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JNU में लग गया विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध? 'असली कहानी' अब पता चली है

जवाहरलाल नेहरू विश्विद्यालय से सामने आए नए मैनुअल पर विवाद हो गया. इसके मुताबिक धरना देने, भूख हड़ताल करने और विरोध प्रदर्शन करने पर छात्रों पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके बाद विश्विद्यालय की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने इस बारे में सफाई दी है.

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जवाहरलाल नेहरू विश्विद्यालय से सामने आए नए मैनुअल पर विवाद हो गया. इसके मुताबिक किसी भी विश्विद्यालय अधिकारी के घर के आसपास या किसी भी शैक्षणिक और प्रशासनिक परिसर के 100 मीटर के दायरे में धरना देने, भूख हड़ताल करने और विरोध प्रदर्शन करने पर छात्रों पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. अब विश्विद्यालय की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने इससे इनकार किया है.

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्विद्यालय(JNU protest ban) में विरोध प्रदर्शनों या हड़तालों पर प्रतिबंध लगा दिया गया. इसके बाद विश्विद्यालय की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने इससे इनकार किया है. उन्होंने कहा कि विश्विद्यालय ने परिसर में विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध नहीं लगाया है क्योंकि भारत के संविधान में भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है.

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हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने बताया कि प्रॉक्टर मैनुअल 1969 से लागू है. विश्विद्यालय ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया है. दरअसल, 12 दिसंबर को सामने आया था कि पिछले महीने जारी हुए नए मैनुअल के तहत, विश्वविद्यालय के किसी भी अधिकारी के घर के आसपास या किसी भी शैक्षणिक और प्रशासनिक परिसर के 100 मीटर के दायरे में धरना देने, भूख हड़ताल करने और विरोध प्रदर्शन करने पर छात्रों पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है.

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इसके बाद छात्रों और शिक्षकों ने इसे लेकर चिंता और आपत्ति जताई. JNU की कुलपति ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले दिनों प्रशासनिक ब्लॉक के 100 मीटर के दायरे में विरोध प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने के बारे में कई आदेश दिए थे. ये नियम पिछले कुछ सालों में पेश किए गए. हाई कोर्ट में इस बारे में 4 और मामले चल रहे हैं.

'हाई कोर्ट के आदेश पर जारी किए नियम'

कुलपति पंडित ने आगे ये भी बताया कि हाई कोर्ट ने विश्विद्यालय से इन नियमों को लिखित और कानूनी तरीके से पेश करने के लिए कहा था. इसके चलते चीफ प्रॉक्टर्स ऑफिस (CPO) ने ये मैनुअल तैयार किया था. वे विश्विद्यालय में नियमों, रेगुलेशंस और अनुशासन को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार हैं.

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कुलपति ने कहा कि ये मैनुअल 1969 से लागू है. हालांकि, तब ये सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं था. अब उन्होंने इसे सार्वजनिक कर दिया है. कुलपति पंडित ने बताया कि जब तक छात्र नियमों का उल्लंघन नहीं करते, तब तक विश्विद्यालय विरोध प्रदर्शनों पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाएगा. भारत के संविधान में हम सभी को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है. JNU इसके खिलाफ नहीं जाएगा.

वहीं समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक विश्विद्यालय के एक अधिकारी ने भी इस मुद्दे पर सफाई दी है. उन्होंने बताया कि JNU परिसर में विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है. बल्कि कुछ जगहों को नामित कर दिया गया है, जहां पर प्रदर्शन किए जा सकते हैं.

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