दरअसल जिग्नेश मेवाणी 16 जनवरी को कैद-ए-मिल्लत इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ मीडिया स्टडीज में पहुंचे थे. वहां उन्हें शैक्षणिक लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों से मिलना था. उनसे बातचीत के बाद जिग्नेश को मीडिया से बात करनी थी. मीडिया जब उनसे बात करने के लिए पहुंचा, तो सारे चैनल के लोगों ने अपने-अपने माइक्रफोन जिग्नेश की टेबल पर रख दिए, ताकि उनकी आवाज रिकॉर्ड हो सके. इन चैनलों में अंग्रेजी का न्यूज़ चैनल रिपब्लिक भी शामिल था.

जिग्नेश ने कैद-ए-मिल्लत इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ मीडिया स्टडीज में लोगों के सामने अपनी बात रखी.
जिग्नेश रिपब्लिक के माइक को देखकर भड़क गए. उन्होंने पूछा कि यहां रिपब्लिक टीवी का रिपोर्टर कौन है. मैं रिपब्लिक के रिपोर्टर से बात नहीं करना चाहता. उनकी इस बात पर वहां मौजूद और लोगों ने कहा कि ये प्रेस कॉन्फ्रेंस है, एक्सक्लूसिव इंटरव्यू नहीं. जिग्नेश नहीं माने और कहा कि जब तक रिपब्लिक का माइक नहीं हटाया जाता, वो मीडिया से बात नहीं करेंगे. जिग्नेश ने कहा-
''ये मेरी अपनी पॉलिसी है कि मैं अर्नब गोस्वामी के चैनल रिपब्लिक टीवी से बात नहीं करूंगा.''इसके बाद सारे मीडिया संस्थानों ने जिग्नेश की प्रेस कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार कर दिया. सभी लोगों का कहना था कि जिग्नेश ये तय नहीं कर सकते कि किसका माइक रहेगा और किसका नहीं रहेगा. जब सारे मीडियाकर्मियों ने जिग्नेश का विरोध किया, तो फिर जिग्नेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बिना किसी सवाल का जवाब दिए चले गए.

विरोध के बाद जिग्नेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बिना सवाल लिए ही चले गए.
जिग्नेश मेवाणी अब नेता हैं. एक विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं. व्यक्तिगत तौर पर वो किससे बात करेंगे और किससे नहीं, ये तय करना उनके अधिकार में है. लेकिन सार्वजिनक जगहों पर किसी की मौजूदगी जिग्नेश या फिर कोई और नहीं तय कर सकता. आज जिग्नेश रिपब्लिक का बहिष्कार कर रहे हैं, किसी और दिन उनकी मर्जी होगी तो किसी और का बहिष्कार कर सकते हैं. ऐसे में मीडिया की ओर से जिग्नेश की बेवकूफी पर मीडिया की ओर से उनका बहिष्कार करना एक अच्छी पहल है.
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