अमेरिका और ईरान जंग के मुहाने पर खड़े हैं. दोनों तरफ से बयानबाजी और जंग की तैयारियां जारी हैं. जिनेवा में ये कोशिश भी जारी है कि जंग न हो. इसी बीच अब एक नई टेंशन भी सामने आ गई है. लेकिन इस बार टेंशन ईरान नहीं, बल्कि ब्रिटेन के साथ है. दरअसल प्रेसिडेंट ट्रंप ईरान पर हमले की तैयारी कर रहे हैं. और इसके लिए उन्हें ब्रिटेन के हवाई ठिकानों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है. लेकिन ब्रिटेन ने इसके लिए मना कर दिया है. उनका कहना है कि ऐसे हमले से अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होने का खतरा है.
ईरान पर अटैक के लिए यूएस ने मांगा एयरबेस, ब्रिटेन ने दे दी चेतावनी, कहा- 'यहां से हमला किया तो... '
अमेरिका ने ब्रिटेन से स्विंडन शहर में मौजूद RAF Fairford बेस मांगा है, लेकिन ब्रिटेन ने मना कर दिया है. उसने इसके पीछे की वजह भी बताई है और एक चेतावनी भी दे दी है.
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ब्रिटेन ने अमेरिका को रॉयल एयरफोर्स (RAF) का फेयरफोर्ड बेस देने से मना कर दिया है. स्विंडन शहर के पास मौजूद ये बेस अमेरिका के लिए अहम है. अगर उसे ईरान पर लंबी दूरी के विमानों से हमला करना है, तो ये बेस उसके काफी काम का है. लेकिन ब्रिटेन का कहना है कि अगर इसका इस्तेमाल ईरान पर हमले में हुआ, तो इससे इंटरनेशनल कानूनों का उल्लंघन होगा. यह झगड़ा अब चागोस टापू में डिएगो गार्सिया पर जा अटका है. ये UK-US का जॉइंट बेस है जिसके भविष्य पर बातचीत होनी है. इंडिया टुडे के मुताबिक 1970 के दशक से ही ये UK-US का जॉइंट बेस है. यह जगह इस इलाके में किसी भी लॉन्ग-रेंज मिलिट्री ऑपरेशन के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है.
लेकिन प्रेसिडेंट ट्रंप को UK का ये रवैया पसंद नहीं आया. उन्होंने चागोस आइलैंड्स पर कंट्रोल छोड़ने के खिलाफ चेतावनी दी है. ट्रुथ सोशल पर उन्होंने लिखा कि यूनाइटेड स्टेट्स को डिएगो गार्सिया और RAF फेयरफोर्ड तक पहुंच की जरूरत पड़ सकती है. ये जरूरत इसलिए है ताकि एक बहुत अस्थिर और खतरनाक सरकार (ईरान) के संभावित हमले को रोका जा सके.

डिएगो गार्सिया UK-US का जॉइंट बेस है. इसलिए मौजूदा ट्रीटी के तहत वहां से कोई भी मिशन शुरू करना हो, तो ब्रिटेन को जानकारी देना जरूरी है. लेकिन RAF के बेस इस्तेमाल करने के लिए UK की साफ मंजूरी की जरूरत होती है. और यहीं बात अटक गई है. 2001 के बाद UK पॉलिसी में शामिल किए गए इंटरनेशनल लॉ प्रिंसिपल के तहत, ‘कोई देश अगर जानबूझकर किसी ऑपरेशन में मदद करता है, तो वह भी किसी गैर-कानूनी मिलिट्री कार्रवाई के लिए बराबर का जिम्मेदार होगा.’ यही वजह है कि ब्रिटेन अपना एयरबेस देने को तैयार नहीं है.
ब्रिटेन ने हाल ही में चागोस आइलैंड्स को मॉरिशस को सौंपने की बात कही है. साथ ही उसने डिएगो गार्सिया को 99 साल के लिए 35 बिलियन यूरो में वापस लीज पर देने का प्लान रखा है. इस बात को लेकर लंदन-वाशिंगटन एकमत नहीं है. ट्रंप ने फिर से ब्रिटेन से आगे न बढ़ने की अपील की है. उन्होंने कहा कि डिएगो गार्सिया को वापस मत दो. उन्होंने पहले इस एग्रीमेंट को बड़ी गलती कहा है.
वीडियो: दुनियादारी: ट्रंप ने UK क PM कीर स्टारमर को Chagos Deal पर क्या चेतावनी दी?














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