जर और दूसरे मामलों की वजह से पैदा हुई.

यानी अमेरिका में दो अलग धारणाएं (narratives) मौजूद हैं.

  • एक, बिश्नोई और बराड़ एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क चलाने के आरोपी हैं.
  • दूसरा, क्या कभी इस तरह के आपराधिक नेटवर्क का इस्तेमाल किसी राज्य से जुड़े लोगों ने अपने किसी मकसद के लिए किया?

पहला नैरेटिव अमेरिकी कानून प्रवर्तन की मौजूदा कार्रवाई का आधार है. दूसरा सवाल अभी भी आरोपों, जांच और अलग-अलग देशों की रिपोर्टिंग के दायरे में आता है.

कनाडा का 2026 वाला रुख भी कहानी बदलता है

इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य है. जुलाई 2026 में कनाडा की तरफ से सामने आई रिपोर्टिंग में निज्जर हत्या के मामले में भारतीय सरकार को जोड़ने वाला कोई नया प्रमाण सामने नहीं रखा गया. रॉयटर्स ने भी इस बदलाव को अपनी रिपोर्ट में दर्ज किया था.

दूसरी तरफ कनाडा ने सितंबर 2025 में लॉरेंस बिश्नोई गैंग को अपने कानून के तहत आतंकवादी इकाई घोषित कर दिया था. इसका मतलब ये है कि कनाडा भी बिश्नोई नेटवर्क को एक गंभीर सुरक्षा खतरे के तौर पर देखता है, भले ही भारत सरकार से जुड़े आरोप एक अलग सवाल हों.

‘इंडिया मैटर्स’ के रोहित शर्मा इस मुद्दे को और साफ करते हुए कहते हैं,

भारत ने कनाडा से हर बार उसके आरोपों को साबित करने वाले सबूत मांगे, जिसे कनाडा देने में नाकाम रहा. यही वजह है कि वहां कि पीएम बदलते ही इस मुद्दे पर कनाडाई सरकार का टोन भी धीरे-धीरे नरम पड़ता गया. 

आखिर इस पूरी कहानी को कैसे समझें?

गोल्डी बराड़ का FBI की Ten Most Wanted सूची में पहुंचना एक बड़ी कार्रवाई है, लेकिन इसकी वजह को सिर्फ भारत और अमेरिका के बीच राजनीतिक तनाव के चश्मे से देखना अधूरा होगा.

अमेरिका के पास अपने दस्तावेजों में हत्या, फिरौती, ड्रग्स और संगठित अपराध से जुड़े आरोप हैं. Operation Hard Ball में 37 लोगों को आरोपी बनाया गया और 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया या पहले से हिरासत में होने की बात कही गई. फिर गोल्डी बराड़ को FBI की सबसे चर्चित वांछित अपराधियों की सूची में डाल दिया गया और इनाम 10 लाख डॉलर तक पहुंच गया.

दूसरी तरफ इंडिया कनेक्शन वाला सवाल पूरी तरह गायब भी नहीं हुआ है. निज्जर की हत्या, कनाडा के पुराने आरोप, अमेरिका के दूसरे मामलों में भारतीय अधिकारियों से जुड़े आरोप और अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टिंग ने इस सवाल को जिंदा रखा है.

लेकिन फिलहाल उपलब्ध अमेरिकी दस्तावेजों में गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई को अपराधी नेटवर्क के तौर पर टारगेट किया गया है, भारत सरकार को इस नेटवर्क का संचालक बताकर नहीं.

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और शायद इस कहानी की सबसे बड़ी खबर यही है.

अमेरिका जिस चीज पर कार्रवाई कर रहा है, वो सिर्फ भारत में पैदा हुआ कोई गैंग नहीं है. अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक ये ऐसा नेटवर्क है जो जेल से लेकर अमेरिका की सड़कों तक, भारत से कनाडा और यूरोप तक फैले आपराधिक संपर्कों के जरिए काम करता है.

अब सवाल ये है कि आने वाले समय में अमेरिकी अदालत में इन आरोपों से जुड़े कौन से सबूत सामने आते हैं. क्योंकि असली तस्वीर सिर्फ एफबीआई की प्रेस रिलीज या मीडिया की सुर्खियों से नहीं, बल्कि अदालत में पेश होने वाले सबूतों से साफ होगी.

वीडियो: गैंगस्टर पेरी की हत्या के बाद गोल्डी बरार ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को क्या चेतवानी दी?

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