ईरान ने कथित तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने का ऑफर दिया है. इस खबर के सामने आने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में काफी गिरावट आई. ब्रेंट क्रूड की कीमत 2% से अधिक गिरकर करीब 98 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई.
ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने वाला है? भारत में शेयर बाजार, सोना सब 'उछल' जाएगा
रॉयटर्स के मुताबिक ईरान इस शर्त पर होर्मुज जलमार्ग को खोलने के लिए तैयार है कि अमेरिका अपना सैन्य दबाव कम करे. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि तेहरान का प्रस्ताव 16 सितंबर को मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका को भेजा गया था.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ईरान इस शर्त पर होर्मुज जलमार्ग को खोलने के लिए तैयार है कि अमेरिका अपना सैन्य दबाव कम करे. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि तेहरान का प्रस्ताव 16 सितंबर को मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका को भेजा गया था.
ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अमेरिका-ईरान युद्ध को खत्म करने के समझौते पर अमेरिका में मध्यस्थों के माध्यम से चर्चा की जा सकती है. 20 सितंबर को ईरान ने कहा था कि पता चला है कि अमेरिका ईरान में फिर से हमले करने की योजना बना रहा है.
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होर्मुज खुलने का भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर होगा?होर्मुज एक अहम समुद्री रास्ता है. दुनियाभर में जितना तेल और गैस खरीदा और बेचा जाता है उसका करीब 20% इसी रास्ते से होकर गुजरता है. इस रास्ते से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही होती है. ऐसे में अगर यह रास्ता खुलता है तो तेल की कीमतों में काफी कमी आ सकती है. अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनियाभर में कच्चे तेल का तीसरा सबसे ज्यादा खरीदार है.
जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से भारतीय शेयर बाजार में रुझान में उलटफेर हो सकता है. पिछले कुछ दिनों से भारतीय शेयर बाजार एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है.
ब्रोकरेज फर्म जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा, "ईरान द्वारा होर्मुज को खोलना भारत के शेयर बाजार के लिए एक बड़ा सकारात्मक कदम होगा. प्रमुख सूचकांकों में अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है."
रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च विभाग के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट अजीत मिश्रा का भी कुछ इसी तरह का मानना है. अजीत ने कहा, "अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल जाता है तो घरेलू बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है. ईरान ने खुद भी अमेरिका द्वारा दबाव कम करने पर इस समुद्री रास्ते को खोलने का प्रस्ताव रखा है. अगर ये खुलता है तो बाजार को मंदी से बाहर निकलने में मदद मिल सकती है."
हालांकि, अजीत मिश्रा का मानना है कि शेयर बाजार में लगातार तेजी तभी संभव है जब कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ जाएं. निफ्टी पिछले दो साल से गिरावट में है. इस साल अब तक निफ्टी में लगभग 11% की गिरावट दर्ज की गई है.
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सोना सस्ता होगा या महंगा?होर्मुज के फिर से खुलने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आएगी. इससे महंगाई में कमी आएगी. अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका समेत दुनियाभर में ब्याज दरों में तेजी का दौर थमेगा. यह सोने की कीमतों के लिए एक महत्वपूर्ण सकारात्मक पहलू होगा.
सेबी रजिस्टर्ड कमोडिटी एनालिस्ट अनुज गुप्ता ने कहा कि तेल की कीमतों में गिरावट से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का डर खत्म हो जाएगा. इससे सोने की कीमतों में उछाल आ सकता है. वे आगे कहते हैं कि कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर सोने की कीमतें 1.53 लाख से 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक बढ़ सकती हैं.
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