कर्नाटक सरकार ने एकेडमिक ईयर 2024-25 के लिए कन्नड़ भाषा और सोशल साइंस की टेक्स्ट बुक में बदलाव को मंजूरी दे दी है. ये फैसला मंजूनाथ जी हेगड़े समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है. सरकार ने करीब 114 टेक्स्ट बुक में बदलाव किए हैं. एकेडमिक ईयर 2024-25 के लिए जिन टेक्स्ट बुक में बदलाव किया गया है उसमें 44 कन्नड़ भाषा की हैं. और 70 सोशल साइंस की.
कर्नाटक सरकार ने स्कूल की किताबों में किया बदलाव, 'रिलीजन' को क्या कर दिया?
नए बदलावों में POCSO एक्ट, नीति आयोग और एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न दिए जाने की जानकारियों को शामिल किया गया है.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, नए सिलेबस में गिरीश कर्नाड, पी. लंकेश, देवनूर महादेव और मुदनकुडु चिन्नास्वामी जैसे लेखकों के कार्यों को शामिल किया गया है. क्लास 1 से 10वीं तक की कन्नड़ फर्स्ट लैंग्वेज की किताब में बदलाव किया गया है. वहीं 9वीं और 10वीं की कन्नड़ थर्ड लैंग्वेज की किताब का सिलेबस बदला गया है. सोशल साइंस की छठी से लेकर 10वीं तक की किताब में बदलाव किया गया है.
‘Religions’ को बदलकर ‘धर्म’ किया गयासिलेबस चेंज में राज्य के सांस्कृतिक नेताओं और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेताओं के कार्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, कन्नड़ साहित्य पर भी जोर दिया गया है. सोशल साइंस के सिलेबस को संविधान, लैंगिक संवेदनशीलता, बाल अधिकारों की जानकारी और देश के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को ध्यान में रखते हुए बदलाव किया गया है.
इसके साथ ही कुछ किताबों के चैप्टर के टाइटल में भी बदलाव किया गया है. ‘Religions’ को बदलकर ‘धर्म’ कर दिया गया है. सनातन धर्म के चैप्टर में कुछ और जानकारी जोड़ी गई है. भक्ति आंदोलन के चैप्टर में कनक दास, पुरंदर दास और शिशुनाला शरीफ को शामिल किया गया है.
‘भक्ति आंदोलन’ में बदलावनए बदलावों में POCSO एक्ट, नीति आयोग और एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न दिए जाने की जानकारियों को शामिल किया गया है. नौवीं की टेक्स्ट बुक में ‘भक्ति आंदोलन’ में कुछ बदलाव किया गया है.
हेगड़े समिति ने सावित्रीबाई फुले और पेरियार जैसे समाज सुधारकों पर फिर से चैप्टर शुरू करने की सिफारिश की है. इन्हें पहले क्लास 10वीं की इतिहास की किताबों से हटा दिया गया था. हालांकि, कमेटी ने टीपू सुल्तान और हैदर अली से जुड़े चैप्टर को वापस लाने की सिफारिश नहीं की.
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