The Lallantop

'कोई कितने ही ऊंचे पद पर हो', चुनाव में किस बयानबाजी को लेकर SC के पूर्व जज ने EC को सुनाया

जस्टिस केएम जोसेफ ने राज्यपालों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए. कहा कि राज्यपालों को केंद्र सरकार के एजेंट के रूप में काम नहीं करना चाहिए.

Advertisement
post-main-image
जस्टिस केएम जोसेफ ने केरल में एक लेक्चर के दौरान ये बातें कही हैं. (फाइल फोटो- पीटीआई)

लोकसभा चुनाव 2024 के अंतिम चरण के लिए प्रचार खत्म हो गया है. प्रचार के दौरान धर्म, जाति और संप्रदाय के आधार पर राजनीतिक दलों ने खूब बयानबाजी की. यहां तक कि चुनाव आयोग ने नोटिस तक जारी किया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस केएम जोसेफ ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की है. जस्टिस जोसेफ का कहना है कि अगर चुनाव प्रचार के दौरान धर्म, भाषा, जाति और संप्रदाय के इस्तेमाल किए जाने पर आयोग समय रहते कार्रवाई नहीं करता है तो वह संविधान का सबसे बड़ा अपमान है.

Advertisement

जस्टिस केएम जोसेफ ने 30 मई को केरल के एर्नाकुलम के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में एक लेक्चर दिया. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस लेक्चर का विषय था - 'बदलते भारत में संविधान'. इस लेक्चर में उन्होंने संविधान, धर्म निरपेक्षता, मीडिया, न्यायपालिका, अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखी.

जस्टिस जोसेफ ने कहा कि चुनाव आयोग को वोट के लिए धार्मिक पहचान का इस्तेमाल करने वाले नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने कहा, 

Advertisement

"वोट के लिए धर्म, नस्ल, भाषा और जाति का इस्तेमाल करना प्रतिबंधित है. चाहे कोई भी हो, कितने ही ऊंचे पद पर हो, चुनाव आयोग को ऐसे लोगों के खिलाफ समय पर कार्रवाई करनी चाहिए. उन्हें इन मामलों को पेंडिंग नहीं रखना चाहिए. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो ये संविधान का सबसे बड़ा अपमान कर रहे हैं."

जस्टिस जोसेफ ने इसकी चर्चा करते हुए जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा-123(3) का जिक्र किया. बताया कि साल 2017 में भी एक फैसले में कोर्ट ने इस कानून का जिक्र कर कहा था कि उम्मीदवार या उनके विरोधी के धर्म या किसी भी व्यक्ति के धर्म के नाम पर अपील करना प्रतिबंधित है.

द साउथ फर्स्ट की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आगे कहा कि चुनाव प्रचार में धर्म की कोई जगह नहीं है. राजनेताओं को अपनी सीमा के बारे में पता है. जस्टिस जोसेफ के मुताबिक, उन्हें (राजनेताओं) पता है कि उनके खिलाफ आचार संहिता या कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है. उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में सक्रिय रूप से कार्रवाई नहीं करना, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और देश के संस्थापकों के कामों को कमजोर करने जैसा है.

Advertisement
5 चरणों के बाद चुनाव आयोग ने नोटिस भेजा था

चुनाव आयोग ने पांच चरणों के चुनाव के बाद 22 मई को कांग्रेस और बीजेपी को नोटिस जारी किया था. नोटिस में दोनों पार्टी के अध्यक्षों से उनके स्टार प्रचारकों द्वारा आचार संहिता के उल्लंघन पर जवाब मांगा था. 

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को भेजे नोटिस में आयोग ने कहा था कि वे स्टार प्रचारकों को सांप्रदायिक आधार पर बयानबाजी से बचने का निर्देश दें. आयोग ने कांग्रेस, CPI और CPI (ML) की शिकायतों की कॉपी को भी अटैच किया था, जो राजस्थान के बांसवाड़ा में प्रधानमंत्री के भाषण से जुड़ी थीं. इस भाषण में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर मुसलमानों के तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए कहा था कि अगर वह सत्ता में आई तो अधिक बच्चे पैदा करने वालों और "घुसपैठियों" को संपत्ति सौंप देगी.

ये भी पढ़ें- शशि थरूर के पूर्व PA तस्करी के आरोप में गिरफ्तार, हैरान कांग्रेस सांसद ने बड़ी बात कही!

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे गए नोटिस में आयोग ने पार्टी के स्टार प्रचारकों को संविधान खत्म करने की गलत धारणा नहीं फैलाने का निर्देश देने को कहा था. आयोग ने राहुल गांधी के खिलाफ की गई भाजपा की शिकायत अटैच की थी. यह राहुल गांधी के उस भाषण से संबंधित थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री देश में एक भाषा चाहते हैं. बीजेपी की शिकायत में खड़गे के एक भाषण का भी जिक्र था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को राम मंदिर उद्घाटन के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था क्योंकि वह आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखती हैं.

"राज्यपाल केंद्र सरकार के एजेंट ना बनें"

इसके अलावा जस्टिस केएम जोसेफ ने राज्यपालों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए. साउथ फर्स्ट के मुताबिक, जस्टिस जोसेफ ने कहा कि राज्यपालों को केंद्र सरकार के एजेंट के रूप में काम नहीं करना चाहिए और एक निष्पक्ष स्टैंड लेकर रहना चाहिए. 

उन्होंने मणिपुर की घटना को लेकर मीडिया की भूमिका पर भी टिप्पणी की. कहा कि अगर मणिपुर जैसी घटनाओं को मीडिया सही तरीके से दिखाए तो सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं.

वीडियो: जस्टिस डी वाय चंद्रचूड़ के 2023 में दिए ऐसे बयान जिसने सरकार को परेशान किया

Advertisement