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जेएनयू के स्टूडेंट्स ने लहराई 'शाखा' की वर्दी, वजह ही कुछ ऐसी है

'ये जेएनयू है, तुम्हारी शाखा नहीं!'

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फोटो - thelallantop
आज हम इसपर बात नहीं करेंगे कि विरोध का ये तरीका उचित है या अनुचित न ही इसपर कि इस बात का विरोध होना भी चाहिए या नहीं. क्यूंकि फिर बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी. और दूर तलक न भी जाए तो बात इस छोटी सी पोस्ट में नहीं सिमट पाएगी.
तो यहां 'विरोध करने में आप कितने क्रिएटिव हो सकते हो' केवल इस बात पर बात होगी.
आखिर इसी क्रियेटिविटी के चलते ही तो अनुराग कश्यप की मूवी 'मुक्काबाज़' में 'बीफ बैन' से लेकर 'मॉब लिंचिंग' जैसी बातें तक सेंसर बोर्ड की पैनी नज़रों से बच निकलती हैं.
अब यही क्रियेटिविटी नज़र आई है JNU परिसर में. वो क्या है, इससे पहले समझते हैं कि मामला क्या है:
कुछ रोज़ पहले, यानी बीते बुधवार को JNU ने सभी पाठ्यक्रमों के छात्रों के लिए 75% उपस्थिति अनिवार्य कर दी थी. इसके बाद लगभग सभी छात्र संघों ने वीसी एम जगदीश कुमार को घेरना शुरू कर दिया और उनपर आरोप लगाया कि वो संघ की मानसिकता JNU में भी थोपना चाहते हैं.
तो ये तो था पूरा मामला - इन शॉर्ट.
अब आते हैं आज की बात पर. छात्रों ने जेएनयू, में 75% अनिवार्य उपस्थिति के आदेश का विरोध जताने के लिए कैम्पस की सड़कों पर ही हाज़िरी लगानी शुरू कर दी है.
JNU - 1

इतना ही नहीं, आज छात्रों ने वीसी पर अपने गुस्से का ठीकरा फोड़ते हुए खाकी पैंट को लेकर प्रदर्शन किया. आपको मालूम ही चल गया होगा कि खाकी पैंट से उनका इशारा किस तरफ था?
JNU - 2

और JNU में कोई एक राज्य या क्षेत्र के छात्र तो हैं नहीं. इसलिए जितनी छात्रों की बोली उतनी भाषाओँ में नारे.
JNU - 3
'ये जेएनयू है, तुम्हारी शाखा नहीं!'



JNU - 4
'और अब - अटेंडनेंस... हाज़िर जनाब!'



JNU - 5

'जेएनयू हम छात्रों का, शाखा की जागीर नहीं.'


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