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वो एडल्ट फिल्म पास हो गई है जिसमें एक गे आदमी हनुमान-भक्त है

दो साल से सेंसर बोर्ड ने फिल्म को बैन कर रखा था.

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फिल्म के एक दृश्य में पेटिंग बनाते हुए हैरिस और पूजा करते हुए विष्णु. (फोटोः का बॉडीस्केप्स स्क्रीनशॉट)
बात पिछली अगस्त की है जब केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के बॉस पहलाज निहलानी हुआ करते थे. तब उनके केरल के त्रिवेंद्रम स्थित क्षेत्रीय ऑफिस ने एक मलयालम फिल्म को पास करने से बार-बार मना कर दिया था. फिल्म का नाम था - 'का बॉडीस्केप्स.' 
इसकी कहानी केरल के कालीकट में रहने वाले तीन पात्रों की है. पहला होता है हैरिस जो एक संघर्षरत पेंटर है, गे है और पुरुषों की न्यूड पेटिंग बनाता है. दूसरा है विष्णु जो हनुमान भक्त है, रुढ़िवादी हिंदू परिवार से आता है और हैरिस से प्रेम करता है. तीसरा किरदार सिया का है जो फेमिनिस्ट है, एक फैक्ट्री में काम करती है और एक रुढ़िवादी मुस्लिम परिवार से आती है.
फिल्म को लेकर डायरेक्टर जयन चेरियन से दी लल्लनटॉप ने बात की थी. उन्होंने बताया कि इस फिल्म में कोई अश्लीलता या गाली-गलौज़ नहीं है. सेंसर बोर्ड ने वहीं इसके उलट बड़े सितारों की कमर्शियल फिल्मों को हमेशा पास किया है जिनमें आपत्तिजनक कंटेंट होता है. जैसे उन्होंने ममूटी की फिल्म 'कसाबा' को पास किया था.
'का बॉडीस्केप्स' लोगों के ऐसे समूह के बारे में है जो राजनैतिक प्रतिरोध के लिए अपने-अपने शरीर को औजार बनाकर इस्तेमाल कर रहे हैं. फिल्म में समान जेंडर के लोगों के बीच प्रेम और रजोवृत्ति पर बात करने की वर्जनाओं पर बात की गई है.
फिल्म के एक दृश्य में सिया. (फोटोः का बॉडीस्केप्स स्क्रीनशॉट)
फिल्म के एक दृश्य में सिया. (फोटोः का बॉडीस्केप्स स्क्रीनशॉट)

लेकिन सेंसर की रिवाइजिंग कमिटी ने इसमें कथित 56 कट लगाने के लिए कहा था. जयन ने इससे इनकार कर दिया था. उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड स्त्रियों से द्वेष रखने वाला और समलैंगिकों के प्रति घोर पूर्वाग्रह पालने वाला संगठन है. वे फिल्म को अपील ट्रिब्यूनल के समक्ष लेकर गए थे जिसे CBFC में सबसे प्रगतिशील संस्था माना जाता है लेकिन वहां के सदस्यों ने भी हैरान करने वाली बात की. उन्होंने तो फिल्म पास करने के लिए ये शर्त रखी कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की कही बातों को ही फिल्म में से हटाना पड़ेगा.
पूरा पढ़ें: हनुमान जी का लिंग दिखाने वाली फिल्म को सेंसर ने रोका

इसके बाद डायरेक्टर जयन फरियाद लेकर केरल हाई कोर्ट के पास गए. कोर्ट ने फिल्म की अभिव्यक्ति की समीक्षा करने के लिए बोर्ड को एक से अधिक बार कहा. उसे पास करने के लिए भी आदेश दिया. लेकिन बोर्ड प्रमुख पहलाज निहलानी (तत्कालीन) ने बैन नहीं हटाया. नौबत contempt of court की आ गई. केरल हाई कोर्ट ने माना कि निहलानी ने न्यायालय की अवमानना की है. लेकिन फिर तब तक निहलानी को सेंसर प्रमुख पद से हटा दिया गया था. नए चेयरपर्सन (प्रसून जोशी) आ गए थे इसलिए बोर्ड ने 'का बॉडीस्केप्स' पर फैसला लेने के लिए कोर्ट से और समय मांगा था.
फिल्म का पोस्टर.
फिल्म का पोस्टर.

अब जाकर 19 सितंबर को बोर्ड की रीजनल ऑफिसर प्रतिभा ए. ने 'का बॉडीस्केप्स' को एडल्ट सर्टिफिकेट के साथ पास कर दिया है. इसमें चार तरह के कट लगेंगे और एक जगह बदलाव करना होगा. फिल्म में ये कट्स लगाने होंगेः
1. वो सब दृश्य डिलीट करने होंगे जिनमें गोलवलकर और हेडगेवार की फोटो हैं, जहां भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का जिक्र है. 2. वो दृश्य डिलीट करने होंगे जहां भगवा झंडा नजर आता है. 3. वो दृश्य डिलीट करने होंगे जहां सिया का किरदार मास्टरबेशन कर रहा है. 4. वो दृश्य डिलीट करने होंगे जिनमें भगवान हनुमान की हाथों में किताब पकड़े पेंटिंग नजर आती है.
दो साल की लंबी लड़ाई के बाद अब जाकर ये फिल्म दर्शकों के सामने पहुंचेगी. सेंसर के बैन की वजह से इसे केरल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी नहीं प्रदर्शित करने दिया गया था. अब 'का बॉडीस्केप्स' वहां भी दिखाई जा सकेगी. सिनेमाघरों में रिलीज की डेट अभी तय होनी है.

फिल्म को मैंने बिना कट्स के देखा है और अच्छा होता अगर वयस्क दर्शक इसे उसी स्वरूप में देख पाते. इस एक्सप्रेशन की फिल्में इंडिया में कम ही बनती हैं. ऐसी भारतीय फिल्म मैंने पहले कभी नहीं देखी है.

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